Karamati Baba
Karamati Baba

Hindi Social Story: महेश की अचानक मौत के बाद पत्नी करुणा पर तो जैसे मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा। महेश और करूणा की शादी को अभी एक साल भी नहीं हुआ था। एक दिन फैक्ट्री में काम करते समय करंट लग जाने से महेश की अकाल मौत हो गई।
महेश की मौत के बाद करूणा बिल्कुल अकेली पड़ गई। महेश के घर वालों ने कुछ दिनों तक करूणा का साथ दिया, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपने हाथ पीछे खींच लिए। महेश के परिजन और उसके पड़ोसी करूणा को ही महेश की मौत का जिम्मेदार मानते थे। लोगों का मानना था कि करुणा मनहूस है।
आस-पड़ोस के लोगों के ताने सुन-सुनकर करूणा तंग आ चुकी थी। आर्थिक तंगी के चलते अब करूणा को गुजर-बसर में भी परेशानी हो रही थीं,लिहाजा करूणा ने उसी फैक्ट्री में काम करने का निश्चय किया जहां पहले महेश काम करता था।
अगले दिन सुबह करूणा फैक्ट्री पहुंच गई और वहां  मैनेजर से मिलकर सारी बात बताई। करूणा के हालात पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए मैनेजर ने उसे काम पर रख लिया।अब करूणा रोज फैक्ट्री में जाकर मन लगाकर काम करने लगी।
धीरे-धीरे समय बीतता गया। करूणा को फैक्ट्री में काम करते हुए‌ दो साल बीत गए।अब करूणा को खाने-पीने की कोई तंगी नहीं थी। फिर भी महेश के जाने के बाद करूणा अक्सर बुझी-बुझी सी रहती थी। उसका अकेलापन उसे अंदर ही अंदर खाएं जा रहा था।
एक दिन, जब करूणा फैक्ट्री में  छुट्टी होने के बाद वापस घर जा रही थी,उसने देखा सड़क के किनारे बैठा एक अधेड़ उम्र का आदमी उसे इशारे करके बुला रहा है। करूणा ने सोचा शायद वो किसी परेशानी में हैं, इसलिए वह उसकी मदद के लिए उसके पास चली गई। करूणा बोली क्या बात है बाबा,आपने मुझे क्यों बुलाया।
 करूणा की बात सुनकर वह अजनबी बोला, “बेटी, मैं करामाती बाबा हूं। लोगों को उनकी परेशानियों से मुक्ति दिलाना मेरा काम है।” बेटी इस दुनिया में हर कोई अपने और अपनों के लिए जीता है, लेकिन मैंने अपना जीवन दूसरों की भलाई के लिए समर्पित कर दिया है। अपनी कठोर तप साधना के बल पर मैंने जो सिद्धियां हासिल की हैं उनसे मैं लोगों का भला करता हूं। मैं इंसान का चेहरा देखकर उसके दुःख-तकलीफ को जान लेता हूं।
अजनबी बाबा की बातें सुनकर करूणा ने दोनों हाथ जोड़कर उसे प्रणाम किया।उसे लगा कि आज उसे किसी दिव्यपुरुष के दर्शन हो गए। करूणा मन ही मन खुश हो रही थी, क्योंकि काफी लम्बे समय से वह एक के बाद एक नई परेशानियों से जूझ रही थी। करूणा ने अजनबी के आगे अपने हाथ जोड़ते हुए कहा बाबा अब मेरे लिए क्या आदेश है ?
करूणा की बात सुनते ही अजनबी बाबा बोला, “बेटी, तुम पर एक बहुत बुरी आत्मा का साया‌ है, इसीलिए तुम्हारे घर-परिवार में बरकत नहीं हो रही है। घर में अक्सर कोई न कोई परेशानी बनी रहती हैं। खुशियां तुम्हारे घर से बहुत दूर जा चुकी हैं। इस मुसीबत को जितना जल्दी हो सके अपने से दूर करो नही तो अनर्थ हो जाएगा।अजनबी बाबा के इतना कहते ही भोली-भाली करुणा बहुत डर गयी और बोली, बाबा अब मैं क्या करूं ? करूणा के इतना कहते ही अजनबी बाबा बोला घबराओ नही बेटी , मेरे पास हर समस्या का समाधान है। ये तो कुछ नहीं, मैंने अपनी तप साधना से इससे भी बड़ी आत्माओं का साया उतारा है। तुम कहो तो आज ही इसे उतार दूं। अजनबी बाबा के इतना कहते ही करुणा उसके आगे नतमस्तक हो गई और बोली, बाबा किसी भी तरह मुझे इस मुसीबत से छुटकारा दिलाओ।
अजनबी बाबा बोला, ठीक है बेटी मैं आज ही तुम्हें इस बला से मुक्ति दिलाता हूं,लेकिन इसके लिए मुझे तुम्हारे घर के आंगन में अनुष्ठान करना होगा और तुम्हें इस अनुष्ठान के लिए इक्कीस हजार का चढ़ावा चढ़ाना होगा।भोली- भाली करूणा अजनबी बाबा के झांसे में आ गई और उसे अपने घर की ओर लेकर चल दी।

