Hindi Kahaniya: स्नेहा के कॉलेज का आखिरी दिन था। उसकी सभी सहेलियां आगे क्या करेंगी इसी बारे में बातें कर रहीं थीं। उनके बीच बहुत ही सीरियस टॉपिक चल रहा था… सभी के चेहरे पर एक उदासी की रेखा छाई हुई थी… सखियों से बिछड़ने का दुख भी हो रहा था… और स्नेहा बस की खिड़की वाली सीट पर बैठी अपनी ही दुनिया में खोई थी। उसके सपनों का राजकुमार घोड़े पर सवार हो उसे लेने आने वाला है… जब से उसे यह पता चला उसका कहीं मन ही नहीं लग रहा था। वो बार-बार अपने मोबाइल में उस लड़के की फोटो देखती जो उसकी बड़ी बहन ने भेजी थी और वो फोटो देखकर मुस्करा देती। उसकी सहेली रिया उसे चुटकी काटते हुए बोली…
“कहां गुम हो मैडम जी… यहां हम अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और इतने सीरियस टॉपिक पर बात कर रहे हैं कि आगे पी जी करें तो किस कॉलेज से करें या सरकारी नौकरी की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग लेना शुरू
करें तो कहां से… कौन सा कोचिंग अच्छा रहेगा। सिर्फ बीए की डिग्री लेने से कुछ नहीं होता… नौकरी के लिए कोई प्रोफेशनल या टैक्निकल कोर्स भी जरूरी है…
और आप हैं कि अपनी ही धुन में खोई हुई हैं।”
“नहीं यार मैंने डिसाइड कर लिया है कि मुझे नौकरी नहीं करनी है और आगे भी नहीं पढ़ना।”
“अच्छा! तो क्या करेंगी आप? कल तक तो बड़े-बड़े सपने खुद भी देख रहीं थीं और हमें भी दिखा रहीं थीं। सिविल सर्विस की तैयारी करेंगे और अब…”
वो मुस्कुराते हुए बोली… “पापा मेरी शादी की बात पक्की करके आएं हैं।”
“हे भगवान! अभी कौन सी उम्र हुई है तेरी यार। आज के समय में इतनी कम उम्र में कौन शादी करता है? अब तो सरकार ने भी लड़कियों की शादी की उम्र अठारह से बढ़ा कर इक्कीस कर दी है।”
“बीस साल की तो हो गई हूं। अच्छा लड़का और घर परिवार है। वो अच्छा कमाते हैं तो मुझे नौकरी करने की क्या जरूरत…फोटो देखोगे।”।
स्नेहा ने शर्माते हुए कहा तो रिया बोली…
“चल दिखा।”
स्नेहा ने अपने मोबाइल से उस लड़के की फोटो दिखाई।
“अरे! यार! ये तो रियली बहुत हैंडसम है।”
रिया के हाथ से दीपा ने फोन छीनते हुए कहा…
” मुझे भी दिखा… सच में अगर इतना हैंडसम लड़का मिल जाए तो मैं भी शादी करने के लिए तैयार हूं। वैसे करता क्या है?”
