Two people holding simple keypad mobile phones outdoors.
Now, people are acoiding smartphone's use and using simple keypad phones

Summary: हमेशा ऑनलाइन रहने से थक गए लोग, अब चुन रहे ऑफलाइन सुकून

डिजिटल मिनिमलिज्म का यह ट्रेंड सिखा रहा है कि असली सुकून हर वक्त ऑनलाइन रहने में नहीं, बल्कि अपने समय पर नियंत्रण रखने में है।

Trend of Dumbphones: क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपका स्मार्टफोन अब सिर्फ सुविधा का साधन नहीं रहा, बल्कि आपके समय और ध्यान का सबसे बड़ा उपभोक्ता बन गया है? सुबह उठते ही नोटिफिकेशन, दिनभर चैट, ई-मेल, रील्स और रात को सोने से पहले अंतहीन स्क्रॉलिंग, यह दिनचर्या अब सामान्य बन चुकी है। लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में लोग इस “हमेशा ऑनलाइन” जीवन से थककर एक अलग रास्ता चुन रहे हैं, डम्ब फोन, यानी साधारण कीपैड फोन की वापसी।

हाइपर-कनेक्टिविटी से थकान

Person using a smartphone outdoors, typing on the screen.
Excessive use of smartphone may affect brain’s thinking and creative

तकनीक ने जिंदगी आसान जरूर बनाई है, लेकिन लगातार जुड़े रहने का दबाव भी बढ़ाया है। हर कुछ मिनट में फोन चेक करने की आदत दिमाग को छोटे-छोटे इनाम (डोपामिन) देती है, जिससे ध्यान भटकने लगता है। विशेषज्ञ इसे “डिजिटल थकान” कहते हैं, ऐसी मानसिक स्थिति जिसमें व्यक्ति हमेशा व्यस्त लगता है, पर असल में कोई काम पूरा नहीं कर पाता। आज एक औसत व्यक्ति दिन में सैकड़ों बार स्क्रीन देखता है। इससे एकाग्रता कम होती है, नींद की गुणवत्ता घटती है, चिंता और चिड़चिड़ापन बढ़ता है और वास्तविक बातचीत कम होती जाती है। इसी के विरोध में उभरा है नया विचार डिजिटल मिनिमलिज्म।

डिजिटल मिनिमलिज्म क्या है?

डिजिटल मिनिमलिज्म का मतलब तकनीक छोड़ देना नहीं है, बल्कि तकनीक पर स्वयं का नियंत्रण रखना है। इस सोच के अनुसार हमें यह तय करना चाहिए कि कौन-सी तकनीक हमारे जीवन के लिए जरूरी है और कौन-सी सिर्फ समय खा रही है। यही कारण है कि कई लोग अब दो फोन रखने लगे हैं एक काम के लिए स्मार्टफोन और रोजमर्रा के लिए कीपैड फोन।

डम्ब फोन की वापसी

साधारण फोन का मतलब सीमित फीचर कॉल और मैसेज। न सोशल मीडिया, न लगातार नोटिफिकेशन, न स्क्रीन टाइम रिपोर्ट का अपराधबोध। जिन लोगों ने यह बदलाव अपनाया, उनके अनुभव काफी दिलचस्प हैं। कई छात्रों और प्रोफेशनल्स ने पाया कि सिर्फ नोटिफिकेशन हटाने से ज्यादा असर फोन बदलने से हुआ, क्योंकि ध्यान भटकाने वाला विकल्प ही खत्म हो गया।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि लगातार जानकारी मिलने से दिमाग कभी आराम की स्थिति में नहीं जा पाता। जब व्यक्ति स्क्रीन से दूर होता है, तो दिमाग “डीप थिंकिंग” मोड में जाता है, वही स्थिति जिसमें रचनात्मक विचार और समस्या-समाधान की क्षमता बढ़ती है। डम्ब फोन इसीलिए लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि वे मजबूरी में डिजिटल डिटॉक्स कराते हैं।

ये मिलते हैं फायदे

Woman reading a book in bed under a bedside lamp.
Prefer reading a book before going to bed instead of using smaphonert
  • परिवार से बातचीत बढ़ती है और आपसी रिश्तों में सुधार होता है  
  • नींद बेहतर होगी, क्योंकि रात में सोने से पहले स्क्रीन देखने से नींद पैटर्न ख़राब होता है।
  • ज्यादा फ़ोन देखने से फोकस की समस्या बढ़ती है। स्मार्ट फ़ोन की जगह साधारण फ़ोन का इस्तेमाल करने से एकाग्रता बढ़ती है।
  • स्मार्ट फ़ोन से दूर रहने से लोग किताब पढ़ने के लिए समय निकाल पाते हैं।

तो, आप भी स्मार्ट फ़ोन की जगह साधारण फ़ोन का इस्तेमाल करके देखें, शुरू में कम सप्ताह में एक दिन या कुछ घंटे स्मार्टफोन से दूरी बनाकर देखें। संभव हो तो उस दौरान साधारण फोन इस्तेमाल करें या केवल कॉल की सुविधा रखें। याद रखें आज तरक्की हर वक्त ऑनलाइन रहने में नहीं, बल्कि यह तय करने में है कि कब ऑनलाइन रहना है और कब नहीं।

अभिलाषा सक्सेना चक्रवर्ती पिछले 15 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में दक्षता रखने वाली अभिलाषा ने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान टाइम्स, भोपाल से की थी। डीएनए, नईदुनिया, फर्स्ट इंडिया,...