Posted inप्रेम कहानियां, हिंदी कहानियाँ

अधूरी प्रेम कहानी—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Love Story: आज नए साल की खुशी में शिमला में फ़ौजियों की एक शानदार पार्टी चल रही है। अरनव अपने दोस्तों के साथ मज़े कर रहा है; खाना पीना चल रहा है। अरनव अपने साथियों के साथ बात कर रहा था कि हाॅल के दरवाज़े से उसे अपने साथी दुष्यंत के साथ एक लड़की […]

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वी फोर (हम चार)-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: राघव के प्रमोशन की पार्टी थी। आज उसे कंपनी का हेड बना दिया गया था। बहुत ही कम उम्र में वह इस ऊंचाई तक पहुंच गया था। इसी पद को पाने के लिए वह लगातार तीन सालों से मेहनत कर रहा था। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई और वह उसे वह पद मिल […]

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जग में आलोक तुम्हीं से है-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: तुम दुर्गा हो, तुम शक्ति हो ।तुम अनुपम रुप भवानी हो। तुम ही जीवन की गाथा है। भारत का उज्ज्वल माथा हो। हर एक जीव में प्राण तुम्हीं । रक्षा  हेतु  कृपाण  तुम्हीं  ।तुम  ही  से  रोज सवेरा है।उजली किरणों का डेरा है। संबंधों का संसार तुम्हीं ।वेदों ग्रंथों का सार तुम्हीं । तुम ही से उपवन महका है। चिड़ि‌यों का झुरमुट चहका है। सावन के […]

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एक मां के संघर्ष की कहानी-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: मालिनी के पति महेश को शराब पीने की बुरी आदत थी| वो रोजाना शराब के नशे में मालिनी को पीटता था, और बहुत बुरा भला बोलता था। मालिनी घरों में काम करके जो भी कमाती थी, वो सारे पैसे छीनकर शराब में उड़ा देता था| ऐसे ही एक दिन महेश नशे की हालत में घर […]

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होली की धूम मचाए हुडदंग-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Short Hindi Kahani: होलियों का अपना ही रंग होता है, पर उस दिन जो रंग मेरे चेहरे पर चढ़ा, वह गुलाल का नहीं, शर्म का था। सुबह से ही मोहल्ले में ढोलक की थाप, हँसी-ठिठोली और रंगों की बौछार शुरू हो चुकी थी। मैं बालकनी से झाँककर सब देख रही थी—मन में उत्साह भी था […]

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गोलमाल-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Social Story: जगदीश बाबू घर के मुखिया  खानपान में बड़े शौकीन व्यक्ति थे, भोजन में घी-दूध से विशेष प्रेम था| भोजन करते समय उनकी दाल के साथ अलग से कटोरी में हींग ज़ीरे की बघार अलग से रखी जाती  थी, अगर कभी चूक हो जाती तो वह मन से भोजन न करते। उन्हें प्रसन्न करने के […]

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“आत्मसम्मान”—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: एक छोटे से गाँव में एक खुशहाल परिवार रहता था। पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे कुल‌ पांँच लोग। हालांकि पत्नी अपने पति से बहुत अधिक छोटी थीं, करीब दस-ग्यारह साल किन्तु शादी के आरम्भिक सालों को छोड़कर फिर उनमें कभी कोई भी मनमुटाव नहीं हुआ।घर के मुखिया का नाम रामकृष्ण था। वह अपनी […]

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माँ के बाद दूसरी माँ-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Motivational Story: जब आराध्या इस घर में दुल्हन बनकर आई थी, तो उसकी आँखों में सपने थे और दिल में एक अनकहा डर भी। उसे सास से उतना भय नहीं था जितना उस छोटी लड़की से, जो कोने में खड़ी उसे बिना पलक झपकाए देख रही थी। सफेद फ्रॉक में खड़ी काव्या की आँखों […]

