Hindi Poem: हर बेटी के भीतरएक अनसुनी धड़कन होती है —माँ की।जो समय के हर पड़ाव परधीरे से याद दिलाती है कि“तू अकेली नहीं, मैं तेरे भीतर हूँ।” माँ बहुत याद आती है —क्योंकि जीवन के हर रंग, हर विधि,उसी से तो सीखी थी।खाना बनाना, तुलसी को जल चढ़ाना,दीपक का रुख किस दिशा में हो —सब उसकी ही सिखाई हुई लकीरें हैं,जो आज […]
Author Archives: मधु शुभम पाण्डे
पिता को खोने के बाद बेटे का हाल—गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: जिन बेटों ने पिता को खोया, वे समय से पहले बड़े हो गए—मानो बचपन की किताब का आख़िरी पन्नाअचानक किसी ने फाड़ दिया हो। वे खेलों की जगहजिम्मेदारियों के पथरीले आँगन में उतरे,जहाँ हँसी के स्वर दबकरसिर्फ़ माँ की थकी हुई साँसें गूँजती थीं। कम उम्र के कंधों परभारी बोझ उतर आया—रोटी, शिक्षा, और घर […]
हे पुरुषों-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: तुम समाज के सबसे सशक्त स्तंभ हो,तुममें शक्ति है—पूरा परिवार उठाने की,अकेले ही उसे सँवारने की। फिर भी, न उड़ाओ व्यंग्य,न गढ़ो ठिठोलियाँ अपरिपक्व,महिलाओं पर, जिनकी आत्मा भीतुम्हारी दुनिया का हिस्सा है। समझो—तुम समाज की हर महिला के संरक्षक हो,यदि कोई अकेली है,तो वह तुम्हारी जिम्मेदारी है।कोई बहाना नहीं, कोई मौका नहीं। तुम […]
नारी ही शक्ति है—गृहलक्ष्मी की कविता
Women Hindi Poem: तुम कहते हो—नारी ही शक्ति है,माँ दुर्गा की प्रतिमूर्ति है,तो फिर क्यों वही शक्तिसड़क पर चलते हुए काँपती है?क्यों वह अपने ही वतन मेंसुरक्षित नहीं है? तुम दीप जलाते हो,मंदिर सजाते हो,घंटियाँ बजाते हो,पर उसी देवी की बेटीअंधेरी गलियों में अकेली हो तो—क्यों तुम्हारी आँखों में श्रद्धा नहीं,वासना उमड़ती है? तुम उपवास रखते हो,भक्ति का […]
