Aai-maai Aai-maai
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Funny Stories for Kids: एक दिन की बात, निक्का घर की छत पर बैठा मम्मी से बातें कर रहा था । शाम का अँधेरा घिर आया था । पर निक्का की बातें खत्म होने में ही नहीं आती थीं । इस बीच मम्मी को कोई काम याद आ गया । वे उठकर नीचे जाने लगीं तो निक्का बोला, “मम्मी , मम्मी , आप काम बाद में करना । कि तने दिन हो गए, आपने मुझे कोई कहानी नहीं सुनाई । आज तो मैं जरूर सुनूंगा कोई नई कहानी ।”

मम्मी हँसकर बोलीं, “अरे बुद्धू, पापा तुझे इतनी अच्छी -अच्छी कहानियों की कि ताबें लाकर देते हैं । उन्हें क्यों नहीं पढ़ता ?” निक्का बोला, “पढ़ता तो हूँ मम्मी , पर आप जो कहानी सुनाती हो, वो मुझे
ज़्यादा अच्छी लगती है ।…आज सुनाओ न कोई कहानी, मम्मी !”
इस पर मम्मी सोच में पड़ गईं । फि र बोलीं, “चल निक्का , आज मैं तुझे अलबेलापुर की ही कहानी सुनाती हूँ, जो मुझे तेरी नानी ने सुनाई थी । मुझे इतनी अच्छी लगी कि बचपन में मैं माँ से बार-बार जिद करके यही कहानी सुनती थी । कहानी दो सहेली चुहि यों की है । सुनेगा न निक्का ?”

“हाँ-हाँ मम्मी , सुनाओ । जल्दी सुनाओ यही कहानी ।” निक्का अधीर होकर बोला । मम्मी थोड़ी देर होंठों में ही गुनसुन-गुनसुन करती रहीं । फिर एकाएक वे सुर में आ गईं, और शुरू हो गई पुराने जमाने के अलबेलापुर की यह कहानी ।…

दो चुहियाँ थीं । पक्की सहेलियाँ । उनमें एक जादूटोला गाँव के कि सान भोला भाई के खेत में रहती थी, दूसरी किसी तरह अलबेलापुर के राजा भुल्लू शाह के महल में जा पहुँची थी । दोनों मजे में थीं, पर उन्हें एक-दूसरे की बहुत याद आती थी । वे महीने में एक बार जरूर आपस में मि ल लेती थीं । एक-दूसरे को अपना सुख-दुख और हाल-चाल बताती थीं ।

महल वाली चुहिया सोचती थी कि मेरे जैसे ठाट तो भला कि सके होंगे ? खेत वाली चुहिया को क्या पता कि राजमहल के सुख क्या होते हैं ! उसे खेत वाली चुहिया पर बड़ी दया आती । इसीलि ए अकसर खेत वाली चुहिया से कहती थी, “चल ना सहेली, मेरे साथ महल में । तू यहाँ झाड़-झंखाड़ में क्यों पड़ी है ? वहाँ बड़े ठाट हैं ।”
इस पर खेत वाली चुहिया कहती, “अरी सहेली महलों वाली, खेत वाली चुहिया का सुख तू नहीं पा सकती । तू कि तने ही ऊँचे-ऊँचे महल-अटारियों में रह ले, पर खेत की खुली हवा में रहने का जो सुख है, उसका तो कोई मुकाबला ही नहीं । कुछ दिन मेरे पास आकर रह, तो तू सारे महल-दुमहले भूल जाएगी ।
खुद ही कहेगी कि अरी सहेली, जीवन का असली सुख तो गाँवों में है ।” अच्छी बात यह थी कि अलग-अलग रहते हुए भी, उनका प्यार कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा था । दोनों एक-दूसरे पर सच्ची -मुच्ची जान छिड़कती थीं ।

फिर एक दिन की बात । खेत वाली चुहिया पर बड़ा संकट आ गया । वह सुबह-सुबह जरा घूमने-टहलने के लिए निकली थी, ताकि खेतों की ठंडी-ठंडी हवा खा ले । तभी अचानक पास से गुजरती एक बैलगाड़ी का पहिया उस पर आ गया । खेत वाली चुहिया बिलबिलाकर रह गई । पूरा शरीर जैसे सुन्न हो गया हो । उसे लगने लगा, अब वह बच नहीं पाएगी ।

इस हाल में भी खेत वाली चुहिया सोच रही थी, आखिर कैसे महल वाली चुहिया तक यह संदेशा पहुँचे, ताकि उसे कम से कम मेरे मरने का तो पता चल ही जाए । तभी उसे अलबेलापुर के कुछ सैनिकों के घोड़ों की टापें सुनाई दीं ।

चुहिया जोर-जोर से पुकारने लगी, ‘आँईं-माईं आँईं-माईं…! सुन लो संदेसा मेरा, आँईं-माईं आँईं-माईं ।’
सुनकर सैनिक चौंके । वे वहीं रुक गए और बिटर-बिटर इधर-उधर देखने लगे कि यह अजीब आवाज आई कहाँ से ? अब तो खेत वाली चुहिया और भी जोर-जोर से गाने लगी –

आँईं-माईं आँईं-माईं, आँईं-माईं

सुनो भाई आँईं-माईं, आँईं-माईं, आँईं-माईं,

महलों वाली मेरी प्यारी सहेली से जाकर के कहना,

खेत वाली चुहिया, मर गई, मर गई, मर गई !

