saanson kee keemat
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Heart Touching Story: दुलिचंद नगर के सबसे अमीर लोगों में से थे। पैसा तो बहुत कमाया लेकिन मान-सम्मान नहीं कमा पाए। कहने को तो इतना पैसा था कि पूरा नगर खरीद लेते लेकिन कभी किसी जरुरतमंद की मदद नहीं की। धीरे-धीरे दुलिचंद ने 50 करोड़ की सम्पत्ति इकट्ठी कर ली। दुलिचंद ने पूरा जीवन केवल पैसा कमाने में निकाल दिया। ना कभी अच्छे कपड़े पहने और ना ही कभी कोई शौंक पूरा किया।

एक रात दुलिचंद कमरे में आराम से सोया हुआ था। अचानक वहां यमराज का दूत आया। दूत बोला, “तुम्हारी उम्र पूरी हो चुकी है, तुम्हें यमराज ने बुलाया है।”

दुलिचंद ने कहा, “लेकिन मैंने तो अभी जीवन सही से जिया भी नहीे है, कृप्या मुझे मत ले जाइये।”

दूत ने कहा- “नहीं तुम्हें जाना होगा।”

दुलिचंद ने कहा- “मेरे पास बहुत पैसे हैं, मैं तुम्हें 10 करोड़ दे दूंगा मुझे एक साल और जीने दो।”

दूत नहीं माना। दुलिचंद गिड़गिड़ाते हुए बोला, “मैं 20 करोड़ दूंगा मुझे एक महीना और जीने दो।”

दुलिचंद दया की भीख मांग रहा था, “मैं पूरे 50 करोड़ दे दूंगा मुझे एक घंटा और जीने दो।”

दूत फिर भी नहीं माना। दुलिचंद ने कहा, “ठीक है मैं एक पत्र लिखना चाहता हूं, मुझे बस एक पत्र लिख लेने दो।” दूत मान गया।

दुलिचंद ने तेजी से कलम उठाई और एक पत्र लिखा- ‘यह पत्र जिस किसी को भी मिले वह मेरा यह संदेश लोगों को बताए कि मैंने पूरा जीवन मेहनत करके 50 करोड़ रूपये इकट्ठे किए लेकिन इतनी बड़ी रकम से भी मैं अपने जीवन का एक घंटा भी नहीं खरीद पाया। इस जीवन कर हर क्षण अमूल्य है। जब तक जीवन है भरपूर जिएं, दूसरों की मदद करें, हमेशा खुश रहें। बीता समय कभी वापस नहीं आता। आप अपनी पूरी सम्पत्ति देकर भी अपने जीवन का बीता समय नहीं खरीद सकते।’

दुलिचंद का यह पत्र वाकई दिल छू लेने वाला है। यह संदेश केवल एक कहानी नहीं है बल्कि जीवन की सच्चाई है। आप कितने भी पैसा कमा लें, लेकिन जीवन का एक पल भी नहीं खरीद सकते। यह जीवन तो अमूल्य है भरपूर जिएं।

ये कहानी ‘दिल को छू लेने वाली कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंDil Ko Chhoo Lene Wali Kahaniyan (दिल को छू लेने वाली कहानियाँ)