Adhuri Prem Kahani
Adhuri Prem Kahani

Hindi Love Story: आज नए साल की खुशी में शिमला में फ़ौजियों की एक शानदार पार्टी चल रही है। अरनव अपने दोस्तों के साथ मज़े कर रहा है; खाना पीना चल रहा है। अरनव अपने साथियों के साथ बात कर रहा था कि हाॅल के दरवाज़े से उसे अपने साथी दुष्यंत के साथ एक लड़की आती दिखती है, गहरे लाल रंग के खूबसूरत गाउन और खुले बालों में वह लड़की उसे बहुत ही अच्छी लगी। 

दुष्यंत से मिलने के बहाने अरनव उनके पास जाता है, “हैलो! दुष्यंत” “हाय! अरनव” दुष्यंत जवाब देता है। “हमेशा की तरह पूरे जोश में…उसके बोलते ही दोनों हंसने लगते हैं और वह लड़की मुस्कुरा देती है। 

दुष्यंत लड़की की तरह इशारा करके कहता है, “ इससे मिलो मेरी कज़न आन्या…और आन्या यह मेजर अरनव है।” दोनों दूसरे को मुस्कुरा कर देखते हैं।

अरनव आन्या को डांस के लिए कहता है। डांस करते हुए बातों बातों में दोनों को महसूस हुआ कि उन दोनों की पसंद-नापसंद बहुत मिलती-जुलती है। जल्दी ही दोनों में दोस्ती सी हो गई। 

आन्या दुष्यंत के यहां अगले एक हफ्ते के लिए रुकी थी। उन दोनों ने एक दूसरे का नंबर लिया और बातों का सिलसिला शुरू हुआ। अरनव की भी उन दिनों उस जगह पोस्टिंग थी। बातों के साथ मिलना भी शुरू होने लगा। दुष्यंत को सारी बातें पता थीं और वह यह भी जानता था कि अरनव एक अच्छा फौजी ही नहीं बल्कि अच्छा इंसान भी है। इस तरह मिलने के आखिरी दिन अरनव ने आन्या से उसके घर का पता लिया जो मुंबई में था, “ मेरी छुट्टियां आने वाली है, उस वक्त में अपने माता-पिता के साथ तुम्हारे घर आऊंगा हमारी शादी की बात करने”… आन्या मुस्कुरा कर हां कह देती है।

अगले दिन आन्या मुंबई निकल गई और कुछ दिनों के बाद अरनव भी दूसरी पोस्टिंग पर चला गया। वह दोनों  फ़ोन पर बात करते रहते। एक दिन अरनव आन्या से कहता है, “ मैं दस दिन के बाद अपने पेरेंट्स के साथ तुम्हारे घर आऊंगा। हम लोग कैंट के एक होटल में रुकेंगे।”

आन्या अपने घर में तब तक सब कुछ बता चुकी थी। इधर अरनव और उसका परिवार तैयारी में लगता है उधर आन्या का परिवार भी अपनी तैयारी में लग जाता है। दूसरे दिन मुंबई पहुंचते ही अरनव को खबर मिलती है कि दो दिन बाद ही उसे ज़रूरी मिशन पर जाना होगा। अरनव सोचता है कि उसी दिन आन्या की परिवार से मिलकर सारी बातें कर लेगा।

वह आन्या के घर फ़ोन करता है पर घर पर कोई फ़ोन नहीं उठाता है और आन्या का फ़ोन भी स्विच ऑफ आ रहा था। वह परेशान होकर उसके घर जाता है तो वहां ताला लगा था, पड़ोसियों को भी कुछ नहीं पता था। अरनव के पास वही कुछ घंटे थे फिर उसको निकलना था ड्यूटी के लिए। दुष्यंत को मजबूर होकर उसने कॉल करा तो वह कहता है, “ मुझे भी कोई आईडिया नहीं। हफ़्तों से बात नहीं हुई।” 

