woman hugging her daughter from behind
Teaching kids to handle rejection

Summary: पेरेंट्स की ये छोटी गलतियां बना देती हैं बच्चों को ज़्यादा जिद्दी

बच्चों की ज़िद उनके भावनात्मक विकास का हिस्सा है, जिसे गुस्से से नहीं बल्कि धैर्य, समझ और प्यार से संभालना जरूरी है। रूटीन, संवाद और सही ध्यान देने से धीरे-धीरे बच्चों की ज़िद कम की जा सकती है और उनका व्यवहार संतुलित बनाया जा सकता है।

Reduce Stubbornness In Children: बचपन का अहम हिस्सा है, ज़िद करना। वह कहते हैं ना, बच्चा ज़िद ना करे तो बच्चा ही क्या। पर कई बार बच्चों के अत्यधिक ज़िद के वजह से माता-पिता परेशान हो जाते हैं। उस समय वह समझ नहीं पाते कि किस तरह अपने बच्चों की ज़िद को वह संभाले। जिस कारण कई बार वह अपने बच्चों पर गुस्सा होते हैं या चिल्ला पड़ते हैं। लेकिन इसका कोई सकारात्मक प्रभाव बच्चे पर नजर नहीं आता। बल्कि माता-पिता द्वारा गुस्सा करने पर या चिल्लाए जाने पर वह और भी जिद्दी हो जाता है, साथ ही अपनी बात मनवाने के लिए रोना भी शुरू कर देता है। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स बच्चों की ज़िद पूरी करने के लिए खुद को बाध्य महसूस करते हैं।
अगर आपका बच्चा भी बहुत जिद्दी है और आप उसकी हर ज़िद से परेशान हो चुके हैं तो आज आपको इस लेख में कुछ टिप्स बताए जा रहे हैं। उनका उपयोग करके आप अपने बच्चों की ज़िद को कम करने और उन्हें संभालने में सफलता पा सकते हैं। आईए जानते हैं इन टिप्स को;

बच्चों के जिद करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। उनमें से कुछ कारण के बारे में आज हम जानेंगे।

भावनात्मक कारण: छोटे बच्चे मानसिक रूप से पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं, तथा वह पूरी तरह अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे में वह अपने भावनाओं को व्यक्त करने के लिए ज़िद का सहारा लेते हैं। इसके अलावा जब वह भूखे हो, थके हो, उदास या परेशान हो, तब भी ज़िद करते हैं।

ध्यान आकर्षित करने के लिए: छोटे बच्चों को जब महसूस होता है कि उन पर किसी का ध्यान नहीं है, तब भी वह ज़िद करते हैं। ताकि वह अपनी तरफ सबको आकर्षित कर सके।

अपनी इच्छाएं पूरी करवाने के लिए: जब उन्हें विशेष रूप से कुछ चाहिए हो तब भी बच्चे ज़िद करते हैं।

woman playing with his son and giving high fi
Healthy Routine for Kids

बच्चों की ज़िद उम्र के साथ होने वाली ऐसी प्रक्रिया है, जिसे समझ, धैर्य और अनुशासन के साथ धीरे-धीरे कम किया जा सकता है। बच्चों की ज़िद को एकदम से कम करना संभव नहीं, लेकिन आप हर रोज के प्रयास के साथ उसे कम कर सकते हैं। आईए जानते हैं, किन बातों का ध्यान रखकर आप अपने बच्चों की ज़िद को कम कर सकते हैं।

शांति और धैर्य के साथ: जब बच्चा ज़िद कर रहा हो, उस समय उस पर गुस्सा ना करें। ऐसा करने से वह और जिद्दी हो सकता है तथा ज़िद के साथ चिड़चिड़ा हो सकता है। बच्चों के ज़िद के समय शांत रहे। उन्हें उस समय इग्नोर करें, क्योंकि ज़िद के समय वह आपकी बात समझने की हालत में नहीं होते।
बच्चों को प्यार से शांत करने की कोशिश करें। उनका ध्यान भटकाएं। जब वह शांत हो जाएं, तब आप उन्हें प्यार से अपनी बात समझा सकते हैं।

भावनाओं को समझें: बच्चों की सारी बातें मानना जरूरी नहीं है, लेकिन उनकी हर बात को ध्यान से सुनना जरूरी है। आपका बच्चा आपसे क्या कह रहा है, क्या पाना चाहता है, किस बात की ज़िद कर रहा है, इस पर ध्यान दें। पहले उनकी बातों को आप सुने और समझे फिर शांत भाव से उन्हें समझाने की कोशिश करें।

बच्चों को समय दें: पेरेंट्स अपने बच्चों को समय जरूर दें, उन्हें पास बिठाकर उनके बातों को सुने। उनसे एक्टिव तरीके से बात करें। कहानियों के जरिए उन्हें नैतिक शिक्षा और अनुशासन के बारे में समझाएं। उनके साथ अलग-अलग तरह के गेम्स खेलें। पेरेंट्स के लिए सबसे जरूरी बात, अपने बच्चों को उनकी उम्र के दोस्तों के साथ खेलने का समय जरूर दें, ऐसा करने से वह खुश महसूस करेंगे।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...