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छोटी सी आशा—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Social Story: प्रदीप ने पूजा को फोन किया “जल्दी से नीचे आ जाए” “युग और परी को भी लेकर आना” इससे पहले पूजा कुछ कहती या पूछती, प्रदीप ने फ़ोन रख दिया था. दोनो बच्चे पापा का फ़ोन सुनकर ही खुशी से नाचने लगे थे, पूजा ने जल्दी जल्दी घर का काम निबटाया और तैयार हो ही रही थी कि युग चिल्लाते हुए आया”मम्मी , पापा नई कार लेकर आए हैं” पूजा ने जल्दी से सैंडल पहने और दोनो बच्चो के साथ नीचे आ गई.प्रदीप लाड़ लड़ाते हुए बोला”मैडम देखो तुम्हारी पसंद का ही कलर हैं, स्टील ग्रे” पूजा बेहद खुश थी मगर ऊपर से गुस्सा दिखाते हुए बोली”क्या जरूरत थी इस नई कार की, एक कार तो थी ही” प्रदीप बोला”अब तुम्हारा पति एक बिजनेस मैन हैं कुछ तो ख्याल रखना पड़ता हैं” “दूसरी वाली कार तुम और तुम्हारे बच्चो की” पूजा इस बात को सुनते ही शिकायत का पिटारा खोल कर बैठ गई.  “क्या मतलब वो खटारा मेरे लिए ,मुझे नहीं चाहिए, देनी हैं तो नयी गाड़ी दो “ मंदिर में पूजा के बाद पूरा परिवार फाइव स्टार होटल में डिनर के लिए गया. मगर पूजा का मूड उखड़ गया था.डिनर एंजॉय करने के बजाय वो मुहँ फुला कर बैठ गयी थी.  प्रदीप बोला “पहले तुम्हें इस बात की शिकायत थी कि हमारे पास एक ही कार हैं और मैं ठीक से कमाता नहीं हूँ, अब थोड़ा बहुत समय सही हुआ हैं तो शुक्रिया करने के बजाय तुम शिकायतें कर रही हो “ प्रदीप  अपने  वेतन से पूजा  के सपने पूरे नहीं हो पा रहे थे.  इसलिए एक साल पहले प्रदीप  ने अपनी  पूरी  सेविंग्स लगाकर एक ऑनलाइन  बिजनेस  शुरू कर दिया  था. पांच महीने में ही प्रदीप को समझ आ गया था कि बिजनेस में  ईमानदारी  से पैसा कमाना और भी मुश्किल हैं. रात दिन पूजा के तानों से परेशान आ कर प्रदीप ने थोड़ी हेरा फेरी करनी शुरू  कर दी थी, कुछ ही दिनों में पूजा के घर में पैसों की बरसात होने  लगी. पूजा का व्यवहार  अब  प्रदीप से एकाएक प्रेममय हो उठा.पूजा को लगने लगा अब उनकी जिंदगी भी पटरी पर आ गई हैं.शादी के  दस वर्ष बाद जीवन में छोटी सी आशा की किरण आई थी.वो सारे बचपन के सपने अब वो पूरे कर  रही थी प्रदीप ने जल्द ही एक बड़ा फ़्लैट भी लोन पर खरीद लिया था हालाकि पूजा को  अब  भी  शिकायत  थी  “अब तो एक कोठी  खरीदनी चाहिए  थी” प्रदीप बुझे स्वर में बोला “वो भी खरीद लूंगा थोड़ा सब्र तो रखो “ फरवरी की एक गुनगुनी सी शाम थी ,बच्चे और पूजा ,शॉपिंग करके घर ही लौटे थे कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई.तीन अजनबी खड़े हुए थे, पूजा के सवाल करने पर उन्होंने बताया कि वो प्रदीप से मिलना चाहते हैं. पूजा ने प्रदीप को फोन लगाया मगर प्रदीप का फोन नही मिल रहा था.थोड़ी देर बाद उन लोगो ने  बताया कि वो साइबर क्राइम से आए हैं, प्रदीप के ऊपर धोखाधड़ी और जालसाजी का केस था.करीब दो घंटे बाद प्रदीप आया और काफी देर तक बातचीत चलती रही.उनके जाने के बाद घर में महाभारत मच गया, पूजा चीख चीख कर प्रदीप को बाते सुना रही थी.दोनो बच्चे डर के कारण अपने अपने कमरों में दुबके हुए थे. प्रदीप को उस समय ज्ञान और शिक्षा से अधिक सब्र और सहारे की जरूरत थी मगर पूजा ना जाने क्यों अनर्गल बोले चली जा रही थी.