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जग में आलोक तुम्हीं से है-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: तुम दुर्गा हो, तुम शक्ति हो ।तुम अनुपम रुप भवानी हो। तुम ही जीवन की गाथा है। भारत का उज्ज्वल माथा हो। हर एक जीव में प्राण तुम्हीं । रक्षा  हेतु  कृपाण  तुम्हीं  ।तुम  ही  से  रोज सवेरा है।उजली किरणों का डेरा है। संबंधों का संसार तुम्हीं ।वेदों ग्रंथों का सार तुम्हीं । तुम ही से उपवन महका है। चिड़ि‌यों का झुरमुट चहका है। सावन के […]

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मां जगतजननी कन्याओं की रक्षा के लिए करें प्रार्थना-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: मां जगत जननी इस बार तुम,कन्याओं की रक्षा करना।घूम रहे हैं पापी जहां-तहां,आकर इनका भक्षण करना। छोटे-छोटे फूल ये बच्चे,कैसे ये लड़ पाएंगे।मानव रूप में घूमें भेड़िए,मासूम किस विधि बच पाएंगे। आकर मां तुम ओ चामुंडा,सभी नर पिशाचों का वध करो।कोमल कोमल पंखों वाली ये चिड़ियां,इनकी उड़ान सुनिश्चित करो। तेरा ही रूप है […]

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हाँ स्त्री हूँ !-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: जिसने है दिया वजूद तुझे.. तेरे होने का सबूत तुझे.. जो कुर्बानी देकर जिन्दा है.. रिश्तों में कैद परिन्दा है.. अकड़ अकड़ कर जकड़ जकड़ कर  अब और कैद तुम क्या दोगे…! मैं वो नन्हीं चिड़िया नहीं, जो दाना डाल जकड़ लोगे..! ममता की महक से सराबोर.. वात्सल्य की मैं परछाईं हूँ… हाँ […]

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 मेरा अस्तित्व तुमसे-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: नारीत्व को कितनी संज्ञाएं और उपमाएं मिली, धरा, जननी सी विशालता मिली, गंगा सी आब बनी, प्रकृति की अनुपम कृति, देवी तुल्य दुर्गा, चंडी का रुप, मर्यादा का अनुष्ठान, दिव्य कर्तव्य, दायित्व का आधार, संस्कार की जड़े, विचारों में सम्मान मिला, अंनता,अपरिमित का ताज, मेरा अस्तित्व उन पुरुषों को समर्पित, जिन्होंने पुरुष प्रधान […]

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गुरु की महिमा—गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: गुरू मेरे गुरू, सब से न्यारे हैं,वो मिनटों में दुख हर लेते हैं,उनकी महिमा सब से न्यारी है,वो हम को सब से प्यारे हैं। गुरू दुख को सहने की शक्ति देते हैं,सुख को धीरज देते हैं,खुश रहने की उम्मीद दिलाते हैं,मेरे गुरू सब से न्यारे हैं। उनकी महिमा का मैं गुणगान कैसे करूँ,मेरी […]

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नारी की सुंदरता-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: तुम्हारी आँखों में काजल की गहराई,गजरे की महक से महकता है मेरा मन,तुम्हारी मुस्कान में अधरों की लाली,गले में हार की शोभा, तुम्हारी सुंदरता की कहानी। तुम्हारी कमर में करधनी की झनकार,हाथों में चूड़ियों की छम छम,पाँव में पाजेब की झंकार,बिछिया के घुँघरू की आवाज, तुम्हारी सुंदरता का जादू। तुम्हारी सुंदरता में आकर्षण है,तुम्हारे श्रृंगार में मादकता है,तुम्हारी आँखों […]

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काश मैं भी अपने पापा की परी होती-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: ‘काश की मैं संप्रति के जेनजी युग में जन्म   ली होती,काश मेरे जन्म पर भी मुझे ईश्वर का अमूल्य वरदान माना जाता,काश मेरे जन्म पर भी गुलाबी बलून और फूलों से मेरा स्वागत होता,काश घर घर का कोना कोना मेरे स्वागत में   पलकें बिछाता,काश पूरा परिवार मुझ पर जान छिड़कता,मेरी मां मुझसे आह्लादित होती …,मैं ही उनका अनुपम […]

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कच्ची उम्र में शादी, तुम नहीं करावो

Hindi Poem: इनकी तुम यह डोली , अभी नहीं सजावो।दुल्हन इनको तुम, अभी नहीं बनाओ।।रोको इनकी शादी, समझो बात को तुम।कच्ची उम्र में शादी , तुम नहीं करावो।।इनकी तुम यह डोली——————–।। बहुत बड़ा पाप है , इस उम्र में विवाह।न्याय नहीं इनके साथ, यह बाल विवाह।।तुम खिलने दो इनको , बिना बोझ के।इनके जीवन को नरक, नहीं ऐसे बनाओ।।इनकी तुम यह डोली———————–।। शिक्षा की उम्र है , अभी पढ़ने दो इनको।स्वर्णिम जीवन का सपना, देखने दो इनको।।तुम बन जाने दो , इनको […]

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पिया का घर -गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: छोड़ बाबुल का घर, जब मैं पिया के घर आई,नये लोगों के बीच थोड़ा सहमी और संकुचाई;सुना था जैसा मैंने, उससे हटकर सबको पाई,मेरे ससुराल वालों ने मुझसे ऐसी प्रीत निभाई। जीवनसाथी के रूप में एक सच्चा साथी पाई,खुशियों पर मेरी जिसने, अपनी खुशियां लुटाई;स्नेह मिला इतना, कि कभी लगा नहीं मैं पराई,छोड़ बाबुल का घर, जब मैं पिया के घर आई। सास-ससुर […]

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तलाश-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: मन में तैरता ढूँढता है वोजैसे किसी कश्ती कोभूखंड की तलाश हो —कभी लहरों पर सवार होकर आता,कभी मौन में डूब जाता है। ठहर जाना चाहता है मुझमें —रेत से लिपटा हुआ,थका, पर अभी भी जीवित।मैं छूती हूँ उसे —तो वह फिसल जाता हैजैसे कोई अधूरा वादा,या कोई सपना जो पलकों से बाहर गिर गया […]

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