“एम बी ए करने के बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है। पापा तो यही बता रहे थे।”
“क्यों तू नहीं मिली है उससे? उसका स्वभाव कैसा है? अच्छे से पता कर लेना सब कुछ वैसे शादी में जल्दबाजी मत करना। हम तो यही कहेंगे कि अभी मंगनी भले कर ले पर शादी नौकरी करने के बाद ही करना।”
“नहीं अभी तक तो नहीं मिली हूं। आज शाम को वो अपने मम्मी पापा के साथ घर आएंगे मुझे देखने। शादी के बाद ही अब सोचूंगी कि आगे क्या करना है। अगर सब ठीक रहा और ससुराल वाले अनुमति देंगे तो नौकरी करूंगी वरना चौबीस घंटे एटीएम तो साथ रहेगा ही। वो कमाएंगे और मैं खर्च करूंगी।”
भारी भरकम गहने और कपड़े हाथों में चूड़ियां माथे पर बिंदी और सिंदूर से भरी मांग। पैरों में बिछिया और पायल। वो खुद को दुल्हन के रूप में सोच रोमांचित हो गई।
“शादी दूर के ढोल के समान ही होती है। एक बार ये ढोल गले में टांग लिया तो जिंदगी भर झेलना होता है। इतना आसान नहीं है शादी के बाद नौकरी करना इसलिए हम तो पहले अपने सारे शौक पूरे करेंगे उसके बाद ही शादी करेंगे। अपनी मम्मी का हाल रोज देखते हैं। कितनी जिम्मेदारियां हैं उनके ऊपर और दिन भर घर के कामों में व्यस्त रहतीं हैं। उन्हें शादी से पहले ही नौकरी छोड़नी पड़ी फिर दुबारा कभी नौकरी के बारे में सोच ही नहीं पाईं।”
रिया ने कहा तो दीपा बोली… “हां यार तू बिल्कुल ठीक कह रही है औरतों के सारे सपने शादी के बाद टूट कर बिखर जाते हैं वो खुद को ही भूल जातीं हैं । एक चुटकी सिंदूर की कीमत उन्हें जिंदगी भर चुकानी पड़ती है अपने सपनों की आहुति देकर।
” अच्छा बाबा मुझे भड़काने और डराने की कोशिश मत करो… तुम लोगों को ठीक लगे वही करना… पर मैं अपने परिवार वालों का विरोध नहीं कर सकती। इतनी हिम्मत नहीं है मुझमें। वैसे भी शादी तो करनी ही है… अभी अगर अच्छा घर परिवार मिल रहा है तो इसमें क्या बुराई है?”
“कल को कुछ गलत होगा तो तुझे हिम्मत करनी ही होगी वरना ये ससुराल वाले जीने नहीं देंगे…
जीने नहीं देंगे… खाने नहीं देंगे … पीने नहीं देंगे।” रिया तररुम में गाने लगी।
“गलत बर्दाश्त नहीं करुंगी… तब तो बोलूंगी ही। यार पर पता है इस लड़के की फोटो देखने के बाद से इससे प्यार हो गया है। शादी के बाद मुझे बहुत खुश रखेगा मेरे पापा भी कह रहे थे जब वो उनका बड़ा सा घर परिवार देखकर आए थे।
अच्छा एक बात कान खोलकर सुन लो तुम दोनों… मेरी शादी में जरूर आओगी कोई बहाना नहीं चलेगा।”
“चल तेरी बात सही हो। तेरी शादी में हम ना आएं ऐसा हो ही नहीं सकता।”
घर आकर वो खुद को आईने में निहारने लगी। ड्रैसिंग टेबल पर रखी सिंदूर की डिबिया पर उसकी नजर पड़ी। बस एक चुटकी सिंदूर उसकी पहचान बदल देगा मिस स्नेहा मिश्रा से मिसिज स्नेहा शर्मा हो जाएगी। वो शरमा गई।
वो दिन भी जल्दी ही आ गया जिस दिन उसकी शादी थी। लड़के वालों ने जो कुछ मांग की स्नेहा के पिता पूरी करते गए। स्नेहा इसका विरोध करते हुए अपनी दबी जुबान से अपने पिता से कई बार कहा …
“पापा आप इतना खर्च क्यों कर रहें हैं। जब ये लोग इतने पैसे वाले हैं और इनका इतना बड़ा घर और सुख सुविधाओं का सारा सामान है तो आपको देने की क्या जरूरत है? ये आपसे क्यों मांग रहें हैं?”
उसके पिता यह कहकर उसे चुप करवा देते कि…
” स्नेहा बिटिया तुमको इस मामले में बोलने की जरूरत नहीं है। हम जो दे रहें हैं अपनी खुशी से ही दे रहें हैं। बेटी की शादी में तो जितना खर्च करो उतना कम है। लड़का भी तो पढ़ा लिखा नौकरी पेशा है। इतना अच्छा लड़का इतनी आसानी से कहां मिलता है?”
