Smallest Village of India: भारत एक ऐसा देश है जहां की आत्मा गांवों में बसती है। यहां की लगभग 70% आबादी ग्रामीण इलाकों में निवास करती है। इन गांवों के लोग कृषि, बागवानी और पशुपालन जैसे परंपरागत व्यवसायों पर निर्भर रहते हैं। गांव न सिर्फ आजीविका का माध्यम हैं, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत के जीवंत उदाहरण भी हैं। हर गांव अपनी अनूठी पहचान और रीति-रिवाज के साथ देश के विविध रंगों में योगदान देता है।
विश्व की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश होने के साथ-साथ भारत में गांवों की संख्या भी बेहद प्रभावशाली है। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 6 लाख 28 हजार 221 से अधिक गांव हैं। यह आंकड़ा भारत को ग्रामीण संरचना के मामले में भी विश्व पटल पर एक अलग स्थान दिलाता है। इन गांवों की विविधता ही भारत को अद्वितीय बनाती है।
भारत का सबसे छोटा गांव – ‘हा’

देश में लाखों गांवों के बीच एक ऐसा गांव भी है, जो अपनी सादगी और छोटे आकार के कारण विशेष पहचान रखता है। यह है भारत का सबसे छोटा गांव ‘हा’, जो पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में स्थित है। यह गांव कुरुंग कुमेय जिले के लॉन्गडिंग कोलिंग (पिप्सोरांग) सर्कल के अंतर्गत आता है। 2011 की जनगणना के अनुसार, इस गांव में केवल 58 परिवार रहते हैं और कुल जनसंख्या 289 है।
‘हा’ गांव न केवल आकार में छोटा है, बल्कि यह अपनी समृद्ध संस्कृति, शांत जीवनशैली और सामूहिक भावना के लिए भी जाना जाता है। यहां के लोग सीमित संसाधनों में भी एक-दूसरे के सहयोग से जीवन को सुखमय बनाते हैं। छोटे पर्व से लेकर बड़े उत्सव तक, सब कुछ सामूहिक रूप से मनाया जाता है, जो यहां के सामाजिक ताने-बाने को मज़बूत करता है।
सीमित संसाधनों में जीते हैं सादगीपूर्ण जीवन
‘हा’ गांव के लोग बेहद सीमित संसाधनों के साथ अपनी जीवनशैली को आगे बढ़ा रहे हैं। यहां का सामाजिक ढांचा पारंपरिक है, जिसमें गांव के निर्णय लेने की जिम्मेदारी एक निर्वाचित मुखिया (प्रधान) के पास होती है। मूलभूत सुविधाओं की कमी के बावजूद, गांववासी आत्मनिर्भर हैं और अपने पारंपरिक तौर-तरीकों पर गर्व करते हैं।
प्रकृति की गोद में बसी अनोखी दुनिया

यह गांव अपने आप में प्राकृतिक सुंदरता का एक अनोखा उदाहरण है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ों की छांव और शांत वातावरण इसे खास बनाते हैं। यहां के लोग कृषि और पशुपालन जैसे पारंपरिक कार्यों में लगे हुए हैं और अपनी रोज़ी-रोटी का साधन इन्हीं से प्राप्त करते हैं।
आपसी प्रेम और सामूहिकता की मिसाल
‘हा’ गांव में आपसी सहयोग और सामूहिक भावना देखने को मिलती है। यहां के लोग किसी भी कार्य को करने से पहले एक-दूसरे से सलाह-मशविरा करते हैं। सभी पर्व और त्यौहार मिलजुल कर मनाए जाते हैं, जिससे गांव में भाईचारा और अपनापन बना रहता है। एक-दूसरे से बातचीत और सहयोग की भावना यहां के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करती है।
बढ़ता विलेज टूरिज्म
आज के समय में विलेज टूरिज्म एक नया चलन बनता जा रहा है। न केवल भारतीय, बल्कि विदेशी पर्यटक भी अब गांवों की संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को करीब से जानने की इच्छा रखते हैं। ऐसे में ‘हा’ जैसे गांव, जहां शांति, प्रकृति और सांस्कृतिक समृद्धि एक साथ मिलती है, एक आदर्श पर्यटन स्थल बन सकते हैं।
