Hindi Social Story: ” साहब आपकी कॉफी टेबल पर रखी है और दोपहर का भोजन बनाकर रसोईघर में रख दिया है आप अपने समय पर याद से खाकर बर्तन खाने की टेबल पर रख देना हम शाम को आकर साफ कर देंगे , ठीक है और आप ध्यान से अपनी दवाएं जरूर ले लेना और […]
Tag: कथा-कहानी
जीतू से जीतेंद्र तक का सफर-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Motivational Story: सोलह वर्षीय आदित्य स्कूल से घर में घुसते ही दादाजी के कमरे में गया, “ दादू! आज मैं अपने दोस्त अरनव को आपसे मिलवाने लाया हूं। यह आपके शहर मेरठ का रहने वाला है। अब यह लोग कुछ सालों से देहरादून में रह रहे हैं। दादू अपनी ऐनक आंखों पर चढ़ाते हैं […]
अपने लिये—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: बहुत सुंदर सीधी-साधी सरल हूँ मैं,और अच्छी बहू हूँ मैं! अच्छी भाभी हूँ मैं,अच्छी पत्नी भी हूँ मैं! अच्छी माँ हूँ मैं,अच्छी देवरानी और जेठानी भी हूँ मैं!सर्व गुण सुघर्ण नारी हूँ मैं! लेकिन तब तक हीजब तक मैं सबकी सुनती रहूँ,गूंगी बहरी बन सबके इशारो पर चलती रहूँ! जिस दिन मैंने एक […]
नन्हा दोस्त-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Social Story in Hindi: घर जल्दी पहुँच चुके राजेश ने अपनी पत्नी सुनीता को फोन लगाया.“सुनीता, कहाँ हो? अभी तक ऑफिस से घर नहीं आईं?”.“मैं लेडी डॉक्टर के पास रूटीन चेकअप के लिए आई हूँ. तुम घर पहुँच गए क्या?”“हाँ, आज थोड़ा जल्दी आ गया.”“बस, …निकल ही रही हूँ.” कहकर सुनीता ने फोन रख दिया.नोएडा […]
‘अनोखी प्रेम कहानी’-नए दौर की कहानी
गरीबी और जातिगत दीवारों ने उनके प्रेम को बाँट दिया, लेकिन रांझलू का फुलमा को अंतिम विदाई देना—उसे सुहागिन की तरह लाल चादर ओढ़ाकर चिता को अग्नि देना—इस प्रेम कथा को अमर बना गया। यह कहानी बताती है कि सच्चा प्रेम मरता नहीं, बल्कि लोकगीतों की तरह पीढ़ियों में गूँजता हुआ अमर रहता है।
लौट आओ फिर ना जाने के लिए-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Motivation Story: अल सुबह ठंडी हवाएं उमड़-उमड़ कर तन से लिपटी जा रही थी।नीला आसमान नीले से धूसर होने की यात्रा में था। उसने अपनी साड़ी को कसकर अपने तन से लपेट लिया।ठंडी हवा के झोंके तन पर सिरहन पैदा कर रहे थे।कल रात से ही मौसम का मिजाज़ कुछ बदला-बदला सा था।सच कहते हैं लोग जीवन और मौसम का कोई भरोसा नहीं […]
”आत्मबल की ज्योति”-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Motivation Story in Hindi: ” शीतल हवाओं का आना और जाना लगा हुआ था समय का हाथ पकड़कर चांदनी रात आगे बढ़ रही थी कुछ ख्यालों ने अपनी चहल – पहल शुरू करके वातावरण में सभी का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करना शुरू कर दिया था। अभिषेक अपने कमरे की बालकनी में खड़े होकर आसमान […]
पँक्तिभेद-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Social Story: अरे सुनो, भाभी अभी सुबह-सुबह ही अपने मायके चली गयी हैं पन्द्रह दिनों बाद आयेंगी । उस घर का खाना देख लेना”,प्रभात के इन शब्दों ने सुगना के ज़ख्मों की पपड़ी उतार दी जैसेपापड़ी बेलते-बेलते उसके हाथ कुछ ज्यादा तेज़ चलने लगे।उखड़े स्वर में बोली क्या करूँ उनका आये दिन का राग है […]
जिंदगी के साथ भी जिंदगी के बाद भी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Short Story: अरे, सुबह-सुबह यह क्या लेकर बैठ गए हैं? चाय नाश्ता कर लीजिए देर हो रही है। मुझे खाना बनाने में देर हो रही है।सुनो,यह मेरी कुछ पॉलिसीयों के कागज हैं यह पांच साल बाद पूरी होने वाली है। ये एफ.डी अगले साल पूरी होने वाली है और यह कुछ इन्वेस्टमेंट है जो मैंने किए […]
घर का लोकतंत्र-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Social Story in Hindi: दुनिया में कई सवाल ऐसे है, जिनका जवाब आज तक नहीं मिला। जिंदगी की सच्चाई, अपनी पहचान से लेकर बरमूडा ट्राएंगल तक के सवाल अनसुलझे है। पर एक सवाल ऐसा है जिसका जवाब सुबह शाम में बदल जाता है। रोज इसका जवाब दिया जाता है और यह फिर से अपना मुंह […]