“पापा यही तो मैं भी कह रही हूं कि जब लड़का कमाता है तो उसे आपसे कुछ भी लेने की क्या जरूरत है। पढ़ा लिखा होकर भी दहेज ले रहा है।”
“बेटी हम इसे दहेज नहीं उपहार समझकर ही दे रहें हैं।”
स्नेहा की दोनों सहेलियां उसकी शादी में आईं थीं।
“कितनी सुन्दर लग रही है शादी के जोड़े में। किसी की नज़र ना लगे।” रिया ने उसकी नजर उतारते हुए कहा।
शादी की रस्में शुरू हो गई थी। फेरों के बाद जब सिंदूर दान का समय आया तो लड़के के पिता ने लड़के के कान में कुछ कहा तो वो खड़ा हो गया।
“मुझे कार और पचास लाख रुपए चाहिए तभी मैं सिंदूर दान की रस्म पूरी करूंगा।”
“ये क्या बोल रहे हो बेटा तुम। अभी तक तुम्हारे परिवार और रिश्तेदारों के लिए… जो कुछ कहा सब दिया। अपनी तरफ से हमने कोई कमी नहीं छोड़ी। अब अचानक इतने पैसों का इंतजाम कहां से होगा? अपनी सारी जमीन और घर भी बेच दूंगा तब भी मुश्किल है। पहले ही इस शादी के लिए बहुत कर्जा ले लिया है।”
स्नेहा के पिता ने अपनी पगड़ी उसके पिता के पैरों पर रख दी।
“समधी जी मैं पहले ही अपनी हैसियत से बहुत ज्यादा दे चुका हूं। अब अचानक आपने कार की भी मांग कर दी और पचास लाख रुपए।”
“एम बी ए जमाई चाहिए तो उसके शौक और उसकी जरूरत का भी तो ध्यान रखना होगा। आपकी बेटी की मांग मेरा बेटा अब तभी भरेगा जब उसके हाथों में कार की चाबी दीजिएगा। वरना एक चुटकी सिंदूर के लिए जीवन भर तरसती रहेगी आपकी बेटी।”
स्नेहा का खून खौल उठा…
“पापा मेरी मांग में एक चुटकी सिंदूर के लिए आप अपने आत्म सम्मान को नहीं बेचेंगे।”
उसने गठबंधन खोल दिया।
“माफ कीजिएगा मिस्टर एम बी ए साहिब हमको नहीं करनी आपसे शादी।”
“बेटी ऐसा मत कहो मैं बात कर रहा हूं ना। शादी की आधी रस्में तो हो ही गई हैं बस सिंदूर दान ही तो बांकी है।”
“पापा नहीं लगवाना मुझे ऐसे आदमी से सिंदूर जो अपने पिता को समझाने के बजाए दहेज के पैसों और सामानों से ऐश करना चाहता है।”
“तो क्या अब आप जिंदगी भर कुंवारी रहेगी।”
“हां रह लू़ंगी पर आप जैसे आदमी की पत्नी बनने से अच्छा तो अकेले रहना ही है। अपने पिता के सम्मान को ठेस पहुंचा कर मुझे नहीं चाहिए आपका यह एक चुटकी भर सिंदूर।”
रिया और दीपा ने स्नेहा का साथ दिया उसके पिता को संभाला । वो तो स्नेहा को दब्बू और कमजोर समझ रहे थे उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था उनकी सहेली इतना बड़ा कदम उठाएगी।
” अंकल आप इन दहेज लोभियों के हाथ पैर मत जोड़िए। इनका मुंह सुरसा की तरह बढ़ता ही जाएगा। अपनी बेटी को इन राक्षसों के हवाले मत कीजिए।”
“हां बिटिया तुम लोग ठीक कह रही हो पर समाज क्या कहेंगा। शादी के मंडप से आधी रस्में करके शादी पूरी नहीं करने वाली लड़की से दुबारा शादी कौन करेगा।”
“पापा मैं अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती हूं।”
बारात लौट गई थी और स्नेहा अपनी सहेलियों के साथ अपने सुनहरे भविष्य के सपने सजा रही थी जिसमें चुटकी भर सिंदूर नहीं मान सम्मान और प्रतिष्ठा मिले।
