Social Story: अपने हाथ में कंफर्मेशन और प्रमोशन लेटर देखकर सनी हतप्रभ रह गया। उसे यकीन नहीं आ रहा था कि यह उसी के प्रमोशन का लेटर है।
चार टीचर लाइन पर थे, जिसमें से छांटकर प्रिंसिपल सर ने सनी को फिजिकल एजुकेशन का मुख्य टीचर बना दिया था।
अभी जुम्मा जुम्मा आठ महीने भी नहीं हुए थे। उसे इस स्कूल को ज्वाइन किए हुए, वह भी सिफारिश पर मगर आज उसके हाथ में प्रमोशन का लेटर लहरा रहा था।
यह सब देखकर वह जितना आश्चर्यचकित था उससे ज्यादा रोमांचित महसूस कर रहा था।
उसकी आंखों के आगे अपनी मां का आंसू भरा हुआ चेहरा घूम गया। वह उसके भविष्य को लेकर कितनी संदेह में रहती थी और कोई भी दुख देने में उसने कोताही भी नहीं बरती थी।
आज पूरा हॉल तालियां बजा रहा था और सनी अपने हाथों में प्रमोशन लेटर लेकर चुप बैठा हुआ था। उसकी आंखों के कोर डबडबा आए थे।
प्रिंसिपल ने उसका कंधा थपथपाते हुए बोला था “यू आर सो ब्रिलिएंट गाय …! अपनी ड्यूटी को तुम समझते हो तो तुम्हारा प्रमोशन तो बनता ही है।”
सनी के सभी दोस्त और कलीग्स मिलकर “सनी पार्टी…!! सनी पार्टी…!!” का शोर मचाने लगे।
सनी अभी भी चुपचाप बैठा हुआ था। उसकी आंखों के आगे अपनी मां का दुख भरा हुआ चेहरा बार-बार उसे कचोट रहा था।
उसकी यह हालत उसके सहकर्मी और बचपन के दोस्त दीपक से छुपी हुई नहीं थी। वह पास आकर उसका कंधा थपथपाते हुए बोला “सनी इस प्रमोशन पर तो तुम्हें पार्टी देना बनता है। मुझे क्या ,किसी को यकीन नहीं था कि तुम इस पोजीशन को डिजर्व करोगे लेकिन हां, मेहनत सब कुछ कर देती है, सच में।”
अपनी भरी हुई आंखों से सनी ने दीपक का हाथ पकड़ लिया।
“तुमने मुझे रास्ता दिखाया था और अब भी तुम ही मशाल की तरह मेरे आगे खड़े हो। शुक्रिया मेरे दोस्त!”
“मैंने कुछ नहीं किया! सब तुम्हारी मेहनत ने किया। चलो देखो सारे स्टाफ तुम्हें पार्टी के लिए बोल रहे हैं। उन लोगों को देखकर सनी भावुक होकर मुस्कुराते हुए बोला “बिल्कुल ,सैलरी आने दो फिर हम पार्टी करेंगे। इस पार्टी की चीफ गेस्ट रहेगी मेरी मां, जिसको मैंने जिंदगी भर दुख दिया और जिसने मेरे सारे दुख को पीकर मेरे अच्छे भविष्य के लिए कामना ही नहीं किया बल्कि मेरे साथ चल कर मुझे आज इस पद पर बैठा दिया।”
“बिल्कुल सनी, हम यह पार्टी आंटी के साथ ही मनाएंगे।”दीपक ने उसे सांत्वना देते हुए बोला। सनी खुश हो गया।
सनी स्कूल के हॉस्टल में ही रहता था।उसका घर यहां से तीन-चार घंटे दूर था। वीकेंड में वह हमेशा ही अपने घर चला जाया करता था मगर अब वीकेंड में उसे घर जाने की हड़बड़ी थी।
अपने कमरे में लौटने के बाद भी उसने अपनी मां को इस सरप्राइज न्यूज़ के बारे में नहीं बताया था। वह उसे सामने से सरप्राइज देना चाहता था।
अपने कमरे में आकर कपड़े बदलने के बाद उसने इलेक्ट्रिक केतली में चाय बनाया और चाय लेकर बैठ गया। उसके दिमाग में पुरानी बातें दौड़ने लगी।
“अरे सनी, छक्का लग गया! क्या शौट मारा यार!”अपने गली में दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने में मस्त था।
माँ गोमती जी गेट पर खड़ी थीं माथे पर चिंता की लकीरें लिए हुए।
“सनी!” उन्होंने आवाज दी।
सनी उछलता हुआ आया, “क्या हुआ माँ? देखो ना, छक्का मारा मैंनें!”
“बेटा, शाम के पाँच बज गए। तूने आज भी पढ़ाई शुरू नहीं की। प्रिंसिपल सर ने क्या कहा था, याद है ना?”
