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प्रेम का रंग-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Kavita: जो वादे किए थे तुमने कभी मुझसेउन वादों का ज़िक्र करु या न करूंवो हरबार आदतन तुम्हे सोचा करनादुआओं में हरपल तुम्हारी फिक्र करनामैं आज वो सब कुछ, करूँ या न करूं हमेशा की तरहतू कुछ बताता क्यों नहीआकर बस एकबारयह जताता क्यों नहीक्यों नही कह देता किमनु , कोई रिश्ता नही अब […]