Hindi Best Story
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Hindi Best Story: निमि और कपिल का विवाह तो था ही एक एग्रीमेंट किंतु हमने तो विवाह में प्रेम तलाशा था।

‘सच ए रोमांटिक कपल यू आर!’ ‘नो वी आर नॉट!’ उसने झल्लाकर कहा। दो शब्दों में ही उसने मेरे मन के कोने में बसे ऑफिस के सबसे प्यारें जोड़े को चिटकाकर रख दिया। उसे तेज़ी से जाते हुए मैं देख रही थी। कपिल अपने काम में व्यस्त था। मेरा मन ही मुझे उकसाने लगा कि जरा
जाकर पता तो करो आखिर इनके रिलेशनशिप को हो क्या गया है? फाइल उठाई और कपिल के केबिन में नॉक करके भीतर जा पहुंची।
‘हाय कपिल!’ ‘हाय वॢतका! व्ॉट्स गोइंग ऑन!’ ‘यह तो तुम बताओ?’ ‘मैं क्या बताऊं?’
‘वही जो आजकल चल रहा है तुम्हारे और निमि के बीच।’
‘नथिंग मच यार!’ ‘फिर भी कुछ तो है तुम्हारे और निमि के बीच जो क्लियर नहीं है। तुम्हारी
शादी को अभी दो महीने ही तो हुए हैं और आज निमि तुमसे कुछ उखड़ी हुई है।’

‘हां, होगी न।’ ‘क्यों?’ ‘वर्तिका, इट्स ऑल अबाउट सिचुएशन।’
‘कैसी सिचुएशन? टेल मी हम अच्छे दोस्त हैं।’
‘वही तो, निमि भी जब तक अच्छी दोस्त थी, मंगेतर थी तब तक सब कुछ बहुत अच्छे से हैंडल हो रहा था। सब बहुत रोमांटिक था। जिंदगी चांद-तारों की तरह रोशन थी पर शादी! अब शादी ही उसे बोझ लग रही है।’ ‘कैसा बोझ? जहां तक मुझे पता है तुम लोग तो अकेले ही रहते हो। कोई पारिवारिक मसलह तो है नहीं। फिर कैसा प्रॉब्लम?’ ‘सच कहा तुमने पारिवारिक समस्या तो तब होती जब परिवार होता या वह परिवार बनाना ही चाहती। उसने तो पहले ही कहा था कि वह बेबी नहीं करेगी।’
‘हां, यह तो तुमको पता ही था। बल्कि पूरे ऑफिस को पता था कि उसे अपना करियर बनाना है। फैमिली नहीं बनानी है और तुम ऐसी सिचुएशनशिप के लिए तैयार भी थे। फिर?’
‘बट नाउ शी कंसीव्ड।’

‘ओह!’
‘वह अपनी कंडीशनल सिचुएशनशिप पर अभी भी कायम है पर मैं नहीं रह पा रहा हूं। जब मुझे पता है कि मेरा अंश उसके पास है तो मैं कैसे अपने हाथ से ही अपना फूल मसल दूं। मुझे मेरा बेबी चाहिए ही चाहिए।’ ‘फिर?’ ‘फिर क्या? हमारा रिश्ता भी कोर्ट पहुंच गया है।’ मैं कपिल के केबिन से उठकर बाहरचली आई। कपिल की आंखों में अपने वजूद के लिए एक भूख थी। निमि के आत्मविश्वास से भरे कदम कहीं भी लड़खड़ाते हुए नहीं दिख रहे थे। न जाने क्यों मेरा माथा घूमने लगा। पिछले सारे वाकये सामने धूलकण की तरह वातावरण में घुलने लगे। मानव जैसे मेरे बिल्कुल करीब ही खड़ा हो मुझे उसका एहसास अपने बदन पर रेंगता हुआ महसूस हुआ। अपनी सीट पर बैठते हुए भी वह मुझे अपने सामने ही प्रतीत हो रहा था। मानव की कही बात आज फिर चुभने लगी थी। ‘देखो वर्तिका, कमी मुझमें नहीं तुममें है तो सफर मैं और मेरी फैमली क्यों करे? मैं अपने परिवार का इकलौता
बेटा हूं। मेरी माँ को अगर वारिस चाहिए तो इसमें बुरा क्या है?’ ‘हम कोई बच्चा गोद भी तो ले सकते
हैं?

