Funny Stories for Kids: हलकी सर्दियों के दिन थे । खूब खुशनुमा । धूप भली-भली और सुहानी लग रही थी । जैसे बार-बार हाथ पकड़कर कह रही हो, “चल निक्का , बाहर चल । कहीं घूमकर आ न !” निक्का ने सोचा, ‘बात तो ठीक है । बढ़िया मौसम है । क्यों न पिकनिक का प्रोग्रा म मनाया जाए ? जरा घूमना-घामना होगा और दोस्तों के साथ गपशप भी ।’ उसने अपने दोस्तों से कहा । दोस्तों ने अपने दोस्तों से कहा । और बनते-बनते बन गया राजा जी के बाग में पि कनिक का प्रोग्रा म । अगले इतवार को निक्का अपने दोस्तों के साथ शहर से दूर राजा जी के बाग में पिकनिक मनाने गया, तो खूब खुश था । बड़े दिनों बाद उसे सैर-सपाटे का यह नायाब मौका मि ला था । राजा जी का बाग खूब बड़ा था और दूर-दूर तक उसमें हरियाली थी । इतनी तरह के पेड़-पौधे और रंग-बि रंगे फूल थे उसमें कि आँखें जुड़ा जातीं । फि र पूरे बाग में खूब कटी-छँटी मुलायम-मुलायम दूब ! देखकर सभी का जी खुश हो गया । निक्का राजा जी के बाग में आकर दोस्तों के साथ टहलते और गप्पें मारते हुए मस्ती के रंग में था । वह खूब मजे से हँस रहा था, नाच रहा था, गा रहा था । फिर एक कमाल की बात यह भी थी राजा जी के बाग में बड़े ही संदुर मोर थे । खूब सारे मोर । सफेद मोर भी और हरे-साँवले मोर भी । कहीं-कहीं नाचते हुए भी नजर आ जाते । देखकर निक्का का मन भी मोरों के साथ नाच उठता था । बाग के पास में ही साफ पानी की एक संदु र झील भी थी, ‘मानसरोवर’ ।
वहाँ तो घूमने का मजा ही कुछ और था ।
निक्का झील के किनारें घूम रहा था और पानी में उठती-गिरती लहरों को देख रहा था । तभी उसे वहाँ एक भूरा पिल्ला दिखाई दिया । खूब गदबदा, गोलू-मुटल्लू सा पिल्ला । उसके माथे पर काले टीके जैसा बड़ा सा निशान था । उससे पिल्ला और भी संदुर लग रहा था । निक्का ने सोचा, इससे खले ना चाहि ए ।
“आ बब्बू, आ !” निक्का ने प्यार से उसे बुलाया । उसे लगा, जैसे उस प्यारे, नन्हे से पि ल्ले का नाम तो बब्बू ही होना चाहिए । इस पर बब्बू झट दौड़ता हुआ निक्का के पास आ गया और उछल-कूद करने लगा । निक्का को बड़ा मजा आया । जल्दी ही उस नटखट पि ल्ले बब्बू से निक्का की दोस्ती हो गई ।
उसके साथ वह दूर तक दौड़ता हुआ जाता और पकड़म-पकड़ा ई खेलता । बब्बू में कमाल की चुस्ती थी । वह इतनी तेज भाग रहा था कि निक्का बार-बार कह उठता, “वाह, भई वाह.. !” भागते-भागते अचानक बब्बू झील के पानी में कूद गया । निक्का परेशान, अब वह क्या करे ? क्या हार मान ले बब्बू से ? ना जी ना, तो वह भी झटपट कूद पड़ा पानी में !
निक्का बब्बू का पीछा करते हुए पानी में बढ़ता जा रहा था । अचानक वह चौंका । उसे पानी में झिलमिल-झिलमिल करता कुछ नजर आया । कोई ऐसी सुनहरी चीज, जि ससे तेज कि रणें फूट रही थीं । ‘क्या हो सकता है वह ?’ निक्का सोचने लगा ।
कुछ पास जाकर उसने उसे पानी में डुबकी लगाकर उठा लिया । वह सोने का एक मेडल था, चम-चम करता हुआ । ‘अरे वाह, क्या कमाल की बात है ! यह कहाँ से आ गया इस झील में ?’ निक्का रोमांचि त था । ‘शायद कोई प्रसिद्ध कलाकार या खिलाड़ी यहाँ तैरने आया हो और उसका मेडल गिर गया हो !’ निक्का ने सोचा । निक्का ने दौड़कर अपने दोस्तों को दिखाया वह मेडल । सारे दोस्त अचंभे में पड़ गए । सत्ते बोला, “हमें इसे बाग के गार्ड को सौंप देना चाहिए ।” निक्का को यह आइडिया अच्छा लगा ।
आखिर सभी दोस्त मि लकर राजा जी के बाग के गार्ड घुम्मन सिंह के पास गए । गार्ड ने फोन करके मैनेजर महेंद्रनाथ जी से कहा, “आज बाग में छोटे-छोटे बच्चे घूमने आए हैं । इन्हीं में निक्का भी है । उसने झील के पानी में एक मेडल देखा और उठा लि या । वह सोने का बड़ा संदुर मडेल है । आप आकर दखे लीजिए ।”
महेंद्र को भी बड़ी उत्सुकता हुई । वे तुरंत वहाँ पहुँचे । मेडल को देखकर वे भी हैरान थे । मेडल को उलट-पुलटकर देखा । पता चला, यह तो कला और संगीत अकादमी का बड़ा पुराना मेडल है । फि र उन्हें याद आया, बरसों पहले बंगाल के प्रसिद्ध संगीतकार सोमू आनंद एक बार यहाँ तैरने आए थे । तैरते समय उनका मेडल यहाँ गिर गया था, जो मिल ही नहीं रहा था । निराश होकर वे लौट गए थे ।
मैनेजर साहब ने पुराने रजिस्टर उलटे-पलटे । उनमें सोमू आनंद के घर का फोन नंबर था । झटपट सोमू आनंद को मेडल मिलने की सूचना दी गई । सुनकर वे खुश हुए, बहुत खुश । साथ ही वे बड़े अचंभे में थे कि यह करिश्मा हुआ कैसे ? दो घंटे में ही वे एक स्पेशल हेलीकॉप्टर से आए । निक्का और उसके दोस्तों की पिकनिक अभी चल ही रही थी । उन्होंने वहाँ आकर निक्का को खूब प्यार किया । बाग के मैनेजर महेंद्रनाथ जी समेत हर कोई उसकी तारीफ कर रहा था ।
निक्का पिकनिक से लौटकर घर आया, तो उसने मम्मी -पापा को भी सोमू आनंद के उस सोने के मेडल के बारे में बताया । सब खुश थे—हैरान भी । मम्मी ने प्यार से निक्का के सिर पर हाथ फैरते हुए कहा, “तू कहानियों का शौकीन है न निक्का ! तो तुझे हर बार कोई न कोई नई कहानी मि ल ही जाती है ।” सुनकर निक्का हँस दिया और खुश होकर सोचने लगा, ‘वाकई यह पिकनिक तो यादगार बन गई !’
ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Bachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ
