Funny Stories for Kids: मम्मी ने निक्का को ड्राइंग की नई वाली, खूब बढ़िया काॅपी लाकर दी और संदुर-संदुर कै मल के रंग । निक्का ने देखा तो उसकी आँखों में चमक आ गई । खुश होकर बोला, “वाह-वाह मम्मी ! मैं इस पर ढेरों चित्र बनाऊँगा । ढेर-ढेर जोकर, मोर, हाथी और शेर । बड़े वाले रंग-बिरंगे तोते भी,
जो चिड़ियाघर में देखे थे । और हाँ, खबू उजली, संदुर-संदुर बतखें भी ।”
मम्मी हँसकर बोलीं, “हाँ-हाँ, बनाना निक्का । खूब सारे चित्र बनाना । अब तो तू ड्राइंग में पूरा उस्ताद हो गया है न !”
निक्का बोला, “मम्मी , कभी-कभी मेरा दिल करता है कि मैं इतने चित्र बनाऊँ, इतने चित्र कि पूरी धरती, पूरा आकाश भर जाए !”
“अच्छा , मेरा लाडला बेटा !” कहकर मम्मी खूब जोर से हँस पड़ीं । उनकी आँखों में निक्का के लिए ढेर सारा प्यार था । निक्का धुन का पक्का है । यह बात उन्हें अच्छी लगती है । और सचमुच ड्राइंग की काॅपी हाथ में आते ही निक्का के सपनों को पंख लग गए । अब वह जैसे धरती पर नहीं, आसमान में उड़ रहा था । नई-नई कल्पनाएँ । नए-नए रंगों और ताजगी से भरे चित्र । हर चित्र में कोई अलग सी
बात । जो कुछ उसके मन में आता, उसे वह फौरन चित्रों में ढाल देता । अब वह कभी सपने में देखे हि रन का चित्र बनाता । कभी सर्कस में देखे भालू का । एक से एक बढ़ि या जोकरों के चित्र उसने बनाए । ऐसे कि देखने वाला हँसते-हँसते लोटपोट हो जाए । उसने अपने दोस्तों के भी चित्र बनाए ।
अपनी फुलवारी में खि ले फूलों के भी । गेंदे, गुलाब के फूलों के भी । यहाँ तक कि अपने प्यारे दोस्त शेरू का भी उसने बड़ा जोरदार चित्र बनाया, तो पँछू हिलाता हुआ अकसर उसके पास ही बैठा रहता था । उसका हर चित्र लाजवाब होता ।
मम्मी देखतीं तो हैरान होतीं । सोचतीं, ‘छोटा सा निक्का , लेकिन इसके मन की उड़ान कि तनी ऊँची है । यही मन की उड़ान तो इसके चि त्रों में है । इसीलिए वे इतने नए-निराले लगते हैं । एकदम ताजगी भरे ।’
पर निक्का में एक बुरी आदत थी । चित्र पूरा होते ही वह पन्ना काॅपी से फाड़ता और झट दोस्तों को दिखाने के लिए भाग खड़ा होता । फिर वह पन्ना पता नहीं, कहाँ छूट जाता ।
उसने ऐसे ही ढेरों चित्र बनाए और बना-बनाकर गुम कर दिए । उसकी ड्राइंग की काॅपी में बस एक आखिरी पन्ना बचा था । उस पर चित्र बनाते हुए निक्का को अपने पुराने चि त्रों की बड़ी याद आती, पर उसे तो पता ही नहीं था कि वे चित्र उसने कहाँ रख दिए !
‘चलो, आखिरी पन्ने पर अब इसका भी चित्र बनाता हूँ ।’ निक्का ने सोचा, ‘इस बार मैं अपना ही चित्र बनाऊँगा । रोते हुए निक्का का चित्र । मैं बहुत दुखी हूँ न ! देखता हूँ, मेरा चित्र देखकर लोग दुखी होते हैं कि नहीं ?’
और सचमुच निक्का अपना ही चित्र बनाने लगा । बहुत ही उदास और दुखी निक्का का चित्र , जिसकी आँखों से टप-टप आँसू बह रहे थे ।
निक्का का चित्र पूरा होने ही वाला था कि इतने में बड़े जोर की हवा आई । निक्का ने कसकर अपना चित्र पकड़ लिया, कहीं वह हवा में उड़ न जाए । पर आश्चर्य ! हवा ने उसके चित्र को नहीं छेड़ा । उलटे हवा के साथ उसके खोए हुए सारे चित्र उड़-उड़कर वापस आते गए । शरारती परिंदों की तरह ।
देखकर निक्का खुशी से नाच उठा । उसने उन चित्रों को बड़े प्यार से सँभाला । फिर एक फाइल में करीने से लगाकर धीरे से पुचकारा । आखिर ये चित्र ही तो उसकी सबसे बड़ी पूँजी थे । सबसे बड़ा खजाना ।
निक्का हैरान था, जो बात उसने सोची भी नहीं थी, वह कैसे हो गई ! इस समय उसका मन इतना हलका था, जैसे हवा में उड़ रहा हो ।
फिर उसे अपने उस चित्र की याद आई, जो वह अभी-अभी बना रहा था । उस चित्र में निक्का के गालों पर अब भी ताजे-ताजे आँसू थे । निक्का ने सोचा, ‘अब इसे खुश भी करना चाहिए ।’ लि हाजा निक्का ने ब्रश उठाया, झट उसके होंठों पर हँसी बिखेर दी ।
अब तो बड़ा अजीब चित्र बन गया । गालों पर आँसू, होंठों पर हँसी । निक्का ने देखा, तो खुद ही हैरान रह गया ।
उसने वह चित्र ले जाकर मम्मी को दिखाया, पापा को दिखाया । नंदू भैया और मीनू दीदी को दिखाया । दोस्तों को भी दिखाया । सब कहते, “अरे निक्का , यह तो बड़ा अनोखा चित्र है । ऐसा चित्र हमने कभी देखा ही नहीं कि गाल पर आँसू, होंठों पर हँसी !”
निक्का कहता, “इसमें एक राज की बात है । वह कहानी फिर कभी सुनाऊँगा !”
“कौन सी कहानी…?” सबने हैरान होकर पूछा ।
“सुनाऊँगा…कभी फिर सुनाऊँगा । हालाँकि कहानी बड़ी मजेदार है !” कहकर निक्का हँस पड़ा ।
और उसने उस चित्र को सँभालकर रख लि या । वही जानता था कि यह चित्र उसके लिए सचमुच कि तना बेशकीमती है ।
ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Bachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ
