Hindi Kahani: अरे कोसी! आज तो बहुत जल्दी आ गई”? “बस दीदी घर में कुछ मन नहीं लग रहा था तो सोचा जल्दी चली जाऊं काम भी हो जाएगा आपका और बस ऐसे ही…” कोसी ने धीरे से जवाब दिया। “अच्छा चल तू आ गई है तो कर ले फटाफट।” कोसी बहुत अच्छे से घर की […]
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घोंसला-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Social Story: जब तृषा ने पहली बार बसंत को देखा तो उसे लगा यह मौसम उसके जीवन में अब स्थाई हो जाएगा…. फिर ऐसा क्या हुआ की यह मौसम रूठ गया।कुछ ना हो कर भी बहुत कुछ हुआ जैसे अपेक्षाओं की अधिकता, काम का बोझ और एक दूसरे को पर्याप्त समय ना देना। कहने […]
”आत्मबल की ज्योति”-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Motivation Story in Hindi: ” शीतल हवाओं का आना और जाना लगा हुआ था समय का हाथ पकड़कर चांदनी रात आगे बढ़ रही थी कुछ ख्यालों ने अपनी चहल – पहल शुरू करके वातावरण में सभी का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करना शुरू कर दिया था। अभिषेक अपने कमरे की बालकनी में खड़े होकर आसमान […]
पँक्तिभेद-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Social Story: अरे सुनो, भाभी अभी सुबह-सुबह ही अपने मायके चली गयी हैं पन्द्रह दिनों बाद आयेंगी । उस घर का खाना देख लेना”,प्रभात के इन शब्दों ने सुगना के ज़ख्मों की पपड़ी उतार दी जैसेपापड़ी बेलते-बेलते उसके हाथ कुछ ज्यादा तेज़ चलने लगे।उखड़े स्वर में बोली क्या करूँ उनका आये दिन का राग है […]
मैडम जी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Social Story: ऑफिस का दरवाज़ा खुलते ही सबकी आवाज़ें धीमी हो जाती थीं।“मैडम जी आ गईं,” किसी ने धीरे से कहा। हर फ़ाइल करीने से सजी रहती, हर कर्मचारी सीधा बैठा होता। वजह थी – मानिनि।वरिष्ठ अफ़सर, तेज़ दिमाग़, सख़्त मिज़ाज। कम बोलतीं, पर उनके शब्द आदेश जैसे होते। लोग उन्हें पीछे से “मैडम […]
जिंदगी के साथ भी जिंदगी के बाद भी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Short Story: अरे, सुबह-सुबह यह क्या लेकर बैठ गए हैं? चाय नाश्ता कर लीजिए देर हो रही है। मुझे खाना बनाने में देर हो रही है।सुनो,यह मेरी कुछ पॉलिसीयों के कागज हैं यह पांच साल बाद पूरी होने वाली है। ये एफ.डी अगले साल पूरी होने वाली है और यह कुछ इन्वेस्टमेंट है जो मैंने किए […]
अर्थ-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Social Story: विकास अभी ऑफिस में घुसा ही था कि दो लड़के हाथ मे मिठाई का डिब्बा लिए खड़ा था.विकास उससे पहले कुछ कहता, दोनों लड़कों ने उसके पांव छू लिए. “सर आज आपके कारण हम अपने पैरों पर खड़े हैं “ “अगर आप हमें सहारा ना देते तो हम ना जाने दर दर की ठोकरे खाते?” विकास फीकी सी मुस्कान लिए हुए बोला “मैने तुम पर नहीं खुद पर उपकार करा हैं “ “तुम लोग अपने मम्मी पापा का नाम रोशन करो बस ये ही मेरा सपना हैं “ विकास फिर क्लास में पढ़ाने घुस गया था. ये ही तो वो जगह हैं जहां वो खुद को भूल जाता है. नही तो दो वर्ष पहले तक विकास बेहद बिजनेस ओरिएंटेड था.पहले एडवांस् में फीस जमा होती थी बाद में क्लास शुरू होती थी. विकास हर बच्चे को एक प्रोडक्ट की तरह देखता था, हर बच्चे की फीस के साथ जुड़ा होता था विकास का एक सपना.