Papa's kurta, Mummy's sari
Papa's kurta, Mummy's sari

Funny Stories for Kids: पापा निक्का के लिए ड्राइंग की नई काॅपी और कलर लेकर आए । बस, उसी दिन से निक्का ढेर सारे चित्र बनाने में लीन हो गया । उसने गेंदा, कनेर, गुलाब, गुलदाउदी और तरह-तरह के फूलों के चित्र बनाए । जंबो सरकस, टॉय ट्रेन और दूसरे मजेदार खि लौनों के चित्र बनाए, अपनी पसंद के झूलों के भी चित्र बनाए । आसमान के तारों और रात का चित्र बनाया । सूरज और सुबह की लाली का भी । रंग-बिरंगी संदुर तितलियों का चित्र तो कमाल का ही था ।

निक्का ने मम्मी -पापा, दीदी-भैया सबको अपने चित्र दिखाए । अपने दोस्तों पिंटू सर्वटे और नीलू महाने को भी । सबने खूब तारीफ की । मम्मी ने तो उसे गोद में उठाकर चूम लिया । पिंटू सर्वटे को निक्का का बनाया ‘जंबो सरकस’ पसंद आया तो नीलू महाने को गुलदाउदी के हँसते हुए फूल ।
पड़ो स की छुटकी बोली, “अरे बुद्धू, मम्मी -पापा के चित्र तो तूने बनाए ही नहीं । सबसे पहले तो वही बनाने थे, ताकि उनका आशीर्वाद मिले ।”
निक्का ने हँसते हुए अपने गाल पर चपत लगाई । बोला, “हाँ, यह तो बड़ी गलती हो गई ! तूने बिल्कुल ठीक कहा छुटकी । तू सच्ची , मेरी बेस्ट फ्रेंड है ।”
“देखा…!” छुटकी पिंटू और नीलू की ओर देखते हुए जोर से हँस दी । इस पर निक्का समेत सभी हँसने लगे ।
थोड़ी देर बाद निक्का के दोस्त चले गए । पर निक्का को चैन कहाँ था ! वह उसी समय मम्मी -पापा का चित्र बनाने बैठ गया । पहले उसने पेंसिल से संदुर-संदुर चित्र बनाए, फिर उनमें रंग भरने लगा ।
शाम तक पापा का चित्र पूरा हो गया । उनका नीला कुरता खासा जँच रहा था । फिर निक्का ने उनकी हलकी-हलकी मूंछें भी बना दीं । पापा की नाक के पास छोटा सा काला मस्सा था । निक्का वह भी नहीं भूला । उनके सिर के बाल कुछ-कुछ उठे हुए, बेतरतीब दिख रहे थे । सच, ऐसे ही तो पापा हैं । निक्का ने चित्र में भी सब कुछ वैसा ही बनाया ।

चित्र बनाने के बाद निक्का ने उस पर एक नजर डाली, तो उसे कुछ कमी लगी । उसने एक बार देखा, दो बार । फिर तीसरी बार तो बहुत ही ध्यान से देखा । उसे अपनी कमी पता चल गई ।…ओह, पापा का अखबार ! जब तक पापा रोज घंटा भर अखबार न पढ़ें, उन्हें चैन नहीं पड़ता । तो कुछ तो करना चाहिए न !…

उसने जल्दी से एक अखबार बनाया और उसे पापा के हाथों में पकड़ा दिया । अखबार पढ़ते हुए पापा वाकई जँच रहे थे ।
निक्का ने फिर से उस पर नजर डाली, और खुशी-खुशी सिर हिला दिया । फिर अगले दिन वह मम्मी का चित्र पूरा करने में जुट गया । कोई दो-तीन घंटे बाद मम्मी का चित्र भी पूरा हो गया । मम्मी अकसर घर पर पीली वाली साड़ी पहनती हैं । उस पर छोटे-छोटे लाल, हरे, नीले फूल काफी जँचते हैं ।
साड़ी की किनारी गुलाबी रंग की है । निक्का ने चित्र में सब कुछ हूबहू उतार दिया । मम्मी की नाक की सोने की लौंग भी, जिससे उनके होंठ हर समय कुछ हँसते हुए से लगते थे ।

घर का काम करते हुए मम्मी के बाल अकसर माथे पर आ जाते थे । मम्मी उन्हें हटाना भूलकर अकसर काम में डूबी रहती थीं । निक्का को लगा, चित्र में मम्मी का यही रूप आना चाहि ए । कुछ सोचकर हलके हाथों से उसने मम्मी के माथे पर कुछ बेतरतीब बालों के गुच्छे झलका दिए । और कहीं-कहीं माथे पर पसीने की दो-एक बूँदें भी ।
अब उसने मम्मी और पापा के चित्रों को पास रखकर देखा, तो उसे वाकई हँसी आ गई । बात कुछ बन गई थी ।

निक्का उसी समय दौड़ा -दौड़ा मम्मी -पापा के पास गया । दोनों लॉन में बैठे चाय पी रहे थे । साथ ही कुछ घर-परिवार की बातें कर
रहे थे । निक्का बोला, “देखो पापा, देखो मम्मी , आपके लि ए एक संदुर गिफ्ट ।”
सुनकर मम्मी -पापा दोनों मुसकराए । मम्मी बोलीं, “जरा दिखा तो निक्का ।
क्या गिफ्ट लाया है तू ?”
सुनते ही निक्का ने अपनी ड्राइंग की काॅपी खोलकर पहले पापा वाला चित्र दिखाया, फिर मम्मी वाला ।
मम्मी -पापा दोनों ने चित्र देखे तो बस, देखते ही रह गए । उन्होंने निक्का के चित्रों की खूब तारीफ की । तब तक पास के कमरे में बैठे नंदू भैया और मीनू दीदी भी दौड़कर आए । उन्होंने भी निक्का के चित्रों की प्रशंसा की । नंदू भैया बोले, “निक्का तो पूरा कलाकार बन गया ।”

मीनू दीदी हँसीं । बोलीं, “कोई छोटा-मोटा कलाकार नहीं । बल्कि वाह, उस्ताद !” पापा हँसकर बोले, “वाकई दोनों चित्र बड़े नायाब बने हैं । पर हाँ, मम्मी वाला चित्र कुछ ज़्यादा खिल रहा है ।”
इस पर निक्का हँसा । बोला, “असल में पापा, बात यह है कि मम्मी की साड़ी कई रंगों वाली है । आप भी सतरंगा कुरता पहन लीजिए । फिर देखिए, कैसे खिलता है आपका चित्र !”
निक्का की बात सुनकर मम्मी जोर से हँस पड़ीं, पापा भी हँसे । बोले, “नहीं-नहीं, मेरा तो चित्र ऐसे ही ठीक है !” नंदू भैया ने उसी समय प्यार से निक्का की पीठ पर धौल लगा दिया । फिर हँसते हुए बोले, “ठीक कहा निक्का उस्ताद !” अब तो निक्का वाकई पास हो गया था । उसकी ड्राइंग काॅपी अब और भी नए-निराले चित्रों से भरने लगी ।

ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंBachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