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नारीमन की कहानियां
Lamho ki Guzarish-Nariman ki Kahaniyan

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

तान्या को बचपन से ही खेलों में बहुत दिलचस्पी थी। वह बचपन में ही भिन्न-भिन्न प्रकार के खेल खेलती थी। देखते-देखते उसका बचपन खेलों में ही निकल गया। एक दिन वह अपने पिता जी के बारे में सोच रही थी जो उसने अपने पिता ,चाचा और ताया के मुंह से सुना था कि उसके पिता बचपन में बहुत खेलते थे। वह एक अच्छे एथलीट थे। वो साइकिलिंग, रेसिंग, शॉटपुट, कुश्ती, दंड बैठक सारी खेलों में नंबर वन पर थे। वह हर मुकाबला जीतते थे। तान्या ने यह भी सुना था कि उसके पिताजी दूध की बाल्टी पी जाते थे और रोज की खुराक में एक घी का कटोरा होता था। वह रोज़ वर्जिश करते थे। उनका शरीर बहुत सुडौल था। पहलवानी उनका शौक था। समय ने ऐसी करवट ली कि देश का बंटवारा हो गया और सब कुछ बदल गया। तान्या के दादा जी भी पाकिस्तान में एक बहुत बड़े जेलदार थे। उसके परदादा जी भी एक नामी जेलदार रह चुके थे। जिनके नाम पर आज भी पाकिस्तान में “भोला चक्क” पिंड का गांव मशहूर है। बंटवारे के बाद तान्या के पिताजी भारत आ गए और वहां उन्होंने दसवीं की पढ़ाई पूरी की और फिर खेती करनी शुरू कर दी। उनकी आदत थी सभी के काम आना, सभी की सहायता करना, सभी को प्यार से बुलाना,प्रेम प्यार वाला स्वभाव रखना। रिश्तेदारों में सभी से मिलकर रहना।

भारत आकर उनकी शादी हो गई। शादी के बाद कई साल उनके बच्चे ना हुए। तान्या के पिताजी खेती करते थे, वह बहुत ईमानदार थे। उन्होंने बच्चे ना होने पर तान्या की मां को कभी ताड़ना नहीं की। पर वह दोनों बहुत दुखी थे। आखिर भगवान ने तान्या के माता-पिता की अरदास सुन ली और उनके घर में 2 बच्चे पैदा हुए। अपने बच्चों के प्रति उनका प्यार देखकर सभी बड़े हैरान होते थे पर यह चाव भगवान को मंजूर नहीं था। तान्या छठी कक्षा में पढ़ रही थी, तब उनके घर एक भयानक हादसा बीत गया, जून का महीना था, गर्मी बहुत थी। बच्चों की स्कूल की गर्मी की छुट्टियां हो गई थी। आज 4 जून को गर्मी बहुत ज्यादा थी। शाम का समय भाई-बहन छुट्टियों का काम खत्म करके नानी के घर जाने की तैयारी कर रहे थे, कि रात का खाना बनाकर मां ने बच्चों को आवाज़ लगाई, “बच्चो आ जाओ, खाना खा लो” तुम्हारे पिताजी भी आ गए हैं। चारों खुशी-खुशी खाना खा रहे थे। समय की मार ऐसी पड़ी कि भयानक अंधेरी आई और सब कुछ उड़ा कर साथ ले गई। खाना वहीं रह गया। सब्जी मिट्टी से भर गई। अंधेरी के कारण घर की छत गिर गई और मां उसके नीचे आ गई। मां की मौत घर की छत के नीचे हो गई। मां को बच्चे अगले दिन जलती चिता में देख रहे थे। बच्चों की प्यारी माँ, चाव, लोरियां-लाड सब अगले दिन चिता की आग में जल रहे थे, सब खत्म हो गया। इम्तिहान तान्या की ज़िन्दगी का शुरू हुआ, ज़िन्दगी से आमना-सामना हो गया। पता चला कि कैसे मां के बिना जिन्दगी जी जाती है। धीरे-धीरे जिन्दगी फिर अपनी पटरी पर चलनी शुरू हो गई।