विकास अपने कोचिंग इंस्टिट्यूट में अमीर और मेधावी बच्चों का ही एडमिशन करता था. हर साल पूरे शहर में विकास सर के नाम का डंका बजता था. विकास ने नियत समय पर श्रुति से विवाह कर लिया था.श्रुति विकास के बिजनेस का मार्केटिंग और अकाउंट सेक्शन संभालती थी.दोनों के रिश्ते पति पत्नी से ज्यादा बिजनेस पार्टनर के लगते थे.मगर आर्यन और आहना के जन्म के बाद रिश्तों में थोड़ी गर्माहट आ गई थी. मगर फिर भी प्यार जैसा कुछ नहीं था. श्रुति को विकास का पैसों के पीछे का पागलपन पसंद नहीं था.उसे लगता विकास के अंदर एक शिक्षाविद नहीं ब्लकि एक कंजूस और चालक व्यापारी हैं. कितनी बार श्रुति ने महसूस किया था कि विकास बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा हैं.अगर उसे लगता कि कोई बच्चा उसके इंस्टिट्यूट का रिजल्ट ख़राब कर सकता हैं तो वो उसे बाहर कर देता था. विकास के ऐसे करने से अवसर उस छात्र का मॉरल इतना डाउन हो जाता था कि वो छात्र खुद को नकारा मान कर घर ही बैठ जाता था.श्रुति की इस बात पर विकास से बहुत बार बहस भी हो जाती थी. “विकास होनहार छात्र के साथ कामयाब होने में तुम्हारी क्या ही मेहनत हैं?” “जिन छात्रों को वास्तव मे तुम्हारी जरूरत है उन्हें तो तुम कान पकड़ कर बाहर कर देते हो “ विकास तिलमिला जाता और बोलता “मैने कोई धर्मशाला नहीं खोल रखी हैं “ “अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए मुझे ढेरों रुपये चाहिए “ श्रुति और विकास के बीच इन्हीं बातों के कारण दूरी बढ़ती जा रही थी. फिर एक रोज विकास के इंस्टीट्यूट में समीर दाखिला लेता हैं.समीर पास के गाँव का होनहार छात्र था.12 में उसके 90 प्रतिशत आए थे.आखों में ढेरों सपने लिए उसने विकास सर के यहां एडमिशन लिया था.समीर के पिता ने जमीन को गिरवी रखकर इंस्टिट्यूट की फीस जमा करी थी. दो महीने होते होते समीर को समझ आ गया था वो छोटे से गाँव का टॉपर हो सकता हैं मगर इस बड़े शहर मे वो बस एक औसत वर्ग का छात्र ही हैं.उसे कड़ी मेहनत के साथ साथ एक अनुभवी गुरु की आवश्कता हैं जो उसे हर कदम पर गाइड कर सके. मगर ठीक इसके विपरीत ,विकास ने समीर को एक दिन भरी कक्षा मे कुए का मेंढ़क और रटने वाला पीर कहा था. कक्षा समाप्त होने पर समीर को रोककर विकास से कहा “तुम वापिस गाँव चले जाओ, ये तुम्हारे बस का रोग नहीं हैं “ समीर हकलाहट से बोला “आप मुझे मौका तो दीजिए, मैं अंग्रेजी सीख लूंगा “ “मुझे आपके ज्ञान और अनुभव की आवश्यकता हैं “ “मेरे पापा की बहुत सारी उम्मीद जुड़ी हैं मुझसे “ विकास व्यंग्य से बोला “तुम्हारे सपने के चक्कर मे, मै अपने सपनों को नहीं तोड़ सकता हूं “ “तुम्हारे जैसे दो-चार और आ जाये, तो मेरा बिजनेस ही ठप हो जायेगा “ “कल आकर अपना हिसाब कर लेना “ समीर के आसुओं का विकास पर कोई असर नहीं हुआ था. अगले दिन विकास अचानक से लगातर मोबाइल की घंटी से उठ गया. उधर से कांपती आवाज में किसी ने कहा “सर समीर ने फांसी लगा ली हैं “ विकास एकाएक घबरा उठा.पुलिस के आने से पहले उसने पूरे कमरे की स्क्रीनिंग कर ली थी. एक नोट मिला था जिसमें समीर ने अपने दिल का हाल बयां कर रखा था.उस नोट को विकास ने चुपचाप उसे अपनी पेंट की पॉकेट में रख लिया था.