New Indian expressways connecting cities and boosting growth
Five highways redefining travel, trade, and urban prosperity

Summary : 2026 में भारत में कई नए एक्सप्रेसवे ऐसे बनकर उभरेंगे

ये एक्सप्रेसवे शहरों को जोड़े़गे, तेज़ी से पहुँच बढ़ाएँगे, रोजगार के द्वार खोलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देंगे।

2026 Indian Expressways Development: सड़कें केवल दूरी कम नहीं करतीं, वे समृद्धि, अवसर और जीवनशैली को गढ़ती हैं। 2026 में भारत में कई नए एक्सप्रेसवे ऐसे बनकर उभरेंगे जो सिर्फ़ कारों का मार्ग नहीं बल्कि किस्मत बदलने वाले कॉरिडोर बनेंगे। ये एक्सप्रेसवे शहरों को जोड़े़गे, तेज़ी से पहुँच बढ़ाएँगे, रोजगार के द्वार खोलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देंगे। आइए जानते हैं 2026 के पाँच ऐसे प्रमुख एक्सप्रेसवे जिनका प्रभाव लंबा और गहरा होगा।

New Indian expressways connecting cities and boosting growth
Five highways redefining travel, trade, and urban prosperity

यह कॉरिडोर न केवल राष्ट्रीय राजधानी से राजस्थान के सहारा क्षेत्र को जोड़ता है बल्कि दिल्ली–जयपुर पर्यटन गलियारा को भी और मज़बूत करता है। जयपुर और अजमेर के बीच यात्रा अब घंटों नहीं, बल्कि कम समय में पूरी होगी। इससे राजस्थान के छोटे शहरों में निवेश, होटल और रिटेल सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। कृषि उत्पादक जोन के लिए भी यह मार्ग बाजारों तक पहुँच आसान करेगा। युवा उद्यमी इससे अपने उत्पाद को बड़े शहरों तक आसानी से ले जा सकेंगे और पर्यटन को नया जीवन मिलेगा।

मुंबई से गोवा तक यह एक्सप्रेसवे न केवल छुट्टियों को आसान बनाएगा बल्कि लॉजिस्टिक्स और ट्रेड के मार्ग को भी तेज़ करेगा। सीज़न के समय भारी ट्रैफ़िक अब कम होगा और लॉजिस्टिक कंपनियाँ माल को जल्दी पहुँचाकर लागत घटा सकेंगी। गोवा के अंदरूनी हिस्सों में पर्यटन के नए रास्ते खुलेंगे. जैसे रेवाड़ी, वैदु, सव्हा और अरगोली जैसें पहले कम प्रसिद्ध स्थल अब एडवेंचर-टूरिज़्म और होमस्टे इकोनॉमी के केंद्र बन सकते हैं। इससे रियल एस्टेट, किराये, ख़ान-पान और स्थानीय शिल्प को भी बढ़ावा मिलेगा।

New Indian expressways connecting cities and boosting growth
Five highways redefining travel, trade, and urban prosperity

पूर्वोत्तर को जोड़ने वाला यह मार्ग कोलकाता से सिलीगुड़ी और आसपास के शहरों को तेज़ कनेक्टिविटी देगा। चावल, कागज़, चाय, जूता उद्योग और स्थानीय हंडलूम सेक्टर को राजधानी से जोड़कर एक्सपोर्ट/इम्पोर्ट में नई जल्दी आएगी। पर्यटन के लिहाज़ से यह मार्ग दार्जिलिंग, दौलताबाद, मौज़्दोरा जैसे इलाक़ों की पहुँच आसान करेगा। इससे रोजगार के नए अवसर बनेंगे और युवाओं के शहरों में पलायन की गति भी बदलेगी। यह सिर्फ़ सड़क नहीं बल्कि पूर्वोत्तर के सामाजिक- आर्थिक एकीकरण का आधार बनेगा।

तेलंगाना और कर्नाटक को तमिलनाडु से जोड़ने वाला यह कॉरिडोर आईटी, औद्योगिक पार्क और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को तेज़ करेगा। आईटी–हब से लेकर ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस तक इस एक्सप्रेसवे का प्रभाव व्यापक है। कहीं भी उत्पादन केंद्र स्थित हो, माल अब तेज़ी से पोर्ट और एयरफ़्रेट तक पहुँच सकेगा। इससे दक्षिण भारत के छोटे कस्बों में सप्लाई चेन बिज़नेस और लघु मध्यम उद्योगों को भी फायदा होगा। सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन के लिहाज़ से हैदराबाद, हुसैन सागर, मैसूर पैलेस और महाबलीपुरम का कनेक्शन भी मजबूत होगा।

Corridor empowering crafts, logistics, and local livelihoods
Corridor empowering crafts, logistics, and local livelihoods

गुजरात के अंदरूनी इलाक़ों को जोड़ने वाला यह मार्ग आर्थिक गलियारा बनकर उभरेगा। भुज के औद्योगिक इलाक़ों में माल ढुलाई तेज़ होगी और नैशनल पार्क के पर्यटन में भी वृद्धि होगी। हस्तशिल्प और बुनाई के कारीगरों के लिए यह मार्ग बाज़ार तक पहुँच आसान करेगा। आत्मनिर्भर व्यवसायों और छोटे निवेशकों को स्थानीय उत्पादन से बाहर तक पहुँचने का मार्ग मिलेगा। इसके अलावा, कृषि आपूर्ति श्रृंखला भी पहले की तुलना में बहुत तेज़ होगी।

ये पाँच एक्सप्रेसवे सिर्फ़ सड़कें नहीं, तरक्की की नई राहें हैं। 2026 में जब ये कॉरिडोर पूरी तरह काम करेंगे, तो न केवल यात्रा का समय घटेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार, कृषि फ़ायदे, पर्यटन और सामुदायिक विकास को गहरी गति मिलेगी। 

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...