Hindi Best Story: कितना कुछ घटित हो गया था उसके जीवन में! वह एक गृहणी से एक बिजनेस वुमन बन गई थी।
आज सपना दुकान पर देर से पहुंची थी। घर के काम निपटाते हुए उसे देरी हो गई थी। घर और दुकान के दोहरे दायित्व ने उसे काफी व्यस्त कर दिया था। इस व्यस्तता ने ही उसे अतीत की दहलीज से
बाहर निकाला था। पिछले वर्ष, कैंसर से उसके पति का निधन हो गया था। तब से उसके पति की सराफे की दुकान ही उसकी जिंदगी बन गई थी। कितना कुछ घटित हो गया था उसके जीवन में! वह एक गृहणी से एक बिजनेस वुमन बन गई थी।
सपना ये सब सोच ही रही थी कि एक प्यारा-सा युगल शॉपिंग करने आ गया, जो अक्सर उसकी दुकान पर खरीददारी करने आते रहते थे। दोनों की जोड़ी ऐसी लगती थी, मानो एक-दूसरे के लिए ही बने हों। सांवला, लंबा, मनमोहक पुरुष और गौरवर्ण, छरहरी युवती, मानो राधा-कृष्ण की जोड़ी ही हो। जैसी सौम्यता दिखने में, वैसी ही मृदुता दोनों के व्यवहार में भी थी। आते ही युवती ने दुकान से अंगूठी निकलवाई। बातों ही बातों में सपना ने युवती का नाम पूछा, तो उसने नंदिनी नाम बताया।
दोनों युगल की अंगूठी में अलग-अलग पसंद थी। सपना ने कहा, ‘नंदिनी तुम अपनी पसंद से ले लो, पहनना तो तुम्हें ही है।’ तो वो मुस्कुराते हुए बोली, ‘नहीं दीदी, इनकी पसंद से ही लूंगी।’ उसने वही किया। उसके बाद नंदिनी बोली, ‘लड़कियों की कान की बाली दिखाइये। हमें चार जोड़ी बालियां लेना है।’ सपना ने आश्चर्य से कहा, ‘चार किसके लिए?’ तो नंदिनी बोली, ‘चार लड़कियां हैं।’ सपना ने हैरानी से पूछा, ‘तुम्हारे चार लड़कियां हैं?’
दरअसल दो मेरी हैं और दो मेरे भाई की हैं उस युवक ने कहा। सुनकर सपना का उन युगल के प्रति सम्मान और बढ़ गया। सोच रही थी, आज भी लोगों में कितना प्यार और भाईचारा है। खुशी-खुशी वो दोनों चार जोड़ी बालियां खरीद ले गए। जाते-जाते नंदिनी बोली, ‘दीदी आपसे बात करके मुझे बहुत अपनापन लगा, आप अपना फोन नंबर दीजिए, आपसे बात करती रहूंगी।’ सपना ने खुशी-खुशी अपना नंबर दे दिया। सपना, ग्राहक होने के नाते भी उससे जुड़ी रहना चाहती थी।
अगले दिन शाम को नंदिनी का फोन सपना के पास आया। औपचारिक वार्तालाप के बाद सपना बोली दीदी जो मेरे साथ दुकान पर आते हैं, दरअसल वो मेरे पति नहीं हैं, वो मेरे पति के दोस्त हैं। दो बेटियां उनकी हैं और दो बेटियां मेरे पास हैं। इसलिए हमने चार बालियां लीं। मेरे पति भी बहुत अच्छे हैं और उनकी पत्नी भी अच्छी है, पता नहीं कैसे हम दोनों का प्रेम हो गया। मैं नहीं जानती, ये सही है या गलत है लेकिन हम दोनों को ही एक-दूसरे से अगाध प्रेम है और हम दोनों ही अपने-
अपने जीवनसाथी को भी नहीं छोड़ना चाहते, इसलिए हम अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के साथ कभी-कभी मिलते हैं। ऐसा लगता है जैसे हमारा पिछले जन्म का अधूरा प्रेम अब मिला है। लेकिन, मुझे अपराधबोध भी लगता है कि मैं अपने पति के साथ सही नहीं कर रही हूं। इसलिए
ही आपको अपनी बड़ी बहन मानकर सब बताया है, आशा है कि आप अपनी छोटी
बहन को उचित सलाह देंगी।
नंदिनी की बातें सुनकर सपना के पैरों तले जमीन खिसक गई। कल तक जिस युगल की तस्वीर एक आदर्श जोड़े की थी, वो आज छन्न से धूमिल हो गई थी। साथ ही अनेकों अनुत्तरित प्रश्नों के जवाब जेहन में आ गए। क्या सचमुच प्रेम ऐसा होता है?
उसने उन दोनों के प्रेम की गहराई देखी थी, कहीं से भी वासना की बू नहीं दे रही थी। प्रेम की अनंत परिभाषाएं, उनको परिभाषित कर रहीं थी। प्रेम तो वो पीपल का वृक्ष है, जो कहीं भी उग आता है। उन दोनों को देखकर सच ही लग रहा था।
लेकिन विचारों के कटघरे में खड़ा सपना का मन नंदिनी के पति और उसके प्रेमी की, पत्नी की भी दलील दे रहा था। धर्मग्रंथों में विवाह की पवित्रता के अनेकों पक्ष उसके मन को झकझोर रहे थे नंदिनी के दीदी सम्बोधन ने सपना के मन की अदालत के द्वार खटखटा दिए थे। वो सोच रही थी कि प्रेमी को छोड़ने की सलाह देती हूं तो प्रेमी के साथ अन्याय होता है। यदि दोनों को साथ चलने की सलाह देती हूं तो दांपत्य की पवित्रता को आंच आती है। सभी पहलुओं पर विचार के बाद, सपना ने नंदिनी से बात की और कहा कि एक बड़ी बहन होने के नाते मैं तुम्हें यही सलाह दूंगी कि तुम्हें अपने प्रेम से ही दूरी बनाना चाहिए। मैं मानती हूं कि तुम्हारे लिए ये मुश्किल होगा, लेकिन नामुमकिन नहीं। मैंने भी तुम दोनों के प्यार की सुगन्ध महसूस की है, वो सच्चा है लेकिन प्रेम सिर्फ पाने का नाम तो नहीं! ये तो एक एहसास है, जिसे दूर से भी महसूस किया जा सकता है। चूंकि तुम दोनों के जीवन साथी हैं, इसलिए जब उन्हें तुम दोनों के बारे में पता चलेगा तो वो रिश्ता कमजोर हो जाएगा और सामाजिक जीवन के लिए दांपत्य का मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है। और यदि कभी पता नहीं भी चला तो तुम्हारे मन का द्वंद तुम्हें हरा देगा। इसलिए बेहतर है तुम दोनों, दूरियों में ही प्रेम की
लंबी और गहरी दूरी तय करो। सपना अपनी दी सलाह से खुश और संतुष्ट थी। एक दिन जब नंदिनी अपने पति के साथ दुकान पर आई तो सपना को अपनी नेक सलाह का परिणाम देखने
को मिला।

