जमींदार बाबू गंगासहाय, हरखू दादा और सब गाँव वालों से विदा लेकर मैं और परमेश्वरी बाबू हिरनापुर के शहीद मेले से लौट रहे थे, तो ‘मोहना की जय…हिरनापुर के अमर शहीद मोहना की जय…!’ के नारे हमारा पीछा कर रहे थे। “मोहना तो गाँव का सीधा-सादा भोला युवक था। पर उसमें गाँधी जी समा गए […]
Category: उपन्यास
गृहलक्ष्मी आप सभी को कुछ महान उपन्यासकारों के द्वारा लिखे गये उपन्यास Hindi novel, Hindi Love story, Hindi novel in pdf format में provide करता है। जैसे कि मुंशी प्रेमचंद के द्वारा लिखी गई उपन्यास Hindi novel गोदान, भूतनाथ जिसके उपन्यासकार बाबू देवकीनन्दन खत्री, दौलत आई मौत लाई के महान उपन्यासकार जेम्स हेडली चेइज़ जोकि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
इस तरह के और भी बहुत से उपन्यास आप ग्रहलक्ष्मी पर पढ़ सकते है। जिसे पढ़ने में आपको बहुत ही ज्यादा मजा आयेगा और आप इससे बहुत कुछ सिख सकते है। जोकि आपके जीवन में बहुत ही उपयगी साबित होगी।
मोहना की निशानी है यह पेड़ – हिरनापुर का शहीद मेला
उन्होंने एक नजर सभा में बैठे लोगों पर डाली। फिर अपने को तनिक सँभालकर बोले— “हाँ, तो भाइयो, अच्छी तरह देख लो।…हिरनापुर गाँव के तालाब के किनारे सामने वाला बरगद का पेड़ वही है, जिसके नीचे मोहना इकतारा बजाकर बच्चों को किस्से-कहानियाँ सुनाया करता था। सरकार ने पहले तो धमकी दी कि बंद करो यह […]
मोहना को फाँसी – हिरनापुर का शहीद मेला
मोहना की कहानी सुनाते हरखू दादा अब थक चुके थे।… उनके मँह से निकलते शब्द भी कई बार इधर-उधर जा गिरते। जैसे अपने शब्दों पर उनका कोई बस न रह गया हो। बीच-बीच में वे हाँफने भी लगते थे।… पर कहानी का सुर उनके हाथ से छूटता न था। और वे अपने दोस्त मोहना की […]
मोहना अब नहीं लौटेगा – हिरनापुर का शहीद मेला
हिरनापुर के लोग इंतजार करते रहे, इंतजार करते रहे, पर मोहना नहीं लौटा। अंग्रेजों ने उससे किस तरह का बदला लिया होगा, सोचकर सब उदास थे। तभी जेलखाने के किसी कैदी ने संदेश भेजा, “मोहना अब कभी नहीं लौटेगा। आज की रात उसके जीवन की आखिरी रात…!” सुबह हिरनापुर के लोगों ने देखा, मोहना का […]
थाने में लोगों की भीड़ – हिरनापुर का शहीद मेला
थाने में दरोगा और दो सिपाही थे। भीड़ को देखकर उन्होंने मोरचा सँभाल लिया। दरोगा के हाथ में बंदूक, सिपाही मोटे-मोटे डंडों से लैस।…पर भीड़ के जोश का उन्हें अंदाज नहीं था। जब एक साथ सैकड़ों लोग थाने में घुसे, जिनमें औरतें और बच्चे सबसे आगे थे, तो सिपाहियों के साथ-साथ दरोगा की भी सिट्टी-पिट्टी […]
गांधी आया रे, आया रे, आया रे! – हिरनापुर का शहीद मेला
एक दिन मोहना नदी किनारे बच्चों से बात कर रहा था। बच्चे उसके नन्हे सैनिक थे। उन्हें वह समझा रहा था, कैसे गाँधी बाबा के संदेश को दूर-दूर तक पहुँचाना है। बीच में बच्चों के कहने पर उसने गीत का यही जोशीला सुर छेड़ दिया, “गाँधी आया रे….आया रे, गाँधी आया रे…!” मोहना गा रहा […]
मोहना काका की सभा – हिरनापुर का शहीद मेला
और फिर काशी भाई के जाने के बाद मोहना ने भी वही रास्ता चुन लिया। जगह-जगह पद-यात्राएँ। गाँव-गाँव में जागरण। वह सीधे-सादे शब्दों में गाँधी जी का संदेश लोगों के सामने रखता। कहता— “देखो भाइयो, गाँधी बाबा ने सारी दुनिया को रोशनी दिखा दी। तो वह रोशनी भला हिरनापुर में क्यों न आए?…मैं तो जी, […]
हिरनापुर गाँव में मोहना – हिरनापुर का शहीद मेला
हरखू दादा के आगे माइक रखा गया, पर वे चुप। जैसे तय न कर पा रहे हों कि क्या कहें, क्या न कहें।… उन्होंने पूरे सभामंडप पर निगाह दौड़ाई, फिर गाल पर हाथ रखकर कुछ सोचने से लगे। जैसे भूल गए हों कि उन्हें यहाँ बोलना है।…कि सभामंडप में उपस्थित हजारों लोग उन्हें सुनने के […]
हरखू दादा आ गए – हिरनापुर का शहीद मेला
बच्चों को इनाम बाँटने के साथ शाम को मेला खत्म होने को था। तभी अचानक किसी कोने से आवाज आई, “हरखू दादा आ गए, हरखू दादा…!” सुनते ही मेले के आयोजकों में बहुत से लोग दौड़े। जमींदार बाबू गंगासहाय भी। अभी-अभी मेले में लाठी ठक-ठक करते हरखू दादा ने प्रवेश किया था। बाबू गंगासहाय हाथ […]
चलो, चलो शहीद मेले में – हिरनापुर का शहीद मेला
रात्रि-विश्राम के बाद अगले दिन हम सबके सब शहीद मेले में थे, और मोहना बच्चों के बनाए दर्जनों बड़े-बड़े चित्रों और पोस्टरों में हमारे सामने था। इकतारा बजाता हुआ खुशदिल मोहना।… यही नहीं, और भी बहुत कुछ, जिसकी कल्पना न मुझे थी और न पंबे बाबू को। देखा, सुबह से ही ठठ के ठठ लोग […]
