Summary: नूरजहां की धरोहर पहनने पर मार्गोट रॉबी के खिलाफ सोशल मीडिया में नाराज़गी
हॉलीवुड एक्ट्रेस मार्गोट रॉबी के ताजमहल नेकलेस पहनने को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। लोगों ने इसे भारत की ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए नाराज़गी जताई और विरासत से जुड़े सवाल उठाए।
Margot Robbie Taj Mahal Diamond: हॉलीवुड एक्ट्रेस मार्गोट रॉबी हाल ही में अपनी आगामी फिल्म ‘वुथरिंग हाइट्स’ के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान लॉस एंजिल्स के रेड कार्पेट पर नजर आईं। उनका ग्लैमरस अंदाज़, खूबसूरत गाउन और क्लासिक लुक फैशन प्रेमियों को खूब भाया, लेकिन चर्चा का असली केंद्र बना उनका नेकलेस। यह कोई साधारण ज्वेलरी नहीं थी, बल्कि मुगल इतिहास से जुड़ा एक बेहद दुर्लभ और बहुमूल्य हार था जिसे दुनिया ‘ताज महल डायमंड’ के नाम से जानती है।
मार्गोट रॉबी ने जिस नेकलेस को पहना, वह 69.42 कैरेट का हार्ट-शेप टेबल-कट डायमंड है, जिसे गोल्ड और रूबी से बनी कार्टियर चेन में जड़ा गया है। इस ऐतिहासिक ज्वेलरी की अनुमानित कीमत करीब 8.8 मिलियन डॉलर (लगभग 74 करोड़ रुपये) बताई जाती है। यह नेकलेस मार्गोट को इवेंट के लिए लग्ज़री ब्रांड कार्टियर ने उपलब्ध कराया था और इसे पहले हॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस एलिजाबेथ टेलर की निजी ज्वेलरी कलेक्शन का हिस्सा बताया गया।
सोशल मीडिया पर लोगों ने जताया गुस्सा
जैसे ही मार्गोट रॉबी की तस्वीरें सामने आईं, भारत में सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। भारतीय यूज़र्स ने सवाल उठाए कि ऐतिहासिक धरोहरों को “पश्चिमी हस्तियों की संपत्ति” बताकर क्यों पेश किया जाता है। कई यूज़र्स ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि इस नेकलेस को सिर्फ “एलिजाबेथ टेलर का हार” कहकर पेश किया गया, जबकि इसकी जड़ें भारतीय इतिहास और मुगल विरासत से जुड़ी हैं।

कई लोगों ने लिखा कि हार पर उर्दू/फारसी में नूरजहां का नाम खुदा है, जो साफ बताता है कि इसकी उत्पत्ति भारत में हुई थी। कुछ यूज़र्स ने इसे औपनिवेशिक दौर में भारत से ले जाई गई धरोहरों से जोड़ते हुए “चोरी की विरासत” तक कह दिया।
नूरजहां से मुमताज महल तक का सफर
दरअसल, इस डायमंड की असली कहानी 17वीं सदी के मुगल काल से शुरू होती है। ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और जानकारों के अनुसार, यह नेकलेस मुगल सम्राट जहांगीर ने अपनी पत्नी बेगम नूरजहां को उपहार में दिया था। हार पर फारसी/उर्दू भाषा में खुदा हुआ शिलालेख है, जिसमें नूरजहां का नाम और मुगल काल की इस्लामिक तिथि अंकित है। इसका अर्थ बताया जाता है “प्यार हमेशा बना रहता है।”
यह कीमती डायमंड बाद में शाहजहां के पास पहुंचा, जिन्होंने इसे अपनी पत्नी मुमताज महल को भेंट किया। मुमताज की मृत्यु के बाद शाहजहां ने उनकी याद में ताजमहल बनवाया, और तभी से इस डायमंड को ‘ताज महल डायमंड’ कहा जाने लगा। यही वजह है कि यह ज्वेलरी केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि प्रेम, सत्ता और भारतीय विरासत का प्रतीक मानी जाती है।
एलिजाबेथ टेलर तक कैसे पहुंचा हार?
कई सदियों बाद यह डायमंड अलग-अलग हाथों से गुजरता हुआ 20वीं सदी में फ्रेंच लग्ज़री ब्रांड कार्टियर के पास पहुंचा। कार्टियर ने इसे री-डिज़ाइन किया और गोल्ड-रूबी चेन के साथ नया रूप दिया।

1972 में हॉलीवुड स्टार रिचर्ड बर्टन ने यह नेकलेस अपनी पत्नी एलिजाबेथ टेलर को उनके 40वें जन्मदिन पर गिफ्ट किया था। एलिजाबेथ ने इसे अपने जीवन की सबसे खास ज्वेलरी में गिना और एक बार ऑस्कर अवॉर्ड समारोह में भी पहना। उनकी मृत्यु के बाद 2011 में हुई नीलामी में यह हार 8.8 मिलियन डॉलर में बिका, जिसकी रकम एलिजाबेथ टेलर एड्स फाउंडेशन को दी गई।
