Summary:बिना रसोई वाला गांव: गुजरात का चांदणकी जहां सब खाते हैं एक साथ
गुजरात के चांदणकी गांव में हर घर में चूल्हा नहीं जलता, बल्कि पूरा गांव एक सामुदायिक रसोई पर निर्भर है।
यह अनोखी पहल बुजुर्गों की सुविधा और सामूहिक जीवन की मिसाल बन चुकी है।
Village Where No one cook: घर छोटा हो या बड़ा, लेकिन हर घर में रसोई घर अवश्य ही होता है। यह घर का सबसे अहम और जरूरी स्थान माना जाता है, क्योंकि यही वह स्थान होता है जहां परिवार के सभी सदस्यों के लिए खाना बनाया जाता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताएँगे, जहां हर घर में रसोई नहीं होता है, ना ही वहां महिलाएं या पुरुष खाना बनाते हैं, लेकिन फिर भी सबका पेट भरता है और कोई भी इस गांव में भूखा नहीं सोता है।
अब आप सोच रहे हैं होंगे कि बिना रसोई के और चुल्हा जलाए इस गांव के लोग खाना कैसे बनाते हैं और अपने परिवार का भरण- पोषण कैसे करते हैं। तो आइए जानते हैं कि यह गांव कहाँ है और इस गांव में क्यों हर घर में खाना नहीं बनाया जाता है। यह गांव गुजरात में हैं और इस गांव का नाम चांदणकी है। इस गांव में हर घर में चूल्हा नहीं जलता है, बल्कि यहां गांव के सभी लोगों का खाना एक ही जगह बनता है और सभी लोग एक साथ बैठकर खाना खाते हैं। यह व्यवस्था गांव में रह रहे बुजुर्गों के लिए बाहर बसे युवाओं ने शुरू की है, ताकि माता-पिता को रोज खाना बनाने में परेशानी ना हो।
कैसे शुरू हुई एक साथ खाना बनाने की प्रथा

दरअसल इस गांव के कुछ युवा विदेशों में जाकर बस गए हैं और वहीं कुछ युवा बड़े शहरों के आसपास में बस गए हैं। यहाँ लगभग 1000 के आसपास ही लोग रहते हैं। इसलिए इस गांव में बड़ी संख्या बुजुर्गों की है और बुजुर्गों को अकेले रहते हुए अलग से खाना न बनाना पड़े, इसलिए गांव वालों ने एक साथ खाना बनाने की प्रथा शुरू की थी।
2000 रुपये में यहाँ महीने भर मिलता है खाना

इस गांव में भोजन की सेवा मुफ्त नहीं है, बल्कि यहाँ हर व्यक्ति 2000 रुपये प्रतिमाह देता है। यहां खाना लोगों के द्वारा नहीं बल्कि पेशेवर रसोइयों के द्वारा बनाया जाता है, जिन्हें हर महीने 11,000 रुपये का वेतन दिया जाता है। यहाँ के सामुदायिक रसोई का मेन्यू हर किसी की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है, ताकि सभी लोगों को उनकी पसंद का खाना मिल सके। खास मौकों पर यहाँ तरह-तरह के खास व्यंजन भी बनाए जाते हैं, जिन्हें सभी लोग मिलकर आनंद से खाते हैं।
पर्यटकों के लिए भी खुला है यहाँ का भोजनालय

चांदणकी गांव की यह परंपरा केवल गांववालों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब यह पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यहाँ गांव वाले बाहर से आने वाले लोगों का बहुत अच्छे से स्वागत करते हैं, उनके खाने-पीने का पूरा ध्यान रखते हैं। साथ ही पर्यटक भी उनकी सामूहिक रसोई में बने खाने का आनंद लेते हैं और ग्रामीण जीवन को करीब से देखते हैं। यहीं वजह है कि अब यह छोटा सा गांव लोगों के लिए एक अनोखा और आकर्षक पर्यटन स्थल बन चुका है, जहाँ लोग आना और समय बिताना पसंद करते हैं।