अरनव अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने की तैयारी में लग जाता है। सामान बांध के निकलने वाला होता है कि आन्या का फ़ोन आता है। अरनव जल्दी से फ़ोन उठाता है, “ कहां हो आन्या? कोई कांटेक्ट नहीं, कितना ट्राय करा बात करने का, मिलने का। कहां थी?क्या हुआ? अब तो मैं बाद में आ पाऊंगा, कोई ज़रूरी काम आ गया है।” आन्या पहले तो चुपचाप सुनती है फ़िर बहुत ही रूखे शब्दों से कहती हैं, “कोई ज़रूरत नहीं आने की। मुझे बहुत अमीर बिजनेसमैन मिल गया है जिससे मैं शादी करने जा रही हूं। जो ऐशो आराम की ज़िंदगी वह मुझे देगा तुम कभी सोच भी नहीं पाओगे। तुम्हारे साथ बताया हुआ वक्त मैं भूल चुकी हूं। गुड बाय!” कह कर वो फ़ोन बंद कर देती है।

अरनव कुछ देर के लिए चुप सा बैठ जाता है। आन्या का बर्ताव उसे समझ नहीं आता। घड़ी की तरफ़ देखता है और अपनी ड्यूटी के आगे सब भूल जाता है। क‌ईं दिनों तक जान हथेली पर लिए वह अपनी ड्यूटी पूरी करता है और भारत मां की रक्षा करता है। कुछ दिनों बाद उसे फ़िर से मुंबई जाना पड़ता है। रात को वहां अकेला एक क्लब में बैठा था तो आन्या और दुष्यंत को देखता है। लग रहा था मानो दुष्यंत आन्या को कुछ समझा रहा है।

 थोड़ा पास जाकर सुनता है तो उसे कुछ समझ नहीं आता कि दुष्यंत कहना क्या चाह रहा था, “अब तो शादी की बात करके देख ले अपने मां-बाप से, कब तक शादी नहीं करेगी?” उनकी बात सुनकर अरनव को कुछ समझ नहीं आता। वह सोचने लगता है कि क्या आन्या शादीशुदा नहीं है? उसने उस दिन झूठ क्यों बोला? 

वह तभी उन दोनों के सामने आता है और आन्या से कहता है, “ तुमने तो मुझे छोड़ ही दिया था ना लेकिन आज कम से कम मेरा कुसूर तो बताओ और शादी वाला झूठ क्यों बोला?” आन्या की आंखों में आंसू आते हैं, “ मैं कभी तुम्हें छोड़ना नहीं चाहती थी। उस दिन जब तुम मुंबई आए तो उसके एक दिन पहले मेरी बहुत तबीयत खराब हो गई थी। डॉक्टर ने कुछ टेस्ट करे तो उन्हें कैंसर का अंदेशा हुआ। उन्होंने पक्का करने के लिए कुछ और बड़े टेस्ट बताए। जब तुम मुंबई आए तो मैं हॉस्पिटल में थी। दुष्यंत से बात हुई तो तुम्हारे मिशन का पता चला। देश मुझसे पहले है। मुझे डर लगा की खबर सुनकर तुम्हारा मन कमज़ोर ना पड़ जाए। इसलिए मैंने शादी की बात भी झूठ बोली ताकि कल को कभी मैं मर जाऊं तो तुम्हें दुख ना हो लेकिन प्रभु की कृपा से कुछ बड़ी प्रॉब्लम नहीं निकली।”  

दुष्यंत कहता है, “तुम्हारी मिशन की जीत की खबर सुनी और इसकी तबीयत भी ठीक है इसलिए मैं इसको समझा रहा था कि अब सब कुछ ठीक हो गया है तो एक बार फ़िर से तुमसे शादी की बात करे।” 

अरनव गुस्से में कहता है, “ तुम्हारा दिमाग सही है या नहीं। पहली बात तो यह कि मैं बेशक तुम्हारी तबीयत सुनकर परेशान ज़रूर हो जाता पर देश मेरे लिए हमेशा पहले है। तुम्हारा ध्यान करके मैं अपनी ड्यूटी पहले करने जाता। दूसरी बात मैडम! रिपोर्ट का कुछ अता पता था नहीं और तुमने पहले ही अपने मरने का दुख सोच लिया। तुम्हें किसने हक दिया कि अकेले हमारी प्रेम कहानी को अधूरा छोड़ दो?” 

अब दुष्यंत भी यहीं है और हम अभी चलते हैं तुम्हारे घर अपनी अधूरी प्रेम कहानी को पूरा करने। पहले जैसा कोई मौका अब तुम्हें नहीं दूंगा। अभी सब फाइनल कर देता हूं।”

तीनों हंसते हुए आन्या के घर के लिए चलते हैं।