What about Nikka and Kunkun
What about Nikka and Kunkun

Funny Stories for Kids: उस दिन निक्का रेलगाड़ी में मम्मी -पापा के साथ यात्रा कर रहा था । उन्हें देहरादून वाली मौसी जी के यहाँ जाना था । मौसी जी ने निक्का के मम्मी – पापा से कहा था, “निक्का को जरूर लाना । उसे देखे बहुत दिन हो गए ।” निक्का के मम्मी -पापा सामने की सीट पर बैठे अंकल-आंटी से बात कर
रहे थे । उन्हें भी देहरादून ही जाना था । तभी अचानक पापा का ध्यान गया, “निक्का !…अरे, निक्का नजर नहीं आ रहा ?” “अरे, कहाँ गायब हो गया इतनी सी देर में ?” मम्मी भी अचकचाईं । “अभी तो खि ड़की के पास बैठा बाहर के दृश्य देख रहा था । कह रहा था,
रेलगाड़ी की यात्रा में उसे खूब मजा आ रहा है ।” पापा बोले । निक्का की मम्मी घबरा गईं, “कहीं खेल-खेल में नीचे न गिर गया हो ! वैसे भी इस लड़के को कुछ होश तो रहता नहीं है ।”
अब तो पापा भी परेशान हो गए । बोले, “मैं जाकर देखता हूँ । रेलगाड़ी के सब डब्बे एक-दूसरे से जुड़े हैं । हो सकता है कि वह पास के कि सी डब्बे में चला गया हो ।”
पापा ने अगल-बगल के दो-एक कंपार्टमेंट भी देख लि ए । पर निक्का कहीं नजर नहीं आया । उनके माथे पर पसीना छलछला आया । सोच रहे थे, ‘क्या रेलवे पुलिस को इनफॉर्म करूँ ? यह निक्का भी अजब है । पता नहीं कहाँ चला गया ?…अब कहाँ-कहाँ ढ़ूँढ़ता फिरूँ उसे ?’ इतने में दूर से निक्का आता दिखाई दिया । वह बहुत खुश नजर आ रहा था, जैसे कुछ बताना चाह रहा हो ।
“कहाँ चले गए थे निक्का ?” पापा ने कुछ प्या र, कुछ गुस्से से कहा । तब पता चला पूरा किस्सा कि रेलगाड़ी में एक छोटा सा पि ल्ला निक्का को दिखाई दे गया । बस, निक्का को तो मजा आ गया । वह उसके पीछे-पीछे चल पड़ा । चलते-चलते अगले डब्बे में जा पहुँचा । वहाँ एक बच्चा बैठा था
निक्का की ही उम्र का—कुक्कू । कुक्कू का ही वह पि ल्ला था । उस पि ल्ले का
नाम था– कुनकुन । “अहा-हा पापा, क्या मस्त पि ल्ला है कुनकुन ! बड़ा नटखट और शैतानों का शैतान ! पर पापा बड़ा क्यूट है कुनकुन । और कुक्कू…! कुक्कू भी बड़ा अच्छा है पापा । मेरी तो उससे दोस्ती हो गई । कह रहा था, कुनकुन तुम्हें इतना पसंद है तो तुम्हीं ले लो निक्का !”
निक्का पापा को पूरा कि स्सा सुना रहा था । पर बातचीत में जैसे ही उसने
कुनकुन का नाम लि या, शरारती कुनकुन को दूर से ही आवाज सुनाई दे गई । वह झट दौड़ा -दौड़ा आ गया । और निक्का की टाँगों से लि पटकर, ‘कूँ-कूँ ’ करके अपना लाड़ जताने लगा । ऐसा लग रहा था, जैसे वह छलाँग मारकर निक्का के कंधे पर बैठ जाना चाहता हो ।

देखकर निक्का ने झट उसे उठाया और छाती से चि पका लिया । कुनकुन अब भी प्यार से कूँ-कूँ किए जा रहा था, जैसे निक्का से कह रहा हो—“तमु कितने अच्छे हो निक्का ! तुम तो मेरे कोई पुराने दोस्त लग रहे हो ।” निक्का ने कुनकुन की पीठ पर हाथ फेरा और चहकता हुआ बोला, “पापा,
देखो…यही है कु नकु न ! कितना संदुर है पापा !” कुनकुन वाकई इतना प्या रा और गोल-मुटल्ला था कि देखते ही मम्मी ने झट उसे गोद में उठा लिया और पुचकारने लगीं । कुनकुन को इतना अच्छा लग रहा था कि वह धीमी-धीमी कूँ-कूँ करके अपनी ख़ुशी प्रकट कर रहा था । लग रहा था, अब वह कहीं और नहीं जाना चाहता । पापा ने भी प्या र से उसके सिर पर हाथ फेरा । उनका गुस्सा गायब हो चुका था ।
थोड़ी देर में निक्का ने पुचकारा तो कुनकुन झट कूदकर नीचे आया और फिर पहले की तरह निक्का के पैरों से लि पटने लगा । गाड़ी में ज़्यादा भीड़ नहीं थी । इसलि ए निक्का तेजी से इधर-उधर घूमता हुआ उसे दौड़ा ता रहा । आसपास बैठे लोग भी नटखट कुनकुन की शरारतों का खूब मजा ले रहे थे । सामने की सीट पर बैठी आंटी बोलीं, “लगता है, कुनकुन और निक्का की बड़ी पुरानी दोस्ती है ।”

यों जितनी देर कु नकु न निक्का के पास रहा, पँछू हिला-हिलाकर उसके आसपास ही नाचता रहा । थोड़ी देर बाद कुक्कू वहाँ आया, तो कुनकुन उसके पैरों से लि पटकर कूँ- कूँ करने लगा । पर वह बीच-बीच में निक्का की ओर भी देख लेता, जैसे कहना चाहता हो, ‘जैसे तुम अच्छे हो, कुक्कू, ऐसे ही निक्का भी बहुत अच्छा है । तुम लोग एक-दूसरे के दोस्त क्यों नहीं बन जाते ?’ कुनकुन की बात कुक्कू ने भी समझ ली और निक्का ने भी । दोनों में झट दोस्ती हो गई । उन्होंने एक-दूसरे को अपने पते और फोन नंबर लिखवा दिए ।
कुक्कू का घर देहरादून में ही था । पटेल नगर में । उसने हँसकर निक्का से कहा, “तुम लोग कुछ दिन तो देहरादून रहोगे ही न । मैं तुमसे मिलने आऊँगा ।” फिर कुक्कू ने पुचकारा तो कुनकुन उछलता-कूदता हुआ उसके साथ चला गया । पर वह मुड़-मुड़कर पीछे निक्का को देख रहा था । निक्का और उसके मम्मी -पापा देर तक उसके बारे में ही बातें करते रहे । भला कुनकुन का
नटखटपन वे भूल भी कैसे सकते थे !

ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंBachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