two people reading book while lying sown in garden
When books become comfort

Summary: छोटे पल, बड़ी सीख

एक वर्किंग माँ तान्या छोटे-छोटे पलों और किताबों के ज़रिये अपने बेटे नैतिक को पढ़ने से जोड़ती है। यह कहानी बताती है कि समय नहीं, माँ की मौजूदगी और अपनापन बच्चे की आदतें बदल देता है।

Short Story in Hindi: सुबह का अलार्म, जल्दी-जल्दी तैयार होना, लैपटॉप बैग के साथ टिफ़िन संभालना, ट्रैफिक में फँसना और दिनभर की  मीटिंग्स, तान्या की ज़िंदगी एक वर्किंग माँ की रोज़मर्रा की दौड़ थी। हर शाम घर लौटते समय उसके मन में एक ही विचार होता, आज भी नैतिक को पूरा समय नहीं दे पाई।नैतिक सात साल का था। शरारती, ज़िद्दी और किताबों से कोसों दूर। स्कूल से आते ही वो बैग एक कोने में फेंक देता और माँ को फ़ोन कर के मोबाइल में गेम खेलने की जिद करता था । किताबें उसे हमेशा से बोरिंग लगती थी। इसलिए शायद पढ़ाई भीउसके लिए बस एक बोझ भर थी। तान्या चाहती थी कि उसका बच्चा पढ़े, सीखे, आगे बढ़े। लेकिन सच यह था कि ऑफिस की थकान के बाद उसके पास न गुस्सा करने और ना ही समझाने की ताक़त बचती थी।

कई रातें उसने खुद को यह सोचकर कोसा काश मैं घर पर रहने वाली माँ होती। फिर एक दिन उसने तय किया, वह माँ होने के अपने तरीके को कमज़ोरी नहीं बनने देगी।

तान्या ने किसी तरह के बड़े नियम नहीं बनाए। उसने छोटे-छोटे पल चुने। ऑफिस से लौटते समय वह नैतिक के लिए पतली-सी कहानी की किताब ले आती,रंगीन कवर वाली और भावनाओं से भरी हुई ।

शाम को जब नैतिक मोबाइल माँगता, तान्या बस इतना कहती, पाँच मिनट रुक जाओ, मैं इस किताब के एक दो पन्ने पढ़ लेती हूँ। वह पाँच मिनट अक्सर पंद्रह में बदल जाते।

कभी-कभी तान्या की आँखें थकान से बोझिल हो जातीं और आवाज़ लड़खड़ा जाती। उसके पास बैठा नैतिक किताब उसके हाथ से लेकर कहता, मम्मा, आज मैं पढ़ूँ? उस एक पल में तान्या को लगता उसकी सारी मेहनत सफल हो गई। धीरे-धीरे किताबें नैतिक के लिए सिर्फ होमवर्क का ज़रिया नहीं रह गयीं थी। वे उसकी माँ की मौजूदगी बन गईं। जब तान्या देर से घर आती, नैतिक तकिए के पास रखी किताब खोलकर बैठ जाता, जैसे माँ वहीं हो।

एक दिन नैतिक ने शिकायत की, मम्मा, आप बाकी मम्मियों की तरह स्कूल नहीं आतीं। तान्या का दिल भर आया। उसने नैतिक को पास बैठाया और कहा, मैं काम पर इसलिए जाती हूँ ताकि तुम्हारे सपनों को मज़बूती मिल सके। उसी रात नैतिक ने अपनी कहानी की किताब के पहले पन्ने पर लिखा, मेरी मम्मा तान्या के लिए।

कुछ महीनों बाद तान्या नैतिक की पैरेंट-टीचर मीटिंग में गई। उसकी टीचर ने कहा, नैतिक बहुत ध्यान से पढ़ता है और अपने विचार साफ़ शब्दों में लिखता है। बेशक वो शरारती है लेकिन कभी किसी का दिल नहीं दुखाता। कई बार अपने दोस्तों को किताब पढ़ने की सलाह देता है। कभी-कभी मुझे यकीन नहीं होता ये वही नैतिक है जो कुछ महीने पहले तक किताबों को देख कर मुँह बनाने लगता था।

तान्या मुस्कराई, टीचर की बातें सुन कर उसका मन बहुत खुश था। नैतिक पर गर्व महसूस हो रहा था। वर्किंग माँ होने का जो गुलित उसके मन में था अब वो पूरी तरह से मिट चुका था। अगले दिन उसने नैतिक के कमरे में एक छोटी-सी बुकशेल्फ़ लगा दी।

आज भी तान्या एक वर्किंग माँ है और साथ ही नैतिक आज भी बहुत शरारतें करता है। बस बदला है तो ये की अब हर रात सोने से पहले एक सवाल ज़रूर होता है, मम्मा, आज कौन-सी किताब?

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...