Hindi Best Story: मिलन भैया के विवाह में मौसी-बुआ-ताई सबसे कहती फिर रही थीं कि मेरी बेटी लाखों कमाती है परन्तु उसने अपने संस्कार नहीं छोड़े।
नीलम, मैं मैगी बनाने जा रही हूं, खाएगी?’ ‘नहीं…।’ विक्की से पुन: लड़ ‘इस बार छोडूंगी नहीं साले को?’
‘छ: महीने में ही तेरे हाल बता रहे हैं कि तू उसे पकड़ ही नहीं पाई थी कभी। वह कबूतर की तरह कभी इस मुंडेर बैठ रहा था, कभी उस मुंडेर।’ ‘मैं क्या, अब उसे तो पुलिस पकड़ेगी, देखना तू।’
‘क्या करने वाली है तू?’ ‘जबरदस्ती करने का आरोप लाऊंगी और क्या। कल ही थाने में जाकर
एफआईआर लिखवाऊंगी।’ ‘थाने क्यों जाना? एफआईआर तो फोन करके भी लिखवा सकती है।
1091, महिला हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके बलात्कार की सूचना दे दे। किन्तु एक बार पुन: सोच ले। एक बार एफआईआर दर्ज होने के बाद, उसकी विषयवस्तु में कोई बदलाव नहीं कर सकती है। हालांकि, बाद में किसी भी समय पुलिस अफसर को अतिरिक्त जानकारी दे सकती है।’
थोड़ी देर चुप्पी के पश्चात नीलम की रूम पार्टनर पलक पुन: बोली, ‘वैसे पिछले तेरे तीन-चार रिलेशनशिप, जिनमें किसी की भी एनिवर्सरी सेलिब्रेट नहीं कर पाई तू, यदि पुलिस ने अपनी चार्जशीट में उनका उल्लेख करके तेरा केस कमजोर कर दिया तब! तब तो विक्की का तू कुछ नहीं
बिगाड़ पाएगी। हां अपने पांव आप कुल्हाड़ी अवश्य मार बैठी होगी।’ ‘मैं क्या करूं? समझ नहीं आ रहा।
उसने मुझे शादी का झांसा दिया। मन भर गया तो मुझे छोड़ रहा है।’
‘उसकी तू पहली गर्लफ्रेंड है, जिसके साथ वह लिव-इन में रहा! अभी वह उम्र का कच्चा और तू तीस बसंत पार कर चुकी है! इसीलिए कह रही हूं कि रिपोर्ट लिखवाने से पहले पुन: सोच ले, कहीं तेरा दांव उल्टा न पड़ जाए।’
‘तू ठीक कह रही है यार।’ ‘मैं तो कहती हूं यदि रिलेशन में रहना है तो मेरी तरह रह न, कत्तई बिन्दास।’ ‘तू सच में कितनी बदल गयी। डरीसहमी और बुझी-बुझी-सी रहती थी कभी। कानपुर के एक कस्बे से निकलकर यहां बेंगलुरु में आ गुलमोहर-सी हो गयी।’
‘तुझसे ही सीखा।’
‘पर ‘गुरू गुड़ रह गया और शिष्य चीनी हो गया’ वैसे नीलम एक बात बताऊं तुझे, कभी-कभी मुझे अपराधबोध होता है।
हम लोग जेन-जी बनने की चाह में अपने माता-पिता को धोखा दे रहे हैं, टोटली धोखा। अभी पिछले महीने जब घर गयी थी तो मां ने ऐसे ट्रीट किया जैसे आसमान से कोई परी उतर आई हो उनके घर। मिलन भैया के विवाह में मौसी-बुआ-ताई सबसे कहती फिर रही थीं कि मेरी बेटी लाखों कमाती है
परन्तु उसने अपने संस्कार नहीं छोड़े।
बेंगलुरु में रहती है बेंगलुरु, उनके चेहरे के हाव-भाव उस समय ऐसे थे जैसे बेंगलुरु कोई शहर नहीं बल्कि परीलोक हो।
‘सेम हर…’ ‘हम लोगों के मां-बाप हम लोगों पर ब्लाइंड ट्रस्ट करते हैं न!’ ट्रिन-ट्रिन… ‘किसका फोन है?’ पलक ने पूछा, ‘विक्की का’ उसके चेहरे पर क्वेश्चन मार्क चिपक गया था। ‘मुझे क्या देख रही है। उठा, तुझसे सॉरी बोलना होगा।’ ‘लेकिन यार, मैं तो उसे पुलिस की धमकी दे आई थी।’
‘उठाकर देख, क्या कहता है।’ ‘हैलो…’ ‘हां बोल अब क्या चाहिए।’
‘देखो यार, रिलेशनशिप में रहने का क्या फायदा, जब पति-पत्नी के जैसे हमें एव्री-डे चिकचिक ही करना है। हम इक्कीसवीं सदी का पीछा करते हुए विरासत से मुख मोड़े बैठे थे। परन्तु
व्यवहार एक-दो दशक पहले के पतिपत्नी जैसा ही कर रहे हैं।’ विक्की नहीं, सामने फोन पर जैसे जेन-जी के आगे वाली जनरेशन थी।
‘तू मुझसे क्या चाहता है?’ ‘आजादी’, ‘जेन-जी आजादी के सिवाय और मांग ही क्या सकते हैं।’
उत्तर में नीलम तुनककर बोली थी। ‘देखो नीलम, हम लोग नई जनरेशन के हैं तो हमारी जीने की रीति भी नहीं होनी चाहिए न। जेन-जी की नकल क्यों करें।’

‘मतलब, तुम कहना क्या चाहते हो?’