समीर के घर वाले रोते हुए आए, कोई सबूत ना होने के कारण समीर का केस बंद कर दिया था. मगर विकास की जेब में रखा हुआ वो पुर्जा उसे तिल तिल मार रहा था. एक रोज श्रुति ने विकास से कहा भी ” तुम क्यों नहीं जा कर समीर के माता पिता से माफ़ी मांग लेते हो “ “मुझे मालूम हैं तुमने उस शाम उसे बहुत भला बुरा कहा था “ श्रुति की बात सुनते ही विकास भड़क उठा था. फिर एक रोज घर की सफ़ाई करते हुए श्रुति के हाथ समीर का नोट लग गया था. श्रुति तिलमिला उठी और उस रोज उनके घर भयंकर झगड़ा हुआ. विकास बोलता रहा “मैने बस समीर को असलियत से वाकिफ कराया था ,मैं कैसे उसकी मौत का जिम्मेदार हुआ?” श्रुति धारा प्रवाह बोलती रही “भगवान की लाठी बेआवाज़ होती हैं “ और तभी वो हादसा हो गया था. श्रुति और विकास कोचिंग सेंटर गए हुए थे जब शॉर्ट सर्किट होने के कारण विकास के घर मे आग लग गई थी और ये शॉर्ट सर्किट बस बच्चों के कमरे में ही हुआ था. जब दौड़ते भागता विकास पहुँचा तो बच्चों की बस राख ही मिल पायी.श्रुति फटी फटी आँखों से कभी विकास तो कभी बच्चों की राख को देख रही थी. दोनों ही काफी दिनों तक संज्ञा शून्य हो गए थे. जब विकास को होश आया तो उसका सब कुछ लुट गया था. बच्चे तो खो चुका था, श्रुति भी उसे छोड़ कर जा चुकी थी. उसके कोचिंग इंस्टिट्यूट की हालत पतली हो गई थी. उसका इंस्टिट्यूट लगभग बंद होने के कगार पर था. हिम्मत जुटा कर विकास ने एक फैसला लिया और वो समीर के माता पिता से माफ़ी मांगने गाँव पहुंचा, वहां जाकर उसने उस शाम की पूरी बात बतायी साथ ही साथ समीर का लिखा हुआ वो पुर्जा भी विकास ने उनके सुपुर्द कर दिया. समीर के माता-पिता ने विकास को माफ़ कर दिया था क्योंकि उन्हें मालूम था कि ऊपर वाले ने विकास को बेहद कड़ी सज़ा दे दी हैं. वापिस आकर विकास ने फिर से पढ़ाना शुरू किया मगर इस बार वो बिजनेस के लिए नहीं खुद के लिए पढ़ा रहा था.गरीब छात्रों से वो कोई फीस नहीं लेता था .उसकी जिंदगी का मकसद अब घरों को रोशन करना था. ये ही सब सोचते सोचते ना जाने किस पहर में विकास की […]
मैट्रो गर्ल -गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Hindi Short Story: ओह फ़ो ..जल्दी -जल्दी मेट्रो पास घर पर ही भूल गई ..टिकट के लिए लाइन भी लंबी है ….” अपने आप पर झुँझलाते हुए मैं लाइन मैं लग गई“ सर एक टिकट दिल्ली विश्वविद्यालय का दे दीजिए ““ मैडम ..छुट्टे पैसे दीजिए ..”“ नही है मेरे पास ..पे.टी.एम कर दूँ …”“ सॉरी मैडम ..सर्वर […]
एक अदद घर-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: मिडिल क्लास के सपने क्या होते हैं? कैसे होते हैं? और कब पूरे होते हैं? इन सपनों को पूरा करने में कितना संघर्ष होता होगा? कितना मायने रखता है….. हर वह पल जो किसी जरूरत को जुटाने के लिए खर्च होता है। छोटे छोटे सपने पूरा करने के लिए एक मध्यम वर्ग के […]
मिस क्युटी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Romantic Story: मेरे श्रीमान जी अपने मोबाइल में इस तरह डूबे हुए थे कि उन्हें मेरे पास होने ना होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। मैं सुबह से पच्चीसों मैसेज और छत्तीसों फोन कॉल कर लूं पर इस बंदे ने एक का भी जवाब नहीं दिया। रसोई का काम निपटा करके […]
