I am a little bird
I am a little bird

Funny Stories for Kids: सर्दियों की सुबह थी । मीठी गुनगुनी धूप खिली थी । निक्का अपने घर के लॉन में घूम रहा था । बीच-बीच में फूलों-पत्तों से बातें कर लेता ।
ज़्यादातर गेंदे, गुड़हल, कनेर और गुलाब के फूल थे । निक्का को पसंद भी बहुत थे, जिन पर उसका प्यार निसार होता था । फूल भी निक्का से बातें करते हुए खूब हँस रहे थे । इठला रहे थे । कुछ तो निक्का की भोली बातों से खुश होकर झूम-झूम उठते । इतने में आई एक गौरैया । थोड़ी देर इधर-उधर घूमती रही । फिर चुपके से निक्का के कंधे पर आकर बैठ गई ।
निक्का को बड़ा अच्छा लगा । उसे बड़ी मीठी-मीठी गुदगुदी सी हो रही थी, और दिल में फुदक-फुदक । वह सोच रहा था, ‘कितना अच्छा हो, अगर यह गौरैया ऐसे ही बैठी रहे ।’ इतने में गौरैया ने गरदन
झुकाई । धीरे से उसके कानों में फुसफुसाकर कहा, “मुझसे दोस्ती करोगे ?”

निक्का तो यह चाहता ही था । झट से दोनों में दोस्ती हो गई और खूब कनबतियाँ भी शुरू हो गईं । कुछ देर बाद गौरैया टा-टा कहकर उड़ी । उड़कर चली गई, जाने कहाँ ! निक्का खुश था, इतना खुश कि उसका दिल कर रहा था, वह नाचे । बस, नाचता ही रहे देर तलक ।
अब तो गौरैया जब-जब आती, निक्का से ढेरों बातें करती । वह उसकी सबसे अच्छी सहेली बन गई । गौरैया से बातें करते हुए उसे लगता, जैसे वह बिना पंखों के ही आसमान में उड़ रहा है । उड़ता जा रहा है, दूर—बहुत दूर तक । जहाँ तक आसमान फैला हुआ है ।

निक्का गौरैया को अपने मम्मी -पापा, नंदू भैया, मीनू दीदी और दोस्तों के बारे में बहुत सारी बातें बताया करता था । गौरैया भी निक्का को अपनी प्यारी- प्यारी सहेली चिड़ियों के बारे में बताती, जिन्हें वह जी-जान से प्यार करती थी । फिर एक दिन की बात । निक्का अपने लॉन में बैठा था, तो उसे नानी की याद आई । पिछली बार वह नानी के गाँव जादूटोला में गया था, तो नानी ने
पिद्दा-पिद्दी की कैसी मजेदार कहानी सुनाई थी । साथ ही उसमें कविता की ये लाइनें भी थीं –

फुदक-फुदक कर पिद्दा आया,
फुदक-फुदक कर पिद्दी,
दाल का दाना पिद्दा लाया,
चावल लाई पिद्दी ।
बनी गि रहस्तिन पिद्दी फिर तो
खिचड़ी खूब बनाई,
दोनों बैठे खिचड़ी खाने
खिचड़ी मिलकर खाई ।
फिर दोनों ने गाना गाया
मि लकर तान उठाई,

फुदक-फुदक कर पिद्दा आया
संग-संग पिद्दी आई !

निक्का नानी की वह कहानी याद करके अकेले में ही हँस रहा था । तभी उसे दिखाई दी दोस्त गौरैया । उसने आते ही पूछा, “अरे वाह निक्का , आज तो तुम बैठे-बैठे अकेले ही हँस रहे हो । क्या बात है, मुझे नहीं बताओगे ?”
इस पर निक्का ने उसे जादूटोला गाँव में रहने वाली अपनी नानी के बारे में बताया, जो एक से एक मजेदार कहानियाँ सुनाती हैं । बताते-बताते निक्का के जी में न जाने क्या आया, बोला, “गौरैया…गौरैया, तुम जाने कहाँ-कहाँ घूमती हो । कि तने ही लोगों से मिलती हो और बातें करती हो । तुम्हें भी तो जरूर
कहानी आती होगी । जल्दी से एक अच्छी सी कहानी सुनाओ न ।” गौरैया घबराकर बोली, “ना-ना निक्का , ना ! मुझे तो कुछ नहीं आता, सिवाय चीं-चीं, चीं-चीं के ।…यकीन मानो निक्का , यकीन मानो ।”
गौरैया अपनी आँखों को तेजी से इधर-उधर नचाकर निक्का को समझाने की कोशि श कर रही थी । पर निक्का अड़ गया । ‘नहीं-नहीं, मैं तो कहानी सुनुँगा ।’ उसने जिद पकड़ ली ।
“अच्छा ठीक है, अबके आऊँगी तो जरूर कहानी सुनाऊँगी । मैं अपनी नानी से कोई अच्छी सी कहानी सनु कर उसे याद कर लूंगी । फिर तुम्हें भी सुनाऊँगी । ठीक है न !” कहकर गौरैया उड़ गई ।

