Posted inरोमांटिक कहानियां, लघु कहानी - Short Stories in Hindi, सामाजिक कहानियाँ (Social Stories in Hindi), हिंदी कहानियाँ

तन्हाई-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Short Stories in Hindi: आज मैं तन्हा हूँ या तन्हा महसूस कर रही हूँ! तन्हा होने और अकेले होने में फ़र्क़ है । अकेलापन काटता नहीं है, तन्हाई काटती है। जब हम अकेले होते हैं तब हमारे साथ वो सब होते हैं जो होते तो हमारे साथ हैं पर बस हमसे दूर होते हैं लेकिन हम […]

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खिलौना-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Love Story: बिल्ली, “रास्ता काट गई” पीछे से ठहाको की आवाज आने लगी। “छोड़ना यार, क्यों पीछे पड़ा रहता है उसके?” क्यों ना बोलूं रोनी सी शक्ल जब भी सामने आती है। कुछ न कुछ गड़बड़ होती ही है। “देख मेरी गाड़ी पंचर हो गई” कॉलेज का सहपाठी जोर से बोला और प्रिया सर […]

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बीच का रिश्ता-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Motivational Story: रिया और आरव की मुलाक़ात किसी फिल्मी सीन की तरह नहीं हुई थी। न कोई टकराने वाली कॉफी, न कोई अचानक नज़रें मिलना। वो बस एक ऑफिस के प्रोजेक्ट पर साथ काम करने वाले दो आम लोग थे।शुरुआत में बातचीत सिर्फ़ ईमेल और कॉल तक सीमित थी — “इस फाइल का अपडेट […]

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लौट आओ फिर ना जाने के लिए-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Motivation Story: अल सुबह ठंडी हवाएं उमड़-उमड़ कर तन से लिपटी जा रही थी।नीला आसमान नीले से धूसर होने की यात्रा में था। उसने अपनी साड़ी को कसकर अपने तन से लपेट लिया।ठंडी हवा के झोंके तन पर सिरहन पैदा कर रहे थे।कल रात से ही मौसम का मिजाज़ कुछ बदला-बदला सा था।सच कहते हैं लोग जीवन और मौसम का कोई भरोसा नहीं […]

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कांजीवरम की लाल साड़ी-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: राखी का दिन बीतने को था और ललित की  कलाई सूनी ही रह गई थी। उसे बार-बार रुलाई छूट रही थी और अपने घर की और अपने भाई बहनों की बहुत याद आ रही थी।  साल भर हो गया था उसे घर गए हुए सबसे मिले हुए। नौकरी लगने के बाद अपने घर […]

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घोंसला-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Social Story: जब तृषा ने पहली बार बसंत को देखा तो उसे लगा यह मौसम उसके जीवन में अब स्थाई हो जाएगा…. फिर ऐसा क्या हुआ की यह मौसम रूठ गया।कुछ ना हो कर भी बहुत कुछ हुआ जैसे अपेक्षाओं की अधिकता, काम का बोझ और एक दूसरे को पर्याप्त समय ना देना। कहने […]

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मैडम जी-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Social Story: ऑफिस का दरवाज़ा खुलते ही सबकी आवाज़ें धीमी हो जाती थीं।“मैडम जी आ गईं,” किसी ने धीरे से कहा। हर फ़ाइल करीने से सजी रहती, हर कर्मचारी सीधा बैठा होता। वजह थी – मानिनि।वरिष्ठ अफ़सर, तेज़ दिमाग़, सख़्त मिज़ाज। कम बोलतीं, पर उनके शब्द आदेश जैसे होते। लोग उन्हें पीछे से “मैडम […]

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मिस क्युटी-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Romantic Story: मेरे श्रीमान जी अपने मोबाइल में इस तरह डूबे हुए थे कि उन्हें मेरे पास होने ना होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। मैं सुबह से पच्चीसों मैसेज और छत्तीसों फोन कॉल कर लूं पर इस बंदे ने एक का भी जवाब नहीं दिया। रसोई का काम निपटा करके […]

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नमस्ते दीदी-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Social Story in Hindi: प्रणाम!तुम कैसी हो ?आज तुम्हें पत्र लिख रहा हूं, बहुत खुश होकर! अपनी आंखों में आंसू भरकर।तुम कहती थी ना पुलकित, उस दिन का इंतजार है जब तू डॉक्टर बन जाएगा। अम्मा बाबा की इच्छा पूरी कर लेगा! बस उसी दिन मैं गंगा नहा लूंगी और कोई इच्छा नहीं है …बस […]

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बिना शब्दों के प्रेम-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Short Romantic Story: शीतल रोज़ सुबह की तरह मेट्रो में सफर कर रही थी। चेहरे पर हल्की थकान, हाथ में ऑफिस का बैग, और मन में वही रोज़ का प्रश्न – क्या इस भागदौड़ में कोई ऐसा है जो संवेदनाओं को समझ सके?मेट्रो के कोने में बैठे एक बुज़ुर्ग सज्जन, सफेद खादी कुर्ता और धोती […]

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