Unchaiyon se Bhare Sapne
Unchaiyon se Bhare Sapne

Story in Hindi: धरती से कोसों ऊपर आसमान में मीलों की गति से उड़ते आसमां में बैठी वो आँखें सफ़ेद बादलों में डूबी थी। अभी कुछ क्षण हीं हुआ था कि एक सिग्नल की आवाज से वो उठी सीट नंबर सिक्स इ के पास जाकर उसने मुस्कुरा कर कहा,
“हेलो मैम, व्हाट यू नीड?”
                                    उसकी एयर होस्टेस वाली ड्रेस पर लगे बैच पर लिखा था, “रैना नीलेश” उसने उस सीट वाली यात्री को गर्म पानी का एक ग्लास लाकर दिया और फिर अपनी जगह पर आकर बैठ गयी। आज रैना भी करीब सालों के बाद घर जा रही थी। गाँव की मिटटी को छोड़े उसे एक अरसा हो गया था। पिता के महानगर में सिफ्ट होने के बाद, उनलोगों का गाँव से नाता टूट सा गया था। दादा-दादी हीं कभी-कभी शहर आ जाया करते थे। धीरे-धीरे स्कूल से कॉलेज और फिर एयर होस्टेस में चुनाव ने बाकी सबकुछ बदल कर रख दिया था। अब तो ये आसमान हीं नया घर बन चूका था, रैना का। कभी-कभी काम से फुर्सत होती तो माता-पिता बस। पर कल पिता जी ने फ़ोन कर कहा, गाँव चलना है सभी को, दादी की तबियत बहुत खराब है, तो छुट्टी आवश्यक हो गयी।

एयरपोर्ट से टैक्सी लेकर बसस्टैंड का सफर और फिर गाँव की बस लेते हुए रैना को अजीब सा महसूस हो रहा था। बस ड्राइवर ने स्थानीय संगीत लगा कर बस को आगे बढ़ाया तो रैना की आँखें धूल उड़ाते रास्तों पर जा टिकीं, और यादों के धुंधले सतह पर ताजगी के छींटें पर गए।

बचपन, गाँव की मुंडेर का नाम हुआ करता था, और सपने आसमान की उड़ान जैसे। आठ साल की उम्र में हीं गाँव की पगडंडियों पर दौड़ते हुए जब एक दिन सर के ऊपर से उड़ते हवाई जहाज को देखा बस उसी दिन सोच लिया था कि ये हवाईजहाज हीं उसकी दुनिया बनेगी। साथ में खेलते कपिल को उस वक़्त रैना ने कहा, “मैं इसमें अपना घर बनाउंगी, और जहां मर्जी वहाँ उड़ती जाउंगी। बिलकुल पंछियों के जैसे।”
दस वर्षीय कपिल अचानक से रुक गया और थोड़ी देर तक उसने रैना को देखने के बाद कहा,
“तो तू मुझे छोड़कर चली जायेगी?”
“इसमें छोड़ कर जाने की क्या बात है। तू भी चलना मेरे साथ वहीँ इसी जहाज में रहेंगे दोनों।”

कपिल और रैना के पिता पडोसी और बचपन के दोस्त हुआ करते थे। उन्दोनो की दोस्ती हमउम्र होने की वजह से बच्चों की दोस्ती का भी कारण बनी। दोनों साथ-साथ स्कूल जाते और खेलते सुबह का नास्ता इस घर में तो शाम का खाना उस घर मे। कभी भी दोनों ने अलग-अलग रहने के बारे में सोचा भी नहीं था। एक बार रैना की माँ ने कहा, कि “कपिल तू इतना रैना के साथ-साथ ना रहा कर, जब इसकी शादी हो जायेगी तो तू कैसे रहेगा” तो कपिल ने झटके से कहा,
“मैं करूँगा ना, इससे शादी ये कहीं नहीं जायेगी हमें छोड़कर।”

बस में हवा के झोंके के साथ उड़ते अपने बालों को समेटती रैना इन यादों को याद कर मुस्कुरा उठी। होठ स्वतः हीं खुल गए और कपिल ये नाम उसने खुद से कहा। यादों ने फिर करवट ली और उसे याद आया, कि  कपिल बचपन में उसका हीरो हुआ करता था, सिर्फ सबसे अच्छा दोस्त हीं नहीं बल्कि सब कुछ। वो उसके लिए सबकुछ करता, उसका पसंदीदा खाना बनावाकर टिफिन में लेकर आता। अपनी चॉक्लेट खुद नहीं खाता बल्कि उसके बैग में चुपके से रख देता। कोई परेशान करता तो जाकर उससे लड़ लेता।                                                                                