करूणा जब घर पहुंची उस समय घर में कोई ओर नही था। उसने अजनबी बाबा को ठंडा पानी पिलाया और पूछा, बाबा अब मुझे क्या करना होगा। अजनबी बाबा ने घर के आंगन में एक सफेद चादर बिछवाई और अपने झोले से एक बड़ा-सा दिया निकालकर उसे चादर के बीचों-बीच में रखकर उसमें लोबान सुलगा दिया। लोबान सुलगाने के बाद अजनबी बाबा दिए के एक और बैठ गया तथा दूसरी ओर करूणा को बिठाकर जोर-जोर से मंत्र पढ़ने लगा। थोड़ी देर बाद उसने करूणा से उसके सारे गहने और चढ़ावे के इक्कीस हजार रुपए लाने को कहा। कुछ ही पल में करूणा ने अलमारी से गहने और रूपए निकाल कर बाबा के सामने रख दिया।
करुणा के गहने और रूपए रखते ही बाबा ने अपनी पोटली से एक कागज की पुड़िया निकाली और उसे करूणा के हाथ में रखते हुए बोला, बेटी तुम मेरे साथ-साथ मंत्र का उच्चारण करती रहो और पुड़िया से थोड़ा-थोड़ा भभूत लोबान पर डालती रहो। करूणा ने ठीक वैसा ही किया।थोड़ी ही देर में चारों ओर धुंआ ही धुंआ फैल गया और करूणा बेहोश होकर गिर गई। इतने में अजनबी बाबा, करूणा के सारे गहने और रूपए लेकर फरार हो गया।
करीब एक घंटे बाद जब करूणा को होश आया तो उसे अपने चारों ओर धुंआ ही धुंआ दिखा। उसे कुछ भी साफ दिखाई  नहीं दे रहा था, उसे चक्कर आ रहा था, वह उठ कर ठीक से बैठ भी नही पा रही थी। किसी तरह उठकर उसने मुंह धुला और अपने आस-पास देखने लगी उसे अब भी बहुत साफ नही दिख रहा था। जब उसे अपने पास रखे रुपए, गहने और अजनबी बाबा नही दिखा तो उसे समझते देर नहीं लगी कि आज वह ठगी का शिकार हो गई।
करूणा सुध-बुध खो कर जोर- जोर से चिल्लाने लगी। उसकी चीख-पुकार सुनकर आस-पास के लोग वहां इकट्ठा हो गए। करूणा ने सबको अपनी आपबीती सुनाई। करुणा की आपबीती सुनकर सब हक्का- बक्का रह गये।पर अब हो भी क्या सकता था, करामाती बाबा तो अपनी करामात दिखा चुका था।

सुनील कुमार 

6-एक पुरानी याद जो आज भी शर्मिंदगी लाती है
बात उन दिनों की है जब मैंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी। मैंने अनुभव प्राप्त करने के लिए एक छोटे से ऑफिस में नौकरी शुरू की। वहाँ मुझे खरीदे गए सामानों की लिस्ट टाइप राइटर से टाइप करने का काम मिला था। यह अस्सी के दशक की बात है, जब टाइप राइटर का उपयोग एक नई और रोमांचक तकनीक थी।
लिस्ट में वस्तुओं की संख्या और नाम लिखने के साथ-साथ तारीख भी दर्ज करनी होती थी। अंत में कुल प्राप्त वस्तुओं की संख्या लिखनी होती थी। एक दिन, जल्दबाजी में मैंने लिस्ट टाइप की और बिना जांचे सुपरवाइजर को दे दी। जब उन्होंने लिस्ट देखी, तो मुझे बुलाया और कहा, “बेटा, यह पढ़ो।” मैंने मन ही मन पढ़ा, और मेरे होश उड़ गए जब मैंने देखा कि लिस्ट में लिखा था- “कुल नंगों की संख्या”। जब की लिखना था कुल नगों की संख्या।
मैं शर्म से लाल हो गई और मेरी नज़रें उठ नहीं पा रही थीं। उस दिन के बाद, जब भी सुपरवाइजर मुझे देखते, मैं शर्मा जाती थी। आज भी उस घटना को याद करके मुझे हंसी आती है, लेकिन उस समय यह मेरे लिए बहुत शर्मनाक थी।

यह घटना मेरे लिए एक सबक थी कि किसी भी काम में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और हमेशा अपने काम की जांच करनी चाहिए।