Hindi Kahani: दरवाजे पर कोई लगातार आवाज दे रहा था। थोड़ी देर सुन कर भी अनसुना करती रही थी प्रिया। उसे लग रहा था कोई ना कोई नीचे आवाज सुनकर दरवाजा खोल ही देगा। जब प्रिया से रहा न गया तो वो हाथ में वायपर लिए हुए ही बॉलकनी में आकर देखने लगी कि नीचे कौन है? देखा […]
Author Archives: कविता झा
शुक्रिया राघव—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Motivational Story: “ये क्या बेवकूफी कर रही हो रैना। आखिर कितना कुछ किया है राघव और उसके परिवार ने हमारे लिए। कैसे भूल गई तुम कि आज उन्हीं की बदौलत तुम जिंदा हो और तुमने एक बार भी नहीं सोचा कि तुम्हारे इस व्यवहार से उनको कितना बुरा लगेगा।” “मुझे कुछ नहीं सुनना उन […]
प्रेम बीज-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Social Story: नीरा का सिर दर्द से फटा जा रहा था। सुबह से पच्चीसों कॉल कर चुकी थीं उसकी मम्मी। हर बार सिर्फ एक ही बात… “शादी के लिए हांँ कर दो। तुम्हें कोई पसंद है तो बता दो।” वो थक गई थी अब मांँ की उन्हीं बातों से। “अब तू अठाईस की हो […]
अपमान के घूंट—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: “सोमा हम आज ही यहां से चले जाएंगे। तुम सामान पैक कर लो और बच्चों को भी बता दो अब वो यहां इस घर में नहीं आएं। मुझसे अब और जिल्लत बर्दास्त नहीं होती।” अमन के दोनों बेटे दूसरे शहर में रहकर पढ़ाई कर रहें हैं और वो अपनी पत्नी सोमा के साथ […]
रिटायरमेंट—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: “रमा पिताजी कहां हैं?” सुहास ने ऑफिस से आते ही अपनी पत्नी से पूछा।“सुबह से अपने कमरे से बाहर निकले ही नहीं हैं। मैंने नाश्ता और खाना समय पर दे दिया था। मैं तो बोल बोल कर थक गई कि थोड़ा घर के काम में भी मदद करवा दिया करें और बाजार से […]
लास्ट कैंडिडेट-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Motivational Story: “मिस्टर दीपक आपने सभी सवालों का जवाब बिल्कुल सही दिया है। हमें खुशी होगी आप जैसा काबिल व्यक्ति हमारे स्टाफ में शामिल हो। हम आपको कॉल करके बताएंगे कि कब से ज्वाइन करना है।”राजेन्द्र ने संगीत शिक्षक के लिए अंतिम अभ्यर्थी दीपक से कहा जिसके चेहरे पर शुन्य भाव उसने भी महसूस […]
अपने पराए—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Social Story: “तुम आ गई मुझे तो लगा नहीं आओगी।” बड़ी उम्मीद भरी नजरों से देख सुहानी की बड़ी बहन मालती उससे बोली थी जो उसे कुछ सालों से हिकारत भरी नजरों से देखा करती थी। गले में सोने की चेन और कान में हीरे के टॉप्स से ज्यादा उसके चेहरे पर चमक थी […]
कांजीवरम की लाल साड़ी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: राखी का दिन बीतने को था और ललित की कलाई सूनी ही रह गई थी। उसे बार-बार रुलाई छूट रही थी और अपने घर की और अपने भाई बहनों की बहुत याद आ रही थी। साल भर हो गया था उसे घर गए हुए सबसे मिले हुए। नौकरी लगने के बाद अपने घर […]
किस्तें चुकानी बाकी हैं-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Social Story in Hindi: रैना के अठारहवें जन्मदिन पर उसके पिता सुहास जो उसके लिए तोहफा लेकर आए थे उसे देखकर वो पापा के गले लग गई …” थैंक्यू पापा थैंक्यू पापा… आई लव यू सो मच… यू आर दि बेस्ट इन दिस वर्ल्ड”कहकर डिब्बे को खोल उसमें रखे आईफोन को चूमने लगी।सुहास भी अपनी […]
मिस क्युटी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Romantic Story: मेरे श्रीमान जी अपने मोबाइल में इस तरह डूबे हुए थे कि उन्हें मेरे पास होने ना होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। मैं सुबह से पच्चीसों मैसेज और छत्तीसों फोन कॉल कर लूं पर इस बंदे ने एक का भी जवाब नहीं दिया। रसोई का काम निपटा करके […]