सैनिक डरे । सोचने लगे, ‘अरे, यहाँ कोई भूत तो नहीं है ? कितनी अजीब आवाज है ! पता नहीं, हमसे क्या कहना चाहती है ?’
रास्ते भर वे यही बातें करते करते जा रहे थे । अलबेलापुर की राजधानी में राजा भुल्लू शाह के पास पहुँचे, तब भी उनके चेहरों पर बड़ी घबराहट थी । सोच रहे थे, पता नहीं क्या होने वाला है ! अच्छा रहा कि हम आ गए, वरना क्या पता, वह भूत हमें पकड़ ही लेता ।
सैनिकों की यह हालत देखकर राजा ने पूछा, “क्या बात है, तुम लोग इतने घबराए हुए से क्यों लग रहे हो ? कहीं कोई दुश्मन की फौज तो नहीं मिल गई रास्ते में…?”

तभी एक सैनिक ने डरते-डरते कहा, “अरे महाराज, दुश्मन की फौज मिलती, तो भी गनीमत थी । हमारे साथ तो बुरा हुआ…उससे भी बुरा हुआ ।” “मगर हुआ क्या , कुछ बताओ तो सही ।” राजा भुल्लू शाह ने पूछा । इस पर एक बूढ़े सैनिक ने बताया, “महाराज, रास्ते में हमें एक भूत मि ला । बल्कि भूत क्या , महा भूत । वह गाना गा रहा था, बड़ी ही अजीब नकसुरी आवाज में…!”

“गाना !…भूत का गाना, और वह भी नकसुरी आवाज में !” राजा भुल्लू शाह को बड़ी हैरानी हुई । उसने पूछा, “जरा बताओ तो, वह कैसा गाना गा रहा था…?”
सैनिक बोला, “महाराज, ठीक-ठीक तो सुनाई नहीं पड़ा । क्योंकि वह भूत जरा धीमी आवाज में गा रहा था । पर महाराज, वह कुछ ऐसा कह रहा था :–
आँईं-माईं आँईं-माईं,
आँईं-माईं आँईं-माईं/महलों वाली मेरी प्यारी सहेली से जाकर के कहना/ खेत वाली चुहिया मर गई, मर गई, मर गई… !”

अभी सैनिक की बात पूरी हुई भी न थी कि लगा, वहाँ भूचाल आ गया । राजा के सिंहासन के नीचे से किंकिंआती हुई-सी एक तेज आवाज सुनाई दी –

आँईं-माईं आँईं-माईं,
, आँईं-माईं हाय, मेरी प्यारी सहेली खेत वाली मर गई, मर गई, मर गई…!

इस पर राजा भुल्लू शाह बुरी तरह चौंके । बोले, “भई, तुम भूत की बात कर रहे थे, पर भूत तो खेत में ही नहीं, यहाँ भी है ।” तभी चुहिया झट राजा के पलंग के नीचे से निकलकर आई । बड़े दर्द भरे
स्वर में बोली –

आँईं-माईं आँईं-माईं,
, आँईं-माईं आँईं-माईं,
राजा जी ! मैं भूत नहीं, चुहि या हूँ महलों की ।
प्यारी सहेली मेरी खेत वाली
मर गई, मर गई, मर गई… !

राजा भुल्लू शाह ने चुहि या को देखा तो हैरानी से पूछा, “अरी चुहिया, तू ! तू यहाँ क्या कर रही है ?”
इस पर चुहिया ने पूरी बात बता दी । सुनकर राजा भुल्लू शाह को भी बड़ा दुखा हुआ । उसने शाही हकीम मौलाबक्श को महलों वाली चुहिया के साथ-साथ जादूटोला गाँव में भेज दिया । मौलाबक्श ने खूब अच्छी तरह इलाज किया । थोड़े ही दिनों में खेत वाली चुहिया बिल्कुल ठीक-ठाक हो गई ।
उसने महलों वाली अपनी सहेली चुहिया के साथ ही रख लि या । पर जो सैनिक आए थे, उन्हें तीसरे दिन ही यह कहते हुए लौटा दिया –

आँईं-माईं आँईं-माईं,
राजा जी से कहना
खेत वाली चुहिया का धन्यवाद, धन्यवाद !

उन्हीं के साथ-साथ लंबी दाढ़ी वाले हकीम मौलाबक्श जी भी लौट आए । दोनों चुहियों ने उनके कंधों पर नाच-नाचकर उन्हें धन्यवाद दिया ।

हकीम साहब ने लौटकर राजा भुल्लू शाह को दो सहेली चुहि यों का यह अनोखा कि स्सा सुनाया तो उनके चहरे पर एक मीठी-सी मुसकान आ गई । वोले, “वाह, सहेलि याँ हों तो ऐसी !”
*
कहानी पूरी करके मम्मी ने पूछा, “क्यों निक्का , कैसी लगी कहानी ?” निक्का बोला, “क्या कहूँ मम्मी ?…मास्टरपीस । एकदम मास्टरपीस ! तभी तो मैं कह रहा था कि मम्मी , आपकी कहानियाँ एकदम अनोखी होती हैं । एक बार सुन लो, तो कभी भूलती ही नहीं ।” सुनकर मम्मी मुसकराने लगीं ।

ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंBachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