Why couldn't Neena Gupta become Phoolan Devi?
Why couldn't Neena Gupta become Phoolan Devi?

Overview: क्यों नहीं बन पाईं नीना गुप्ता 'फूलन देवी

नीना गुप्ता ने खुलासा किया कि उन्होंने 'बैंडिट क्वीन' में मुख्य भूमिका के लिए कड़ी मेहनत की थी, लेकिन निर्देशक शेखर कपूर ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि वे उस किरदार के लिए 'जरूरत से ज्यादा सुंदर' और 'गोरी' हैं।

Why Neena Gupta Could Not Become Phoolan Devi: शेखर कपूर की 1994 में आई फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ भारतीय सिनेमा की एक मील का पत्थर मानी जाती है। फूलन देवी की जिंदगी पर आधारित इस फिल्म में मुख्य भूमिका सीमा बिस्वास ने निभाई थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नीना गुप्ता ने भी इस रोल के लिए अपनी पूरी जान लगा दी थी?

नाक में बाल फंसाकर दिया था ऑडिशन

Why couldn't Neena Gupta become Phoolan Devi?
Why couldn’t Neena Gupta become Phoolan Devi?

नीना गुप्ता ने बताया कि वे फूलन देवी के किरदार को निभाने के लिए इतनी उत्साहित थीं कि उन्होंने अपने लुक के साथ बड़ा प्रयोग किया था। उन्होंने शेखर कपूर को अपनी कुछ ऐसी तस्वीरें भेजी थीं जिनमें वे बिल्कुल भी ‘नीना गुप्ता’ जैसी नहीं लग रही थीं। नीना ने खुद बताया, “मैंने ऐसी तस्वीरें भेजी थीं जिसमें मेरे बाल नाक में फंसे हुए थे और मैं बहुत रफ (Rough) दिख रही थी।” वे दिखाना चाहती थीं कि वे एक डकैत के कठोर किरदार में पूरी तरह ढल सकती हैं।

तुम बहुत गोरी और सुंदर हो”

तमाम कोशिशों के बावजूद निर्देशक शेखर कपूर ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया। रिजेक्शन की वजह कोई कमी नहीं, बल्कि उनकी सुंदरता थी। शेखर कपूर ने नीना से कहा, “तुम इस रोल के लिए बहुत ज्यादा अच्छी (Too good-looking) दिखती हो।” फिल्म की मांग थी कि फूलन देवी का किरदार थोड़ा सांवला, कठोर और ग्रामीण परिवेश का लगे। नीना का रंग साफ था और उनके फीचर्स बहुत शार्प थे, जो उस समय के ‘डकैत’ लुक में फिट नहीं बैठ रहे थे।

सीमा बिस्वास की तारीफ

भले ही नीना को वह रोल नहीं मिला, लेकिन उनके मन में कोई कड़वाहट नहीं है। ईमानदार स्वीकारोक्ति: नीना ने हाल ही में एक इंटरव्यू में माना कि सीमा बिस्वास की कास्टिंग बिल्कुल परफेक्ट थी। उन्होंने कहा कि सीमा ने जिस तरह से उस किरदार को निभाया, वह शायद ही कोई और कर पाता।

करियर का लंबा संघर्ष

नीना गुप्ता ने यह भी साझा किया कि कैसे उस दौर में अभिनेत्रियों को उनके लुक्स के आधार पर टाइपकास्ट कर दिया जाता था। ‘बैंडिट क्वीन’ न मिल पाना उनके लिए एक बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और सालों बाद ‘बधाई हो’ और ‘पंचायत’ जैसी कृतियों से अपनी धाक जमाई।

मैं रिचा मिश्रा तिवारी पिछले 12 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हूं। विभिन्न न्यूज चैनल के साथ काम करने के अलावा मैंने पीआर और सेलिब्रिटी मैनेजमेंट का काम भी किया है। इतने सालों में मैंने डायमंड पब्लिकेशंस/गृह लक्ष्मी, फर्स्ट...