Nari Gatha se Kaise Bani Vijay Gatha
Nari Gatha se Kaise Bani Vijay Gatha

Hindi Poem: समझौता
हर बार हर वक्त
समझौते से गुजरी
हैं ये जिंदगी

समर्पण
क़दम क़दम पर हर
इच्छाएं, आकांक्षाएं
समर्पण करते आए
हम खुद को।

त्याग
सदैव अपनी प्यारी
से प्यारी हर करीबी
वस्तु त्यागते आए।

करूणा
हमेंशा दया भाव
करूणा से सबकी
सेवा करते आए।

नजर अंदाज
अपनी हर हक की
चीजों में नजर
अंदाज होते आए।

पीड़ाएं
रो-रोकर सिसक
-सिसक कर,सुख का
कहीं खो जाना भीगी
पलकों में सारी आशाओं
का बह जाना।हर पीड़ा
में जख्म को नासूर बनाते
आए।

विजय गाथा
सब सहकर, सबसे लड़कर
मुश्किलों का डटकर सामना
कर इतिहास नया रचती आई।
हां एक नई विजय गाथा
लिखते आई।