Hindi Motivational Story
Hindi Motivational Story

Hindi Motivational Story: इंस्टाग्राम पर किसी अनजान नाम से आई फ्रेंड रिक्वेस्ट को अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं, पर उस दिन न जाने क्यों मुझे लगा कि इसे स्वीकार करना चाहिए। शायद नियति कभी-कभी इतनी हल्की दस्तक देती है कि हम उसे पहचान नहीं पाते, पर दिल पहचान लेता है।

उसका नाम “विश” था—बहुत साधारण-सा, पर उसमें कुछ था जो मुझे खींचता था। मैंने रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की, और यहीं से हमारी कहानी का पहला पन्ना खुला।

शुरुआत एक साधारण “हैलो” से हुई। वह बहुत सहजता से बात करता था—न कम, न ज़्यादा। मैंने महसूस किया कि उसकी भाषा में एक नरमी है, एक अपनापन है। धीरे-धीरे चैट का समय बढ़ने लगा। रील्स, कविताएँ, अपनी पसंद की किताबें—हम दोनों के बीच अनगिनत बातें थीं जिनको कहते-कहते दिन छोटे पड़ने लगे।

मैं प्यार से उसे “विश” ही बुलाती थी, और वह मुझे “प्रेरणा” कहता। शायद इसलिए कि उसके हर दिन को कोई न कोई दिशा, कोई नयी बात, कोई नयी ऊर्जा मुझसे मिल जाती थी; और मेरे दिनों को उसके शब्दों में एक मधुर सा ठहराव मिल जाता था।

धीरे-धीरे विश मेरे लिए सिर्फ एक इंस्टाग्राम फ्रेंड नहीं रहा। वह मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। सुबह उठते ही उसकी चैट पढ़ना—सब एक आदत-सी बन गई। उसे गुस्सा बहुत कम आता था, पर परवाह बेहद करता था। मैं ज़रा सा उदास लिख दूँ तो वह दस सवाल पूछ लेता कि आखिर हुआ क्या है।

एक दिन उसने अचानक कहा—
“प्रेरणा, तुमसे बात करना मुझे अपनेपन का एहसास देता है.”
उस एक वाक्य ने मुझे उसके प्रति अपनापन से भर दिया ।

हमारी कहानी की असली शुरुआत तब हुई, जब उसने पहली बार कॉल पर मुझसे बात किया और हँसकर कहा—
“तुम हँसती हो तो लगता है कि मंदिर में घंटियां बज रही हो।”
उस पल मेरा मन मानो खुशियों से भर उठता।

धीरे-धीरे हमारे बीच एक रिश्ता आकार लेने लगा—बिना कहे, बिना तय किए। रिश्ते शायद ऐसे ही बनते हैं; वे किसी घोषणा से नहीं, बल्कि दिलों की सहज निकटता से जन्म लेते हैं।

हमने साथ में भविष्य के सपने देखना शुरू किया। वह चाहता था कि एक दिन हम किसी शांत कैफे में बैठें, मैं अपनी पसंदीदा कॉफी पीऊँ और वह मुझे देखते हुए कहे—“ये पल मैं कभी खोना नहीं चाहता।”
और मैं सोचती थी कि उसके साथ एक लंबी ड्राइव पर जाऊँ, जहाँ हवा उसके बालों में उलझे और मैं उसके कंधे पर सिर रखकर देखूँ कि जिंदगी कितनी खूबसूरत है।

हमारी प्रेम कहानी सरल थी, पर सच्ची थी।
सोशल मीडिया से शुरू होकर दिल तक पहुँचने वाली कहानी।
उसे मैंने प्यार से “विश” कहा, उसने मुझे “प्रेरणा”—और इसी नामों में हमारा संसार बसता गया।

आज सोचती हूँ तो लगता है—एक छोटी-सी फ्रेंड रिक्वेस्ट ने दो ज़िंदगियों को जोड़ दिया।
 कभी-कभी प्यार क्लिक से नहीं, कनेक्शन से शुरू होता है।