प्रदीप कार उठा कर निकल गया था, उसे अपने ऊपर ही गुस्सा आ रहा था, क्यों नही वो कभी भी अपने परिवार को खुश रख सकता हैं.ऐसी तो उसने कोई धोखाधड़ी भी नही करी थी, मगर वो क्या समझाए पूजा को और कैसे समझाए? देर रात गए जब प्रदीप आया तो पूजा ने सूजी हुई आखों के साथ दरवाजा खोला, प्रदीप बहुत कुछ कहना चाहता था मगर पूजा के सामने कुछ बोल नहीं पाया. पूजा पूरी रात शिकायतों  का  दरबार  लगा  कर  बैठी  रही, सुबकती रही और प्रदीप बैचनी से करवट लेता रहा था. अगले दिन जब प्रदीप ऑफिस पहुंचा तो पता चला उसके पार्टनर विकास की लापरवाही के कारण बहुत सारे फ्रॉड ट्रांजेक्शन हुए हैं. उनकी कंपनी के खिलाफ साइबर सेल में बहुत सारे केस रजिस्टर्ड हैं. इसी टेंशन में एक माह निकल गया था, ऑफिस का रेंट निकलना मुश्किल हो गया था.कंपनी के सारे अकाउंट फ्रीज हो गए थे.इसी उधेड़ बुन में दो माह और निकल गए और प्रदीप की सारी सेविंग्स खत्म हो गई थी जिससे वो पूजा और बच्चो का खर्च उठा रहा था. आमदनी शून्य थी मगर खर्चा था जो सुरसुरा के मुंह की तरह बढ़ता ही जा रहा था.प्रदीप इधर उधर नौकरी की भी तलाश कर रहा था मगर उससे पहले ही,प्रदीप की बदनामी पहुंच जाती थी.प्रदीप अकेला ही घुट रहा था मगर हाय रे दुर्भाग्य वो ये बात सबसे कर सकता था सिवाय अपनो के. आज शाम को प्रदीप जैसे ही घर पहुंचा , पूजा प्रदीप को आड़े हाथों लेते हुए बोली”बच्चो की फीस जमा करने की फुरसत नही मिली” “तुमने मुझे जो भी कार्ड दे रखे थे , उनमें से कोई भी नही चल रहा हैं” काश प्रदीप तभी भी हिम्मत करके सच बोल पाता मगर वो बस सुनता रहा और सुनता रहा.अगले दिन घर पर लोन के एजेंट आकर बड़ी कार को लेकर चले गए थे क्योंकि पिछले तीन माह से एक भी किस्त जमा नही हो पाई थी. पूजा ये सब देखकर स्तब्ध थी.उसने प्रदीप की तरफ देखा, उसे विश्वास था कि प्रदीप कहेगा कि सब ठीक हैं, वो एक दिलासे भरे झूठ का इंतजार कर रही थी मगर प्रदीप ने कुछ नही कहा और फफक फफक कर रो पड़ा. पूजा ऐसे ही निशब्द बैठी रही, उसकी हिम्मत नही हो रही थी कि प्रदीप से कुछ पूछे.युग और परी अपने कमरे में बंद थे. प्रदीप पूरी रात  सड़को पर बेमतलब घूमता रहा, उसने मोबाइल भी स्विच ऑफ कर रखा था. प्रदीप का एक बार मन किया कि वो चलती गाड़ी के सामने कूद जाए या नदी में छलांग लगा ले. जैसे ही प्रदीप नदी की तरफ गया तो वहां पर उसने देखा एक बच्चा भीख मांग रहा हैं , ना जाने क्यूं प्रदीप को उसमे युग और परी का चेहरा नजर आ रहा था, प्रदीप को लगा नही वो अपने  परिवार के साथ ऐसे नही करेंगे.  उधर जब घड़ी ने रात के 12 बजाए तो पूजा ने प्रदीप को कॉल लगाया मगर फोन लगातार स्विच ऑफ जा रहा था, पूजा खुद को ही कोसने लगी क्यों वो हर समय पैसों के पीछे रहती थी. क्यों वो  हर   समय  शिकायतों का अंबार लगा  कर  बैठी रहती  थी?एक बार प्रदीप आ जाए वो सब संभाल लेगी.मगर रात की उम्र इतनी लंबी होती हैं ये आज इस पूजा को महसूस हुआ था जब सुबह के पांच बजे प्रदीप वापिस घर आया तो पूजा को लगा मानो उसके जीवन में फिर से आशा का संचार हो गया हो.प्रदीप से पूजा बस इतना बोल पाई “तुम अकेले नही हो , अगर पहले बता देते तो यहां तक बात नही बढ़ती .”पूजा के इन शब्दों से प्रदीप के अंदर भी साहस का संचार हुआ.दोनो ने पहली बार निशब्द होकर भी एक दूसरे को समझ लिया था.