Summary: 3000 फीट ऊंची पहाड़ी पर मनाया जाता है कर्नाटक का अनोखा उगादी महोत्सव
कर्नाटक के चामराजनगर जिले में स्थित श्रीमाले महादेश्वर हिल्स में हर साल उगादी महोत्सव बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। 3000 फीट ऊंची पहाड़ी पर बने 600 साल पुराने शिव मंदिर में दर्शन के लिए लाखों भक्त कठिन चढ़ाई तय कर पहुंचते हैं।
Ugadi Festival: कर्नाटक एक ऐसी जगह है जिसे अपनी प्राकृतिक खूबसूरती की वजह से पहचाना जाता है। इस जगह की संस्कृति भी इसे बाकी जगह से अलग बनाने का काम करती है। यहां के चामराजनगर जिले में उगादी महोत्सव का आयोजन होता है जो बहुत प्रसिद्ध है। इस महोत्सव के दौरान 3000 फीट की ऊंचाई पर चढ़कर भक्त शिव मंदिर के दर्शन करते हैं।
3000 फीट की ऊंची पहाड़ी पर बसा मंदिर तकरीबन 600 साल पुराना बताया जाता है। यहां हर साल इस महोत्सव का आयोजन होता है और लाखों की संख्या में श्रद्धालु इसका हिस्सा बनने के लिए पहुंचते हैं। इस साल भी यहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली।
कर्नाटक का प्रसिद्ध उगादी महोत्सव
चामराजनगर जिले में 3000 फीट की ऊंचाई पर प्रसिद्ध श्रीमाले महादेश्वर हिल्स मौजूद है। यहां हर साल की तरह इस साल भी उगादी महोत्सव का आयोजन किया गया। 600 साल पुराने शिव मंदिर में कर्नाटक और पड़ोसी राज्यों से श्रद्धालु लगभग 8 किलोमीटर की पहाड़ी चढ़कर भगवान के दर्शन करने के लिए पहुंचे।
पांच दिवसीय इस महोत्सव के अंतिम दिन रथोत्सव रखा जाता है, जो मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। इस महोत्सव के आखिरी दिन बेडागम्पन समुदाय की 101 महिलाओं ने बेल्लादारती रस्म पूरी की जिसके साथ रथयात्रा शुरू हुई। यात्रा के दौरान पूरी पहाड़ी पर उघे उघे मादप्पा के जयकारे सुनाई दिए।
लड्डू प्रसादम है आकर्षण का केंद्र
श्रीमाले महादेश्वर में दूसरा सबसे बड़ा आकर्षण यहां का प्रसिद्ध लड्डू प्रसादम होता है। इस साल 6 लाख श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से लड्डू बनवाए गए। इस प्रसाद को लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यहां भीड़ उमड़ती है।
क्या है मान्यता
माले महाद्वेश्वर नाम का जो मंदिर है, इसके बारे में ऐसा कहा जाता है कि 15वीं सदी में एक महान संत थे जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है।उन्होंने इसी पहाड़ी पर तपस्या की थी और यहीं पर समाधि ली थी। उस समय एक भक्त ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। तभी से इस महोत्सव की परंपरा चल रही है।
माले महादेश्वर हिल्स का इतिहास
माले महादेश्वर हिल्स (एमएम हिल्स) चामराजनगर जिले में पूर्वी घाट के घने जंगलों में स्थित एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यहाँ भगवान शिव (महादेश्वर रूप में) को समर्पित एक प्राचीन और पूजनीय श्री माले महादेश्वर मंदिर स्थित है । यह स्थल अपनी अनूठी आध्यात्मिक पवित्रता, छह शताब्दियों से अधिक के इतिहास और एक महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्य के बीच स्थित होने के लिए प्रसिद्ध है।
यह मंदिर संत श्री माले महादेश्वर स्वामी से जुड़ा हुआ है , जो 15वीं शताब्दी में रहते थे और माना जाता है कि उन्होंने इस क्षेत्र में चमत्कार किए थे। इस मंदिर में द्रविड़ शैली में बना एक विशिष्ट गोपुरम है, जो इसकी दक्षिण भारतीय विरासत को दर्शाता है। आसपास की पहाड़ियाँ माले महादेश्वरा वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा हैं , जो अपने घने जंगल और वन्यजीवों, जिनमें हाथी, हिरण और तेंदुए शामिल हैं, के लिए जाना जाने वाला एक संरक्षित क्षेत्र है। स्थानीय लोककथाएं और गीत भगवान महादेश्वर स्वामी के जीवन और चमत्कारों का वर्णन करते हैं, जो कई स्थानीय समुदायों के कुलदेव हैं। वार्षिक महाशिवरात्रि उत्सव और रथोत्सव लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं, जिससे यह क्षेत्र के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक बन जाता है।

