Hindi Best Story: एक पल में ही प्रिया जान गई कि जरूर मोहित को लेकर काम्या के दिल में उथल-पुथल चल रही होगी।
ऑफिस में काम्या का उदास चेहरा आज सबके लिए कौतूहल का विषय था। चुलबुली काम्या कभी
ऐसे भी चुप्पी का आवरण ओढ़ कर बैठ सकती है किसी ने सोचा ही नहीं था। वैसे भी काम्या ऑफिस में सिर्फ अपनी सहेली प्रिया के ही करीब थी जिसे वह अपनी सारी व्यक्तिगत बातें साझा करती थी और प्रिया अभी दो दिन की छुट्टी पर थी।
काम्या का चुलबुलापन ऑफिस में हमेशा एक सकारात्मक माहौल बनाकर रखता। ऑफिस की छोटी-छोटी परेशानियों को वह अपनी खुशनुमा बातों से हल कर देती। प्रिया अक्सर उसे चिढ़ाती, ‘सच में तू कमाल है, कभी किसी बात की कोई चिंता नहीं होती तुझे। मुझे तो छोटी-छोटी बातों की टेंशन हो जाती है’ और काम्या झट से उसकी पीठ पर धौल जमा कर कहती, ‘जिंदगी आज में जीने के लिए है छोटी-छोटी बातों की क्या टेंशन लेनी।
दो दिन काम्या चुपचाप रही, अपने सहकर्मियों से भी उसने सिर्फ हां हूं में बात की और काम निपटा कर चल दी। दो दिन बाद जब प्रिया आई तो उसे ऐसे देखकर सन्न रह गई। एक पल में ही प्रिया जान गई कि जरूर मोहित को लेकर काम्या के दिल में उथल-पुथल चल रही होगी। वह जानती थी कि मोहित और काम्या पिछले एक साल से दोस्त थे। हां, उन्हें वह दोस्त ही कह सकती है क्योंकि उनके रिश्ते का तो कोई नाम ही नहीं था। दोनों घंटों बातें करते, घूमने-फिरने जाते पर वे किसी रिश्ते में नहीं थे ना वह उसकी गर्लफ्रेंड थी और ना वह उसका बॉयफ्रेंड। जो एक नया चलन चला
था ‘सिचुएशनशिप’ दोनों उसी का अनुसरण कर इकठे वक्त बिता रहे थे।
‘तुझे पता है प्रिया, वह मुझे किसी बात के लिए नहीं रोक सकता। मैं चाहे जहां मर्जी घूमूं फिरूं उसे कोई मतलब नहीं, सच में सिचुएशनशिप लाजवाब है।’
प्रिया ने सुनते ही कहा, ‘तो क्या, उस पर तेरा कोई हक नहीं रहेगा वह भी जो चाहे कर सकता है।’
‘अरे! हक की क्या बात करनी, उसका जीवन जैसे मर्जी जिए मुझे क्या।’
‘और अगर तुझे कभी उससे लगाव हो जाए लेकिन वह किसी और के साथ दिल
जोड़ बैठे तो।’
‘अरे, मैं जानती हूं ऐसा कुछ नहीं होगा, मैं जानती हूं कि वह मेरा सिर्फ एक दोस्त है।’ उसकी खुशी देखकर प्रिया ने भी ज्यादा बहस नहीं की। उसकी खुशी देखकर प्रिया कई बार सोचने को मजबूर हो जाती कि क्या जो वह कर रही है वह सही है या फिर जो उसके मन का डर है वह सही है। खैर,
प्रिया और काम्या की दोस्ती परवान चढ़ती रही और साथ ही काम्या के साथ मोहित की सिचुएशनशिप भी, पर आज काम्या को उदास देखकर प्रिया के दिल का डर फिर से उसके दिमाग पर हावी हो रहा था। लंच टाइम में जब उसने काम्या से पूछने की कोशिश की तो वह बोली कि मोहित
आजकल उससे उतना नहीं मिलता, ना ही उसके मैसेज का जवाब देता है और ना ही उसके साथ कहीं घूमने-फिरने का कोई प्रोग्राम बनाता है। अगर वह खुद से कितनी बार बोले तब जाकर एक बार हां बोलता है और उसमें भी अनमना-सा बैठा रहता है।
उसकी बातें सुनकर प्रिया कुछ-कुछ समझ गई थी पर प्रत्यक्ष रूप से सामान्य व्यवहार करते हुए बोली, ‘तो क्या हुआ, ठीक है ना, वो कौन सा तेरा बॉयफ्रेंड है जो तुझे इतनी चिंता है। नहीं बोलता तो ना सही और अगर कहीं घूमने-फिरने नहीं जाता तो रहने दे ना।’ ‘ऐसे कैसे कर सकता है वो मेरे साथ। अरे, इतना समय बिताया है हमने तो क्या एकदम से मुझे यूं छोड़ देगा।’ ‘छोड़ने की बात कहां से आई काम्या, तुम्हारा तो कोई रिश्ता ही नहीं है जो तुझे वह छोड़ेगा। तुम तो बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड भी नहीं,
तुम्हारी तो सिचुएशनशिप चल रही है ना, तो अब उसकी सिचुएशन अलग होगी शायद उसे कोई और दोस्त मिल गई हो या फिर उसका कहीं और रिलेशन बन गया हो और वह तुम्हारे साथ अपने सिचुएशनशिप को जारी नहीं रखना चाहता यही तो सिचुएशनशिप का अर्थ होता है ना।’
प्रिया के बोलने से काम्या ने कुछ पल के लिए मौन साध लिया पर उसकी आंखें बहुत कुछ कह रही थी। उसकी आंखों से साफ जाहिर था कि वह मोहित के साथ दोस्ती से आगे बढ़ चुकी है पर इस बात को वह कैसे बताए क्योंकि यही तो सिचुएशनशिप की पहली शर्त होती है कि उन दोनों में आपस
में कोई रिश्ता नहीं रहेगा पर अब अपने मन का क्या करे, कैसे संभाले अपनी भावनाओं को, कैसे समझाएं खुद को कि मोहित अगर अब उससे मिलना नहीं चाहता तो वह उससे पूछने का हक नहीं रखती। ऑफिस के बाद प्रिया काम्या को अपने घर ले आई और काम्या के घर पर फोन कर बोल दिया कि आज वह उसके साथ ही रहेगी। रात को काम्या को काफी समझा कर प्रिया ने उसे सुला दिया पर खुद प्रिया की आंखों से नींद गायब थी। वह सोच रही थी कि अभी कुछ दिन लगेंगे काम्या को खुद को संभालने में। वह समझ नहीं पा रही थी कि ऐसे नए चलन जिसमें ना कोई रिश्ता हो, ना बंधन कहां तक निभ सकता है। आजादी हर कोई चाहता है पर कहीं ना कहीं बंधन होना भी जरूरी है। बंधन रिश्तों के मायने समझाता है, एक-दूसरे की कद्र करना सिखाता है और यह सिखाता है कि अगर एक कहीं भटक जाए तो दूसरे को उसको संभालने का पूरा हक है। काम्या शायद अब इस बात को समझ पाए या नहीं वह नहीं जानती क्योंकि अभी तक तो वह इसी उधेड़बुन में है कि वो कहां गलत थी।