सनी हँस पड़ा, “माँ, पढ़ाई कोई भागी जा रही है? खेल लूँ, बाद में पढ़ लूँगा।”
माँ कुछ कहतीं, उसके पहले ही सनी दौड़ता हुआ वापस मैदान की तरफ चला गया।
“सनी, बेटा तुम्हारी परीक्षा है ना कल…!! गोमती जी की आवाज गले में ही फंसकर रह गई।
प्रिंसिपल सर ने खासी चेतावनी दी थी ‘इस साल बारहवीं है। इसमें कोई रिस्क नहीं ले सकते।जो बच्चे प्री-बोर्ड में क्वालीफाई नहीं करेंगे उन्हें 12वीं का बोर्ड नहीं देने दिया जाएगा।
जिसके कारण गोमती जी और उनके पति सुशील दोनों ही चिंता में रहते थे। सनी को समझाने का कोई मतलब नहीं था। उसे किसी बात की चिंता नहीं थी।
फल वही हुआ जिसका डर था।बड़ी मुश्किल से उसने बारहवीं की परीक्षा पास किया।
आगे किसी भी बढ़िया कॉलेज में एडमिशन भी नहीं मिला। उसके सारे दोस्त पढ़ाई में लग गए थे।सनी अपने आप में मस्त रहता था। बड़ी मुश्किल से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल किया।
लेकिन अब उसे होश आ गया था लेकिन अब किस्मत कहीं साथ नहीं दे रही थी।
दीपक, गोमती जी के दूर के रिश्तेदार का बेटा था जो उनके पड़ोस में रहता था। वह सनी का साथी था।
पढ़ाई के बाद एक अच्छे स्कूल में उसकी नौकरी हो गई थी। वह अच्छी खासी तनख्वाह में प्लस टू के बच्चों को पढ़ा रहा था।
कुछ समय ऐसे ही बीत गया।
गोमती जी की सेहत सनी की चिंता में बिगड़ती जा रही थी। अब उनके पति के रिटायरमेंट का भी समय आ रहा था।
सनी के हम उम्र के सभी बच्चे अपनी जिंदगी में सेटल हो रहे थे मगर सनी का कोई भविष्य नहीं था।
एक दिन दीपक उनके घर पर उजाला लेकर आया। उसके स्कूल में फिजिकल टीचर की जगह खाली हो रही थी।
“मामी, तीन महीने की नौकरी रहेगी। अगर इन तीन महीने में सनी ने अच्छा परफॉर्म कर लिया तो वहां टिक सकता है नहीं तो मुश्किल है। पर मैं अभी बात कर देता हूं।”
गोमती जी ने दीपक के आगे हाथ जोड़ लिए।
दीपक की बात पर उसे सनी को उस स्कूल फिजिकल टीचर की नौकरी मिल गई।
गोमती जी सनी के माथे पर वृंदावन का तिलक लगाते हुए बोली “बेटा भगवान तुझे सद्बुद्धि दे, तेरी नौकरी टिक जाए।”
गोमती जी की आंखों की चमक ने सनी को मौका दिया था। उसने जी तोड़ मेहनत किया। उसका नतीजा यह हुआ कि आज वह उसी स्कूल में परमानेंट टीचर बन गया था।
दो दिन बाद वीकेंड में जब वह घर पहुंचा।
जैसे ही सनी अंदर आया गोमती जी पहले से खाना बना कर रखी हुई थी।
“ तुम्हारी पसंद का ही खाना बनाया हुआ है।”गोमती जी मुस्कुराते हुए बोली।
“ हमेशा ही आप मेरी पसंद का खाना बनाए रखती हैं पर यह बताओ आपको क्या पसंद है?”
“क्या मतलब ?” गोमती जी चौंक गईं।
अपने हाथों से कंफर्मेशन लेटर निकालकर उसने अपनी मां को देते हुए कहा” इसे पढ़ो मां।”
अपनी धुंधली आंखों में चश्मा ठीक कर दे गोमती जी ने उसका कंफर्मेशन लेटर पढ़ने लगीं।
उनकी आंखें छलछला आईं।
सनी उनके हाथों को पकड़ लिया “मां, बस यही हाथ है जिसने आज मुझे इस मुकाम पर पहुंचा दिया है ।”
“कैसी बात कर रहा है तू सनी!मैं तेरी मां हूं।”
“हां मां, मैं वो खुशनसीब हूं जिसे ये अधिकार विधाता ने दिया है। इन्हीं हाथों की ममता ने मुझे आज इंसान बना दिया।
आपकी दुआ ने मुझे इज्जत भरी जिंदगी गिफ्ट किया है!
शुक्रिया मां!”
सनी अपनी मां से गले लगकर रो पड़ा।
