Summary: मैसूर सिल्क साड़ियों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक, जानें इसके पीछे की वजह
कर्नाटक सरकार ने हाल ही में मशहूर मैसूर सिल्क साड़ियों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने का फैसला लिया है। इस फैसले के बाद देशभर में इन साड़ियों को खरीदने वाले लोगों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं।
Mysore Silk Sarees: जब भी सिल्क साड़ी की बात होती है, तो मैसूर सिल्क साड़ियों का कोई जवाब नहीं होता। खासतौर पर शादी-ब्याह जैसे खास मौकों पर इन्हें लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से खरीदते हैं। लेकिन अब कर्नाटक सरकार ने मशहूर मैसूर सिल्क साड़ियों की ऑनलाइन बिक्री पर फिलहाल रोक लगा दी है। जीआई-टैग वाली इन प्रीमियम साड़ियों को खरीदने के लिए अब ग्राहकों को सरकारी आउटलेट्स का ही रुख करना होगा। सरकार के इस फैसले से देशभर के खरीदारों के बीच काफी चर्चा हो रही है। ऐसे में आपके मन में भी सवाल आ रहा होगा कि आखिर कर्नाटक सरकार ने यह कदम क्यों उठाया है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह।
मशहूर मैसूर सिल्क के ऑनलाइन बिक्री पर रोक की वजह
मैसूर सिल्क साड़ियों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण इनकी मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है, जबकि उत्पादन सीमित होने की वजह से आपूर्ति उतनी तेजी से नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि कर्नाटक सरकार ने फिलहाल इन साड़ियों की ऑनलाइन बिक्री रोकने का फैसला लिया है। सरकारी स्वामित्व वाली कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (KSIC) के पास उपलब्ध स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा था, जिससे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह मांग को पूरा करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में सरकार ने तय किया कि अभी उपलब्ध साड़ियों को प्राथमिकता के आधार पर केवल विशेष आउटलेट्स पर आने वाले ग्राहकों को ही दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जब उत्पादन और आपूर्ति सामान्य हो जाएगी, तब ऑनलाइन बिक्री फिर से शुरू कर दी जाएगी।
1912 से बन रही हैं मशहूर मैसूर सिल्क साड़ियां
मैसूर सिल्क साड़ियों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच इनका उत्पादन भी लगातार किया जा रहा है। केएसआईसी साल 1912 से इस पारंपरिक और प्रसिद्ध बुनाई को संभालते हुए साड़ियां तैयार कर रही है। फिलहाल यहां रोजाना करीब 300 से 400 साड़ियों का निर्माण होता है। वहीं पिछले तीन वर्षों में कुल मिलाकर लगभग 31 लाख मैसूर सिल्क साड़ियां बनाई जा चुकी हैं। ग्राहकों तक इन्हें आसानी से पहुंचाने के लिए कंपनी ने ऑनलाइन बिक्री की सुविधा भी शुरू की थी।
छूट वाली सेल में दिखता है मैसूर सिल्क का क्रेज
रेशम उत्पादन मंत्री के. वेंकटेश ने विधानसभा में बताया कि मैसूर सिल्क साड़ियों की लोकप्रियता विशेष छूट वाली सेल के दौरान साफ नजर आती है। उन्होंने कहा कि जिन साड़ियों में मामूली डिफेक्ट होता है और जो बिना बिके रह जाती हैं, उन्हें 25% से 50% तक की छूट पर बेचा जाता है। इस सेल के दौरान खरीदारों में इतना उत्साह होता है कि कई लोग साड़ी खरीदने के लिए सुबह 3 बजे से ही कतार में लग जाते हैं।
कहां से मिलता है मैसूर सिल्क के लिए कोकून
मैसूर सिल्क साड़ियों को बनाने के लिए अच्छे कोकून की जरूरत होती है। केएसआईसी को ये कोकून ज्यादातर कर्नाटक के सिदलाघट्टा, रामनगर और कोललेगल के सरकारी बाजारों से मिलते हैं। मंत्री के. वेंकटेश ने बताया कि अच्छे कोकून लेने के लिए महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दूसरे राज्यों के साथ काफी मुकाबला रहता है। फिर भी अच्छी क्वालिटी के कोकून मिलते रहें, इसके लिए लगातार कोशिश की जा रही है।

