Summary: फिर लौटी मुस्कान: पोस्टपार्टम डिप्रेशन से बाहर निकलने की प्रेरक कहानी
रीमा पोस्टपार्टम डिप्रेशन से जूझती है और अपने बच्चे से जुड़ाव महसूस नहीं कर पाती। पति आदित्य के प्यार और डॉक्टर की मदद से वह धीरे-धीरे अपनी खुशियों और जीवन की मुस्कान को वापस पाती है।
Hindi Short Story: रीमा हमेशा से हंसमुख और ज़िंदादिल लड़की थी। शादी के बाद उसकी दुनिया और भी खूबसूरत हो गई थी। जब उसने अपनी पहली संतान को जन्म दिया, तो सबको लगा कि अब उसकी जिंदगी पूरी हो गई है। परिवार, दोस्त, रिश्तेदार हर कोई कह रहा था, रीमा तो अब अपने आपको सबसे ज्यादा खुशकिस्मत मान रही होगी । लेकिन असलियत कुछ और ही थी। बच्चे के जन्म के बाद से रीमा का चेहरा जैसे मुस्कान भूल चुका था। वह घंटों खिड़की से बाहर देखती रहती। बच्चे के रोने की आवाज़ उसे चिढ़ा देती, जबकि एक मां से उम्मीद की जाती है कि वह अपने बच्चे की एक आह सुनते ही उसे सबसे पहले दौड़कर गले लगाएगी।
रीमा खुद को दोष देती और सोचती रहती , क्या मैं बुरी मां हूँ? क्यों मुझे अपने बच्चे से वही अपनापन नहीं लग रहा जो औरों को लगता है? दिन-ब-दिन उसके मन पर बोझ बढ़ता जा रहा था। रात को सोते हुए उसे डर सताता कहीं मैं अपने बच्चे का ख्याल सही से न रख पायी तो क्या होगा।
उसका पति आदित्य, शुरू में सोचता कि शायद रीमा सिर्फ थकान महसूस कर रही है। लेकिन धीरे-धीरे उसने देखा कि रीमा पहले जैसी बातें नहीं करती, न हंसती, न घर के कामों में उसका मन लगता था।

बच्चा उसकी गोद में होता, फिर भी उसकी आँखों में एक अजीब-सी खालीपन दिखाई देता। एक रात हालात ने खतरनाक मोड़ ले लिया। बच्चा देर रात बहुत जोर-जोर से रो रहा था। आदित्य पानी लाने गया हुआ था , जब वह लौटकर आया तो उसने देखा कि रीमा खिड़की के पास खड़ी है, गोद में बच्चा और आँखों में एक खोया हुआ भाव। वह बुदबुदा रही थी, “ काश सब खत्म हो जाए ”
आदित्य का दिल दहल गया। उसने तुरंत दौड़कर बच्चे को रीमा की गोद से लिया और उसे कसकर गले लगाया। उसी क्षण उसे एहसास हुआ कि यह महज़ उदासी नहीं, बल्कि एक गंभीर स्थिति है। अगले ही दिन आदित्य ने डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लिया। डॉक्टर ने सारी बातें सुनने के बाद कहा, “रीमा पोस्टपार्टम डिप्रेशन से गुजर रही है। यह बहुत आम है और समय पर इसका इलाज और परिवार के अपनेपन से आसानी से ठीक हो सकता है।

यह सुनते ही रीमा का दिल भर आया और उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। इतने दिनों से जो भावनाएँ भीतर दबकर उसे अंदर ही अंदर तोड़ रही थीं, आज पहली बार वो सब खुलकर बाहर आ रही थीं। आदित्य ने उसका हाथ मजबूती से थामा और बहुत प्यार भरे नरम लहज़े में कहा “रीमा, तुम अकेली नहीं हो। मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ, हर कदम पर। उसके इन शब्दों ने रीमा के टूटे मन में नई ऊर्जा भर दी।
डॉक्टर की सलाह और दवाइयों के साथ-साथ आदित्य का सहारा रीमा की असली दवा बन गया। अब वह रात को बच्चे को खुद सुलाता, घर के कामों में उसका हाथ बंटाता और हर पल उसे याद दिलाता कि वह एक बहुत अच्छी मां है। जब भी रीमा खुद को कमजोर समझती, आदित्य उसे गले लगाकर कहता, तुम जितना सोचती हो, उससे कहीं ज्यादा मजबूत हो।
धीरे-धीरे रीमा की ज़िंदगी बदलने लगी। उदासी की जगह अब उसकी जिंदगी में थोड़ी-थोड़ी रोशनी आने लगी। और एक सुबह, जब उनका बच्चा खिलखिलाकर हंसा, तो रीमा के होंठों पर भी लंबे समय बाद प्यारी सी मुस्कान खिल उठी। उसने बच्चे को अपनी बाहों में कसकर भर लिया और भावुक होकर बोली, अब लगता है जैसे मेरा दिल फिर से धड़कने लगा है।
आदित्य ने उसकी आँखों में चमक देखी और राहत की सांस ली। उसने मुस्कुराकर कहा, “यही मुस्कान तो मेरी रीमा की असली पहचान है।