सूरज की पहली किरण ने दोनो के अंदर एक छोटी सी आशा का दिया जलाया था. पूजा ने उस काली रात मे एक निर्णय लिया था, शिकायतों को ताला मार कर, शुक्रिया को अपनाने का.  जब सुबह के  छः बज गए थे तो पूजा ने रसोई की तरफ रुख किया. प्रदीप के इस तरह बिखर जाने  पर ,पूजा ने अपने आप को समेट लिया था.प्रदीप की बातो से पूजा को बस इतना समझ आया था कि उसका पूरा परिवार संकट में हैं. नाश्ता बनाते हुए पूजा का दिमाग भी तेजी से चल रहा था, सबसे पहले  पूजा को बुनियादी जरूरतों की फिक्र हुई, बच्चो की पढ़ाई, घर का राशन पानी, घर का किराया और भी ऐसे ही ना जाने कितने खर्च थे. प्रदीप पूजा के व्यवहार में आए इस बदलाव से एकाएक हक्का बक्का रह गया था.पूजा ने प्रदीप को नाश्ता कराया और बोला”तुम पर कितना कर्ज हैं?” प्रदीप ने हकलाते हुए कहा “मै बिक भी जायूगा तो भी कर्ज नही उतर पाएगा” पूजा बोली “मै इस बात की शुक्रगुजार हूं कि मेरा परिवार मेरे साथ हैं, कोई ना कोई रास्ता निकाल जाएगा “ पूजा सोचते हुए बोली”काश हम खुल कर बात कर पाते” “प्रदीप तुम्हारे साथ साथ गलती मेरी भी हैं, तेज़ी से आता हुआ पैसा देखकर मैं भी तो बहक गई थी” दोनो पति पत्नी ने शायद पहली बार जिंदगी में किसी समस्या के आने पर एक दूसरे पर  दोषारोपण नही किया था. पूजा ने प्रदीप से कहा “सबसे पहले इस घर को बेच दो और हम किसी छोटे से फ्लैट में शिफ्ट हो जाते हैं” फिर पूजा ने अपनी बड़ी बहन से कुछ रुपए उधार लिए और बच्चो की फीस भरी. पूजा ने अपनी सारी ज्वैलरी की कीमत लगवाई जो करीब 40 लाख थी , उन्हें बेच कर पूजा ने जब प्रदीप को पैसे दिए तो प्रदीप आत्मग्लानि से भर उठा .मगर पूजा ने प्रदीप से कहा “प्रदीप जेवर ऐसे ही  बुरे समय के लिए होते हैं “ पूजा की समझदारी के कारण 24 घंटे में ही प्रदीप की 60 प्रतिशत समस्या खत्म हो गई थी.इस बार पूजा और प्रदीप दोनो की ही आंखे खुल गई थी.दोनो को  समझ आ गया था कि रिश्तों में शिकायतों के बजाय शुक्रिया होना चाहिए था.  घर में पैसे की थोड़ी कमी थी मगर सुकून की नही.पूजा इस बुरे समय में अपने पति के साथ ढाल  बन कर खडी रही थी.वो शिकायतें नहीं बस शुक्रिया अदा करती रही. शुक्रिया करने का ये जादुई असर हुआ कि प्रदीप ने अब अपना सारा कर्ज उतार दिया और एक छोटी सी दुकान लगा ली थी.रिश्तेदारों की हंसी और तानों का उस पर अब कोई फर्क नही पड़ता था.पूजा ने भी  फिर  से नौकरी शुरू कर दी थी. शुक्रिया  अदा  करने  के  कारण दो वर्ष के अंदर ही पूजा और प्रदीप ने बिना लोन के एक छोटा सा घर ले लिया था. बड़ी कार के बजाय दोनो ने अपने अपने लिए एक छोटी सी कार खरीद ली थी.अब पूजा को विश्वास था कि उसके जीवन के गाड़ी वास्तव में पटरी पर आ गई हैं क्योंकि उसकी जीवन रूपी गाड़ी के पहिये अब शिकायतों और लालच के बजाय शुक्रिया और विश्वास के बल पर सरपट दौड़ती रहेगी. 

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निस्वार्थ प्रेम की झलक-गृहलक्ष्मी की कहानियां

 Hindi Love Story: शांति गहरी होती चली जा रही थी और भावना के दिल की धड़कनें भी तेज होने लगी थीं। बालकनी में चुपचाप बैठी हुई भावना अपने जीवन को वरदान या अभिशाप के रूप में देखने में इतनी व्यस्त हो गई थी कि उसे समय और स्वयं का कोई ध्यान नहीं था वह बिल्कुल […]

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