इसके बाद एक दिन बीता, दो दिन बीते । पूरा हफ्ता बीत गया । गौरैया आई ही नहीं । निक्का उदास हो गया । सोचने लगा, “कहीं गौरैया मुझसे नाराज तो नहीं हो गई ? मैंने भला क्यों ऐसी जिद की ?” उसने तय कर लिया, अब के गौरैया आएगी, तो वह उससे कहानी सुनाने की बिल्कुल जिद नहीं करेगा । उलटे सॉरी बोलकर उससे माफी माँगेगा ।
पर गौरैया आई ही नहीं, तो भला वह उससे सॉरी कैसे बोलता ! एक दिन निक्का इसी तरह उदास बैठा था । इतने में दूर से उसे चीं-चीं-चीं की आवाज सुनाई दी । निक्का चौंककर इधर-उधर देखने लगा । इतने में हवा के मीठे झकोरे की तरह गौरैया उड़ती हुई आई । हँसकर बोली, “निक्का …निक्का,
मैंने अपनी नानी से कहानी सुनकर याद कर ली है । सुनोगे ?” सुनते ही निक्का मारे खुशी के उछल पड़ा । “अरे वाह, नेकी और पूछ-पूछ ! सुनाओ-सुनाओ, झटपट सुनाओ ना मेरी अच्छी गौरैया !” कहते हुए उसकी आँखों में चमक आ गई । गौरैया तो इसके लिए तैयार ही थी । उसने झट कहानी सुनानी शुरू की । कहानी ऐसी थी, जि समें कहानी भी थी, कवि ता भी । गौरैया बड़े ही मीठे सुर में गा रही थी –

मैं तो हूँ इक नन्ही चिड़िया
छोटी-सी मैं चिड़िया,
चीं-चीं करती हूँ मैं हर पल,
गाती हूँ मैं बढ़िया ।
दोस्त मेरा है निक्का , वह जो
भोला-भाला, प्यारा,
धरती का चंदा है वह तो,
धरती का है तारा ।
दाना उसे खिलाऊँगी मैं
पानी उसे पिलाऊँ,
मन करता है आसमान में
उसको साथ उड़ाऊँ ।
खुश होकर वह बोल पड़ेगा
आसमान है बढ़िया,
ऐसी नटखट चिड़िया हूँ मैं
चीं-चीं, चीं-चीं चिड़िया…!

सुनते ही निक्का को बड़े जोर की हँसी आई । हँसते-हँसते बोला, “अरे वाह, तुम्हा री कहानी तो अच्छी है । बहुत अच्छी । उसमें तो मैं भी आ गया !” गौरैया हँसी । बोली, “तुम मेरे दोस्त हो ना । मैंने यह बात नानी को बताई ।
और बस, नानी ने बात की बात में यह कहानी बना दी, और मैंने झटपट याद भी कर ली ।”फि र कुछ रुककर उसने कहा, “अच्छा निक्का , कहानी तुम्हें पसंद आई न ? तो लो, अब आगे सुनो !” और फिर वह उसी तरह सुरीले कंठ से सुनाने लगी –

अजब कहानी यह नानी की,
है ना कि तनी बढ़िया,
सुना रही मैं नटखट चिड़िया
चीं-चीं, चीं-चीं चिड़िया…!

निक्का को गौरैया की कहानी इतनी अच्छी लगी कि उसने कई बार सुनी । जब-जब गौरैया आती, वह उससे ढेरों बातें करती, फिर यह कहानी भी सुनाती । सुनकर निक्का हँसता । खूब हँसता, खुदर-खुदर-खुदर ।

फिर एक दिन आई गौरैया तो थोड़ी उदास थी । उसका उतरा हुआ मुँह देखकर निक्का ने प्यार से पूछा, “क्यों प्यारी गौरैया, क्या हुआ ?” गौरैया बोली, “सुनो निक्का , तुम दुखी मत होना ।…अब मैं आ नहीं पाऊँगी । मुझे दूर देश जाना है । हमारी पूरी टोली जा रही है ।”
सुनकर निक्का की आँखों में आँसू आ गए । गौरैया भी रोई । फिर बोली, “चिंता न करो निक्का , एक दिन मैं जरूर लौटूँगी ।”
तब से रोजाना निक्का खिड़की पर बैठ, गौरैया का इंतजार करता है । कभी-कभी उसे कहीं दूर से गौरैया की आवाज सुनाई देती है, “मैं तो हूँ इक नन्ही चिड़िया, छोटी सी मैं चिड़िया, चीं-चीं करती हूँ मैं हर पल, गाती हूँ मैं बढ़िया…!” सुनकर उसके चेहरे पर बड़ी मीठी मुसकान आ जाती है ।

ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंBachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