Diwali 2025 Lakshmi Puja
Diwali 2025 Lakshmi Puja

Overview: कब मनाया जाता है दिवाली का त्योहार?

दिवाली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह पांच दिनों तक चलने वाला उत्सव है जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज पर होता है।

Diwali Lakshmi Ganesh Puja 2025: दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और समृद्धि का प्रतीक है। यह सिर्फ घर को दीपों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाने का दिन नहीं, बल्कि यह दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना का होता है। मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर किए गए विधिवत पूजन से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। आइए जानते हैं दिवाली पूजा का महत्व, आवश्यक सामग्री, सही विधि-विधान और विशेष नियम।

कब मनाया जाता है दिवाली का त्योहार?

हिंदू पंचांग के अनुसार, दिवाली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह पांच दिनों तक चलने वाला उत्सव है जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज पर होता है। दिवाली की संध्या पर लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं और जहां सफाई, प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा होती है, वहां स्थायी रूप से निवास करती हैं।

दिवाली पूजा का महत्व

दिवाली को ‘अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का पर्व’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान राम 14 वर्षों का वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने घर-घर दीप जलाए थे। इसी परंपरा के कारण दिवाली को प्रकाश पर्व कहा जाता है।

साथ ही यह मान्यता भी है कि इस दिन मां लक्ष्मी घर-घर भ्रमण करती हैं और जहां स्वच्छता, सकारात्मकता और भक्ति होती है, वहां स्थायी वास करती हैं। इसलिए दिवाली से पहले लोग अपने घर की सफाई करते हैं, नए वस्त्र खरीदते हैं और घर को दीपक, रंगोली और फूलों से सजाते हैं।

लक्ष्मी-गणेश पूजन का सही समय

दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में होता है।

यह समय सूर्यास्त के बाद लगभग 40 मिनट से 2 घंटे 24 मिनट तक होता है।

प्रदोष काल में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

अगर प्रदोष काल का समय न मिले तो निशिता काल (रात्रि का मध्यकाल) में भी पूजा की जा सकती है।

पूजा से पहले की विशेष तैयारियां

दिवाली पूजन के लिए घर और मन दोनों को शुद्ध करना जरूरी है। इसके लिए कुछ विशेष तैयारियां करनी चाहिए:

  1. घर की सफाई

मां लक्ष्मी को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है।

घर के हर कोने की सफाई करें, विशेषकर मुख्य द्वार और पूजा स्थल की।

झाड़ू लगाते समय दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा की ओर सफाई करना शुभ माना जाता है।

इस दौरान टूटी-फूटी और बेकार वस्तुओं को घर से बाहर कर दें।

  1. सजावट और रोशनी

मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाएं।

घर के प्रवेश द्वार पर मां लक्ष्मी के कदमों के निशान बनाएं, जो उनके आगमन का प्रतीक हैं।

घर के सभी कोनों में दीपक जलाएं, विशेष रूप से पूजा स्थल पर।

  1. पूजा करने वालों की तैयारी

स्नान कर साफ और नए वस्त्र पहनें।

महिलाएं लाल, गुलाबी या पीले रंग के वस्त्र पहनें।

पुरुष सफेद, पीले या केसरिया रंग का कुर्ता-पजामा पहन सकते हैं।

पूजा शुरू करने से पहले मन को शांत करें और भगवान का स्मरण करें।

दिवाली पूजा की आवश्यक सामग्री

पूजन को विधिपूर्वक सम्पन्न करने के लिए यह सामग्री पहले से तैयार रखें:

  • मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर
  • चौकी और लाल या पीला वस्त्र
  • गंगाजल
  • कलश, नारियल, आम के पत्ते
  • सिक्के, सुपारी, गेंदे के फूल, चावल
  • कुमकुम, हल्दी, चंदन, रोली
  • घी का दीपक, तेल का दीपक, कपूर
  • धूपबत्ती और अगरबत्ती
  • पान, सुपारी, खीले, बताशे
  • विभिन्न प्रकार की मिठाई और फल
  • दूर्वा (गणेश जी के लिए)
  • चांदी या तांबे के सिक्के
  • आरती की थाली
  • लक्ष्मी-गणेश पूजन की विधि
  1. स्थान की सफाई और चौकी की तैयारी

पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल छिड़कें। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर मूर्तियों को स्थापित करने की तैयारी करें।

  1. मूर्तियों की स्थापना

चौकी पर पहले गणेश जी और फिर मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। ध्यान रखें कि लक्ष्मी जी हमेशा गणेश जी के दायीं ओर हों। यह ज्ञान और धन के बीच संतुलन का प्रतीक है।

  1. कलश स्थापना

एक कलश में पानी भरें। उसमें सुपारी, सिक्का, गेंदे का फूल और कुछ चावल डालें। ऊपर नारियल रखें और आम के पत्ते सजाएं। यह समृद्धि, शुद्धता और सकारात्मकता का प्रतीक है।

  1. पंचामृत स्नान

मां लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमाओं को पंचामृत से स्नान कराएं। पंचामृत दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से तैयार किया जाता है। इसके बाद स्वच्छ जल से प्रतिमाओं को धोकर कपड़े से पोंछ लें।

  1. तिलक और पुष्प अर्पण

प्रतिमाओं को चंदन, कुमकुम और रोली से तिलक करें। गणेश जी को दूर्वा (घास) अर्पित करें। मां लक्ष्मी को कमल का फूल अर्पित करें, यह उनका प्रिय पुष्प है। उन्हें सुंदर फूलों की माला पहनाएं।

  1. दीप और धूप जलाना

घी का दीपक और तेल का दीपक भगवान के चरणों में रखें। धूपबत्ती जलाकर वातावरण को सुगंधित और पवित्र करें। दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

  1. भोग अर्पण

गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। मां लक्ष्मी को खीर, खीले-बताशे, फल और मिठाई अर्पित करें। भोग अर्पण श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है।

  1. आरती और मंत्र

सबसे पहले गणेश जी की आरती करें। इसके बाद मां लक्ष्मी और कुबेर जी की आरती करें। मां लक्ष्मी को आमंत्रित करने के लिए यह मंत्र जाप करें:

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं।

  1. क्षमा याचना और प्रसाद वितरण

पूजा के अंत में भगवान से किसी भी गलती के लिए क्षमा याचना करें। इसके बाद प्रसाद को परिवार और पड़ोसियों में बांटें। माना जाता है कि प्रसाद वितरण से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

दिवाली पूजा के दौरान महत्वपूर्ण नियम

लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खंडित या टूटी हुई नहीं होनी चाहिए।

पूजा के समय घर में शांति और पवित्रता का वातावरण बनाए रखें।

घर के मुख्य द्वार पर दीपक अवश्य जलाएं।

धनतेरस पर खरीदे गए आभूषण, सिक्के या धन यंत्र को भी पूजा में शामिल करें।

इस दिन दान-पुण्य करना बहुत शुभ माना जाता है। गरीबों को वस्त्र, भोजन या मिठाई दें।

पूजा के समय माता लक्ष्मी को पूर्व या उत्तर दिशा में बैठाकर पूजन करें।

पूजा के बाद घर में सात जगहों पर दीपक जलाएं, विशेषकर रसोईघर और तिजोरी के पास।

मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को प्रसन्न करने के विशेष उपाय

घर के दरवाजे पर स्वास्तिक बनाएं।

पूजा स्थल पर कमल के फूल का उपयोग करें।

पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्य एक साथ दीपक जलाएं और आरती करें।

घर में साफ-सफाई बनाए रखें क्योंकि गंदगी में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता।

मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...