मैंने लगभग गिड़गिड़ाते हुए कहा था। जिस पर मानव की मां ने स्त्रीत्व में पनपने वाले सारे कोमल भाव नफरत की भट्टी में झोंकते हुए कहा, ‘जब बीज में कोई कमी नहीं है वर्तिका, तो बंजर कोख की वजह से मैं अपने खानदान का नामलेवा किसी और के खून में क्यों ढूंढती घुमू? कुछ और करने से कहीं बेहतर होगा कि हम नई कोख तलाश लेंगे। बस तुम सहजता से अपनी सहमति देकर अलग हो जाओ नहीं तो रास्ते तो बहुत है।’

‘जानती हूं मम्मा, कि रास्ते बहुत हैं पर मैं मानव से प्यार करती हूं। हम कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे।’ ‘नहीं वर्तिका, मैं मां हूं और मैं जानती हूं कि प्यार भी तभी तक अच्छा लगता है जब तक उसके सामने कोई बड़ी समस्या न आए और तुम्हारा खालीपन मेरे घर को खा जाएगा।’
उस रोज अगर मानव ने एक बार भी मेरा साथ दिया होता तो आज हमारे रिश्ते की सिचुएशन कुछ और होती। लेकिन मानव को भी अपने अंश की पड़ी थी। हमारा रिश्ता भी कोर्ट में दम तोड़ गया। जबकि साइंस ने कितनें ही रास्ते खोल दिए है किंतु जब दिल की राह ही बदल चुकी हो तो फिर कोई
क्या कर सकता है? पांच साल से हम अलग हैं। मानव अभी तक पिता नहीं बने हैं। यह अलग बात कि ऋद्धि को गोद लेकर मैं मातृत्व का सुख पा रही हूं। मैंने कभी करियर के लिए पारिवारिक सुख की आहुति नहीं दी। परिवार ने जरूर अपने सुख के लिए मेरे प्रेम की बलि ले ली। निमि और
कपिल का विवाह तो था ही एक एग्रीमेंट किंतु हमने तो विवाह में प्रेम तलाशा था। मां कहती थी कि प्रेम में विवाह करो तो नया कुछ नहीं लगता, विवाह में प्यार तलाशो तो जीवन महकने लगता है। मैं अपनी दुनिया में महक तलाशती रही और सड़ी हुई सोच ने हमारे रिश्तों में दुर्गन्ध भर दी।

मैं अपनी सोच में थी कि अकाउंट डिपार्टमेंट की इशिता ने आकर आवाज दी, ‘वर्तिका जी, कहां खोई हैं? सुनिए, आपको कुछ बताना है।’ ‘हां इशिता, बताओ न।’ ‘आई एम इन रिलेशनशिप।’ सुनते ही मेरे मुंह से निकला, ‘सिचुएशनशिप या फिर अन कंडीशनल रिलेशनशिप?’ मेरे प्रश्न से इशिता सोच में पड़ गई। वह बोली, ‘एकचुली आई एम नॉट स्योर!’

कभी सोचकर देखो हम कहां जा रहे हैं? हम जिस देश के वासी हैं वहां रिश्ते इस तरह नहीं
जन्मते थे। सियाराम के वंशज हैं हम, राधकृष्ण का मधुर मिलन है जीवन! फिर क्यों हम
पाश्चात्य सभ्यता के पीछे सब कुछ भूलते जा रहे हैं।

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मेरे भीतर तक तड़प उठी। मेरा कोई हक नहीं था अपनी कलीग पर इस तरह झल्लाने का किंतु मैं काबू में न रह सकी और मैंने कहा, ‘कभी सोचकर देखो हम कहां जा रहे हैं? हम जिस देश के वासी हैं वहां रिश्ते इस तरह नहीं जन्मते थे। सियाराम के वंशज हैं हम, राधकृष्ण का मधुर मिलन है जीवन! फिर क्यों हम पाश्चात्य सभ्यता के पीछे सब कुछ भूलते जा रहे हैं। सच तो यह है कि हम बस अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं। कभी सोच कर देखो इससे क्या मिलेगा और हम क्या देकर जाएंगे
समाज को?’

मैं उत्तेजना में हाफ रही थी और लोग मुझे सुन रहे थे। मैं एक झटके में ऑफिस से बाहर आ गई सबके लिए एक यक्ष प्रश्न छोड़ते हुए घर की तरफ बढ़ चली। मुझे ऋद्धि को इस बहाव से बचाना था।ठान लिया था कि मैं ऋद्धि के संस्कार इतने मजबूत करूंगी और उसे रिश्तों के लिए समर्पण सिखाऊंगी।