Hindu Belief
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Overview: कब कर सकते हैं पुरानी मूर्ति की पूजा

देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं मिट्टी की नहीं बल्कि पीतल, सोने, चांदी या अष्टधातु जैसी धातुओं से बनी हैं, तो इनका पुनः पूजा में स्थापित करना उचित है।

Hindu Belief: हिंदू धर्म में देवी देवताओं की पूजा और उनकी प्रतिमा को लेकर कई मान्यताएं हैं। अक्सर घरों में लक्ष्मी गणेश की मूर्ति देखने को मिल जाती है। लोग त्योहारों के वक्त पुरानी मूर्तियों को बदल कर नई मूर्तियां भी खरीदते हैं। खास कर त्योहारों के समय लोग पुरानी मूर्ति को नदी में विसर्जित कर विधि विधान से नई प्रतिमा को स्थापित करते हैं और उसकी पूजा अर्चना करते हैं।

हालांकि कुछ लोग पुरानी मूर्ति की भी पूजा अर्चना करते हैं। त्योहार के समय भी कुछ लोग पुरानी मूर्ति की स्थापना कर उसकी पूजा करते हैं लेकिन क्या ये करना शुभ होता? आपके मन में भी ये सवाल जरूर आया होगा तो चलिए जानते हैं क्या पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति की पूजा और स्थापना करना शुभ है?

क्या पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापना कर सकते हैं?

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Ganesh ji and Lakshmi ji

जब बात आती है देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना की, तो शास्त्रों में इस बारे में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। शास्त्रों में यह बताया गया है कि देवी लक्ष्मी, जो धन और समृद्धि की देवी हैं, की पूजा के लिए नई और शुद्ध प्रतिमाएं आवश्यक हैं। यदि पुरानी प्रतिमाओं का पुनः उपयोग किया जाता है, तो यह न केवल पूजा में दोष उत्पन्न कर सकता है, बल्कि भक्त को संपूर्ण पूजा फल भी प्राप्त नहीं होता।

ज्योतिष का कहना है कि नई प्रतिमा की स्थापना से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास करती है। इसलिए, दिवाली पर नई प्रतिमाओं की स्थापना करना ही उचित और शुभ होता है, जिससे भक्त देवी लक्ष्मी और गणेश जी की कृपा प्राप्त कर सकें। इस प्रकार, दिवाली की पवित्रता और महत्व को ध्यान में रखते हुए, नई प्रतिमा की स्थापना करना एक आवश्यक कदम है।

कब कर सकते हैं पुरानी मूर्ति की पूजा

जब बात आती है देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाओं की पूजा की, तो कुछ विशेष परिस्थितियों में पुरानी प्रतिमाओं का पुनः उपयोग किया जा सकता है। यदि ये प्रतिमाएं मिट्टी की नहीं बल्कि पीतल, सोने, चांदी या अष्टधातु जैसी धातुओं से बनी हैं, तो इनका पुनः पूजा में स्थापित करना उचित है।

इनकी विशेषता यह है कि धातु की प्रतिमाएं अधिक टिकाऊ होती हैं और इन्हें कई बार पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन, ध्यान रखना चाहिए कि इन प्रतिमाओं को पुनः स्थापित करने से पहले उन्हें गंगाजल से अच्छी तरह से शुद्ध करना आवश्यक है। गंगाजल का प्रयोग इन प्रतिमाओं को शुद्ध करने में मदद करता है और इसे पूजा में लाने से पहले उनकी पवित्रता सुनिश्चित करता है।

इस प्रक्रिया से भक्त न केवल देवी लक्ष्मी और गणेश जी के प्रति अपनी श्रद्धा को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि साथ ही उन्हें पुनः स्थापित करने से मिली सकारात्मक ऊर्जा का भी लाभ उठा सकते हैं। इस प्रकार, इन विशेष परिस्थितियों में पुरानी प्रतिमाओं की पूजा करना एक उचित और सम्मानजनक विकल्प हो सकता है।

लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करते समय रखें इन बातों का ध्यान

अगर आप चौकी पर नई प्रतिमा स्थापित करने जा रहे हों, तो सबसे पहले ध्यान रखें कि चौकी पर लाल रंग का कपड़ा अवश्य बिछाना चाहिए। लाल रंग को पूजा में शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, और यह देवी लक्ष्मी की कृपा को आकर्षित करने में मदद करता है।

प्रतिमा को बिना कपड़े के स्थापित करना अशुभ माना जाता है, जिससे पूजा का फल भी प्रभावित हो सकता है। कपड़ा बिछाने से प्रतिमा को एक पवित्र स्थान मिलता है, जो उसकी महत्वता को और बढ़ाता है। इसके अलावा, यह उपाय आपके श्रद्धा भाव को भी दर्शाता है, जो पूजा के समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।

इस प्रकार, लक्ष्मी-गणेश की स्थापना से पहले लाल कपड़ा बिछाना न केवल एक पारंपरिक प्रथा है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि आपकी पूजा सही रीति-रिवाजों के अनुसार हो और आप देवी-देवताओं से भरपूर आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।

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मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...