जो काम तान्या ने सीखे भी नहीं थे, वह सभी तान्या को करने पड़ रहे थे। तान्या बार-बार अपनी ज़िन्दगी में देखती और रोती और अपनी मां को याद करती। एक प्यार भरी ज़िन्दगी सड़क पर आ गई थी। भाई-बहन ज़िन्दगी निभाने लगे। घर का काम चलता ना देख सभी रिश्तेदारों के ज़ोर देने से तान्या के पिताजी ने दूसरा विवाह कर लिया। बच्चों की दूसरी मां घर आ गई। जिन्होंने घर की सारी जिम्मेदारी संभाल ली। ज़िन्दगी फिर पटरी पर चल पड़ी। फिर तान्या के छोटे भाई का जन्म हुआ। जिससे घर में खुशियां फैल गई। तान्या और उसका भाई पढ़ने में बहुत होशियार थे, भाई सजीला जवान था। भाई को हर समय बहन की चिंता रहती थी। उसके बारे में सोचता रहता। भाई की सगाई बाहर विदेश में रहती एक लडकी से हो गई और विदेश जाने की तैयारियां शुरू हो गई। भगवान की करनी ये की वह दिन कभी आया ही ना। लाड और चाव से पाला पुत्तर अब सुंदर जवान हो गया था। दंड बैठक निकालता, वर्जिश करता तो तान्या के पिता उस पर वारे-वारे जाते। अम्मी तो बचपन में ही साथ छोड़ गई थी। पर पता नहीं था कि यह भी होना है। एक दिन स्कूटर ट्रैक्टर की टक्कर में तान्या के भाई ने दम तोड़ दिया। उगता सूरज घर में अंधेरा कर गया। क्या यह घर के लिए डूबता सूरज था? यह सवाल बार-बार तान्या के मन में आते। 23 साल यह उगता सूरज बनकर, फिर डूबता सूरज क्यों बन गया? यह सोच तान्या को हर समय घेरे रखती और वह ज़िन्दगी के ताने-बाने को ख्यालों में देखती रहती। ज़िन्दगी अधूरी-सी हो गई थी। उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता। पर फिर ज़िन्दगी पटरी पर चलने लगी। धीरे-धीरे तान्या की पढ़ाई भी पूरी हो गई और उसकी शादी की बातें घर में होने लगी। तान्या को विदेश से भी रिश्ते आए पर तान्या विदेश नहीं जाना चाहती थी। वह अपने पिताजी को कभी तन्हा नहीं छोड़ना चाहती थी। उसे रिश्तों की बहुत कमी महसूस हो रही थी। तान्या का विवाह एक सरकारी नौकरी वाले व्यक्ति से हो गई। जिसने उसे ज़िन्दगी की सारी खुशियां देने की कोशिश की। तान्या का ससुराल पढ़ा-लिखा और सकारत्मक सोच का मालिक था। जिस कारण तान्या को उस घर में कोई मुश्किल नहीं आई। तान्या के दो बच्चे पैदा हुए। तान्या उनका पालन-पोषण करने लगी। वक्त अपनी गति से आगे बढ़ रहा था। लगता था कि उसके मां-बाप के घर की जिम्मेदारियां और कष्टों का अभी खात्मा नहीं हुआ था। भगवान ने तान्या की दूसरी मां को भी अपने पास बुला लिया। छोटा भाई अभी छठी कक्षा में ही पढ़ता था। ज़िन्दगी वही कहानी दोहरा रही थी। वही समय आ गया। तान्या अपने बनते घर को छोड़कर फिर मायके के घर में आ गई, जो उनके दुख में उनका साथ दे सके।

समय अपनी चाल चलता रहा, तान्या की हसरत पूरी हुई, तान्या को अपनी पढ़ाई के मुताबिक सरकारी नौकरी मिल गई। उसे वह शहर छोड़ना पड़ा, वह अपने छोटे भाई को भी अपने साथ वहीं उसी शहर में ले गई, जहाँ उसे नौकरी मिली थी। अपने बच्चों के साथ उसका भी पालन करने लगी। धीरे-धीरे छोटे भाई ने भी पढ़ाई पूरी कर ली। सबका विचार था कि भाई की शादी कर दी जाए तो घर में फिर से खुशहाली आ जाए। क्योंकि तान्या के पिताजी बहत उदासी महसूस कर रहे थे। तान्या ने अपने छोटे भाई का विवाह बहुत ही चाव से किया। भाभी का स्वागत बहुत खुशी से किया। भाई के घर दो प्यारे-प्यारे बच्चों ने जन्म लिया, और घर में फिर खुशियों की बहार आ गई। तान्या के पिताजी बहुत खुश रहने लगे पर उनकी उम्र काफी हो चुकी थी। इस समय उन्हें एक बड़ी बीमारी ने बिस्तर से 5 महीने उठने ही नहीं दिया। भाई भाभी ने दिल से पिता की सेवा की, वह उन्हे आशीर्वाद देते हुए इस दुनिया से विदा हो गए। अब तान्या के अपने बच्चे भी शादी के काबिल हो गए, जो कि अपनी ज़िन्दगी के एक अच्छे मुकाम पर पहुंच चुके थे। तान्या ने दोनों बच्चों की शादी कर दी। तान्या के पास समय ही समय था। तान्या अपनी ज़िन्दगी के बारे में सोचती रहती कि उसके जीवन में यह सब क्यों गुजरा? इसका क्या कारण था? फिर उसने इस पर अपनी पढ़ाई शुरू की। मन की भावनाओं को बाहर निकालना शुरू कर दिया, लिखना शुरू कर दिया। तान्या अब एक पोती की दादी भी बन चुकी है। उसे ज़िन्दगी पूर्ण महसूस हो रही है दिल की भावनाओं को तान्या लिख के बहुत ही खुश होती है। दिल के संताप, दिल की खुशियों को आज तान्या बड़ी प्रभावशाली तरीके से लिखती है। तान्या को प्यार के भ्रम ने तोड़ के रख दिया था। समय ने ऐसा रंग दिखाया कि सब रिश्ते खोखले साबित हो गए। तान्या ने खुद को इन सभी भ्रम से बाहर निकाला और ज़िन्दगी को एक नया रूप रंग दिया। नए ढंग से ज़िन्दगी को जीना शुरू कर दिया। हर दिन तरक्की की राह में बढ़ती चली गई। अब उसे अपनी ज़िन्दगी बहुत सुकून से जीने की इच्छा है। तान्या ने अपनी रुचि के विषयों में शिक्षा प्राप्त की है।

तान्या ने कई अवार्ड भी प्राप्त किए। अब वह अपनी नौकरी भी पूरी करने जा रही है और उसे ज़िन्दगी जीने में आनंद आ रहा है। तान्या की तमन्ना है कि उसने जिन विषयों में पीएच.डी. की है, उन पर एक किताब लिखे और एकल प्रकाशित करवाए तो दुनिया को भी उन विषयों के बारे जानकारी प्राप्त हो सके।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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