Short Stories in Hindi: आज मैं तन्हा हूँ या तन्हा महसूस कर रही हूँ! तन्हा होने और अकेले होने में फ़र्क़ है । अकेलापन काटता नहीं है, तन्हाई काटती है। जब हम अकेले होते हैं तब हमारे साथ वो सब होते हैं जो होते तो हमारे साथ हैं पर बस हमसे दूर होते हैं लेकिन हम तन्हा तब होते हैं जब हमारे अपने हमसे दूर नहीं अलग होते हैं और वे हमारी ज़रूरत अपने जीवन में महसूस नहीं कर रहे होते हैं और करते भी हैं तो सिर्फ़ स्वार्थ के लिए।
हम एक ही जगह पर बहुत सारे लोगों के बीच भी तन्हा हो सकते हैं और अकेले हो कर भी तन्हा नहीं हो सकते । “ये तन्हाई बड़ी कष्टदायक होती है और मैं इसी तन्हाई को झेल रही हूँ, भुगत रही हूँ क्योंकि मेरे अपने मुझे छोड़ कर जा चुके हैं । उनके स्वार्थ मुझसे सिद्ध हो चुके हैं और अब उन्हें मेरी ज़रूरत नहीं है ।”
रोहिणी ख़यालों में गुम थी कि डोरबेल बजती है……उसकी फेवरेट रिंगटोन चिड़ियों के कलरव वाली बैल…..चीं चीं चीं । “इस समय कौन आ गया….खीझती हुई रोहिणी दरवाज़ा खोलती है…….”हैप्पी बर्थडे !” शोर से घर भर जाता है । ऑफिस के उसके सारे कलीगस घर में घुस आते हैं। अरे….बड़ा सा बुके लिए साहिल भी है जिससे उसकी आजकल अनबन चल रही थी । “हैप्पी बर्थडे……!”साहिल उसकी आँखों में आँखें डाल कर कहता है….!”I’m sorry Rohini अब मैं कभी तुम्हारा दिल नहीं दुखाऊँगा ।
तुम्हें नहीं मालूम मैं कैसे इस तन्हाई को बर्दाश्त कर रहा था इन दिनों ।” रोहिणी कुछ नहीं कहती । तन्हाई कहीं छू मंतर हो गई थी और अब वहाँ गूँज रहे थे हँसी और ठहाके और ख़ुशियाँ ।
तन्हाई-गृहलक्ष्मी की कहानियां