‘यही कि हम लोग जेन-जी के रिलेशनशिप की तरह एक नई परम्परा को फालो करें।’
‘देखो विक्की, तुमने पहले भी मेरा दिमाग खराब कर रखा है, अब और नहीं। जो कहना है सीधे और सरल भाषा में बताओ, वरना…’
‘कबड्डी खेलने पर हमेशा क्यों तुल जाती हो। देखो, रिलेशनशिप क्यों शुरू हुआ?’
‘लोग विवाह में बंधने से पहले अपने पार्टनर को अच्छे से जान-समझ लेना चाहते थे और क्यों!’
‘करेक्ट…फिर आज पार्टनर क्या चाहते हैं।’
‘लड़ाई को लम्बा नहीं खींचना। यदि पार्टनर के साथ पटरी मेल न
खाए तो अलग हो जाएं।’ ‘बिलकुल सही, अब वही पत्नी-पति के सिर-फुट्टवल वाला युद्ध रिलेशनशिप में होने लगे हैं तो हम एक कदम और
आगे बढ़ाएं न, न कि पीछे जाएं।’ ‘तुम्हारी यही आदत मुझको नहीं पसन्द। मेरे पापा की तरह स्ट्रेट बोला करो।’
‘हम दोनों सिचुएशनशिप में रहते हैं। नो कमिटमेंट तो नो फाइट, क्या कहती
हो…?’
‘सोचकर बताती हूं!’ नीलम खीझी। ‘रात होने से पहले…’ विक्की ने जैसे वार्निंग -सी दी। ‘नहीं विक्की, मैं तुम्हें इस बारे में कल बताऊंगी।’
विवाह बंधन में रहना गंगा में रहना है और तेरे इस सिचुएशनशिप में रहना, मानो
स्वीमिंग पूल में रहना।
‘नो प्रॉब्लम…। मैं कल तक के लिए वेट कर लूंगा।’ ‘देखा नीलम, तुम दोनों में प्यार तो है, कितना है, यह ही नहीं पता। जनरेशन ALPHA भी आकर अब समाप्त होने वाला है। 2026 से जनरेशन BITTA आरम्भ हो जाएगा। यानी प्रेम सम्बन्ध के अलग-अलग व्यवस्थाएं बनेंगी परन्तु प्रेम मांपने का यंत्र कब बनेगा, पता नहीं! वैसे हो सकता है विश्व के किसी कोने में किसी प्रेम के परिंदे ने ऐसा कोई यन्त्र बनाया ही हो, कुछ ठीक-ठीक कह नहीं सकते। है न…?’
‘अरे वो प्रेम की खिलाड़ी, इतनी आगे न बढ़ जा कि लौट न सके।’ ‘विक्की जो कह रहा था, मैं भी तुझसे वही कहने वाली थी, उसके फोन आने से पहले।’
‘मगर…’
‘मगर को छोड़ पानी में, वह वहीं रहता हुआ स्वस्थ रहेगा और तुम दोनों रहो, रिलेशनशिप के बदले
सिचुएशनशिप में। मस्त साथ रहते हुए भी बन्धनमुक्त जीवन।’ ‘मने रील स्क्रोल करते-करते आज
की जनरेशन रिश्ते को भी स्क्रोल कर दे रही है।’ ‘यार बहुत इमोशनल होने की जरूरत नहीं है।’
‘विवाह के बन्धन में बंधकर जीवन बिता देने वाले बुजुर्ग सिचुएशनशिप सुनकर क्या समझेंगे? उन्होंने अभी तक तो रिलेशनशिप को भी ठीक से स्वीकार नहीं किया था।’ ‘विवाह के कुछ साल में तलाक लेने,
मर्डर कर देने से तो यह परम्परा अच्छी है।’
दस दिन पश्चात… ‘बेटा, ये रिलेशनशिप के बाद तुमने स्टेट्स में अब सिचुएशनशिप डाल
रखा, ये क्या होता है?’ ‘मां, कमिटमेंट करके रिलेशनशिप में नहीं रह सकती, इसलिए अब
सिचुएशनशिप में रहूंगी।’
‘तुम आजकल के युवा, कितनी जल्दी भाग रहे हो भई। इंस्टेंट हर चीज नहीं होती बेटा। ये रिश्ता है,
भावनाओं व प्रेम के बंधन का रिश्ता। जानवरों को देखी हो…! क्या मानव अब जानवरों जैसे रहने लग जाएंगे। बिटिया, हो सके तो लौट आओ, विवाह बंधन में रहना गंगा में रहना है और तेरे इस सिचुएशनशिप में रहना,
मानो स्वीमिंग पूल में रहना। हमने इंस्टेंट मैगी खाने की छूट दी थी तुम्हारी जनरेशन को, मालूम नहीं था कि ये पीढ़ी संबंधों में भी इंस्टेंट का प्रयोग करने लगेगी। हो सके तो लौट आना बिटिया…साँझ होने पर पक्षी भी
लौट आते हैं नीड़ में।’ फोन कट गया था। नीलम कठोर सतह समझकर बर्फीली नदी में खड़ी
सोच रही थी और बर्फ थी कि धीरेधीरे पिघल रही थी।
