Hindi Kahani: बहुत सुंदर सीधी-साधी सरल हूँ मैं,
और अच्छी बहू हूँ मैं!
अच्छी भाभी हूँ मैं,
अच्छी पत्नी भी हूँ मैं!
अच्छी माँ हूँ मैं,
अच्छी देवरानी और जेठानी भी हूँ मैं!
सर्व गुण सुघर्ण नारी हूँ मैं!
लेकिन तब तक ही
जब तक मैं सबकी सुनती रहूँ,
गूंगी बहरी बन सबके इशारो पर चलती रहूँ!
जिस दिन मैंने एक बार भी किसी गलत बात का विरोध कर आवाज़ उठाई,
उसी दिन, मैं तेज तर्राट बैगयरत
और चरित्रहीन भी बना दी जाती हूँ मैं!
मैं क्या हूँ,क्यों हूँ,कोई नहीं समझ सका मुझे, जिसकी जैसी जरुरत वैसी बना दी गई हूँ मैं!
लेकिन अब नहीं…!
जैसी हूँ अच्छी हूँ, मुझे नहीं और सहना झूठे खोखले आदर्श और परम्पराओं को, जो मेरे लिए कुछ और…!
तुम्हारे लिए कुछ और…!
अब जियूंगी सिर्फ मैं! और मैं!
अपने लिए!
