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पतंग और मांझा-गृहलक्ष्मी की कविता

मकर संक्रांति के पावन पर्व पररेवड़ी, गजक,तिल के लड्डू की मिठाससबका मिलकर पतंगबाजी करनादेता एक सुखद मस्ती का अहसास रंग बिरंगी पतंगें उड़ती जब गगन मेंआकर्षित करती सबके मन कोमांझा अगर  ज्यादा मजबूत हो तोकाट देती पेंच लड़ा के कमजोर को यह भी पढ़ें | एक चेहरे के कई रूप नजर आए—गृहलक्ष्मी की कविता जब […]