यादों में अचनाक वो ख़ास दिन सामने आया जब मौसी की शादी के लिए पूरा परिवार नानी के गाँव गए थे, और हफ्ते दिन बाद वापस आये तो पता चला कि कल से सातवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाएं थी। सुबह जब कपिल उसे लेने घर आया तो वो घबराई हुई थी, उसने अच्छे से पढाई नहीं की थी, परीक्षा में क्या लिखती। कुछ सोच कर उसने परीक्षा वाले राइटिंग पैड के साथ विज्ञान की किताब भी बैग में डाल ली थी। शादी के किस्सों को कहते-कहते स्कूल आ गया तो दिल की धड़कन परीक्षा के पन्नों की तरह फड़फड़ाने लगी।

अभी परीक्षा शुरू हुए घंटा भर हुआ था तो शिक्षक बच्चों को हिदायत देकर क्लास से बाहर निकले। रैना ने  हिम्मत करके कांपते हाथों से अपनी जेब से किताब के वो फटे पन्ने निकाले और जवाब लिखना शुरू कर दिया। पांच मिनट बाद शिक्षक वापस कक्षा में आये और उन्होंने सब बच्चों पर एक सरसरी निगाह डाली। रैना राइटिंग पैड के नीचे उन पन्नों को छिपा कर उत्तर लिख रही थी कि तभी किसी की आवाज आयी कि  सर रैना चीटिंग कर रही है। ये आवाज सुबोध की थी। रैना की धड़कन रुक सी गयी, उसने हड़बड़ी में उन पन्नों को बेंच के नीचे फेंक दिया।

शिक्षक उसकी सीट पर आये और उन्होंने नीचे गिरे पन्नों को देखा तो उसे उठा कर कड़कती आवाज में कहा, “तुम चोरी कर रही थी।” रैना की आवाज बंद पड़ गयी और आँखों में आंसूं लबलबा गए, उसे पता था कि  वो पकड़ी गयी और अब कुछ भी नहीं हो सकता तो उसने सच बोलने की सोची कि तभी उसकी पिछली सीट पर बैठे कपिल ने खड़े होकर शिक्षक से कहा, “सर ये मेरे किताब के पन्ने हैं, रैना नहीं मैं ये लेकर आया था।”

शिक्षक ने कपिल को बहुत डांटा और उसकी उत्तरपुस्तिका उसी वक़्त जब्त कर, उसे कक्षा से निकाल दिया। रैना चाह कर भी कुछ बोल नहीं पायी, जब वो परीक्षा ख़त्म कर बाहर आयी, तो रोज की तरह कपिल उसका घर जाने के लिए इंतज़ार कर रहा था। रैना ने उससे कहा, कि  “तुमने मेरी चीटिंग को अपना क्यों कहा, अब तुम फेल हो जाओगे तो?” जिसपर कपिल ने कहा, “तुमने हीं  तो कहा था कि तुम्हें आसमान में उड़ना है, मैं फेल हुआ भी तो जमीन पर रहूँगा पर अगर तुम फेल हो जाओगी तो आसमान तक कैसे पहुँचोगी? आगे से ऐसा मत करना मेहनत कर के आगे बढ़ना ताकि मुझे तुम्हें बचाने के लिए कभी फेल ना होना  पड़े। वादा करो की तुम एक दिन आसमान की ऊंचाइयों तक जरूर पहुँचोगी।” रैना ने अपना हाथ बढ़ा कर उससे वादा किया।

बस ने झटका खाया तो रैना की आँखें खुली, कंडक्टर उसके गाँव का नाम पुकार रहा था। सब बदल चूका था, उसकी यादों में जो गांव था, ये जगह उससे बिलकुल विपरीत लग रही थी। दादी से मिलकर वो कपिल के घर की तरफ बढ़ी। उसके घर की किवाड़ खटखटायी तो कपिल की माँ ने दरवाजा खोला और रैना को देख कर कुछ पलों के लिए तो वो उसे पहचान नहीं पायी पर फिर पहचाना तो गले लगाकर रो पड़ी।

रैना ने कपिल के बारे में पूछा तो उसकी माँ ने उसे उसके कमरे का दरवाजा दिखा दिया। रैना ने कांपती और उत्साहित धड़कनों से उसके दरवाजे पर दस्तक दी पर कोई आवाज नहीं आयी तो उसने बाहर से हीं  कहा, “कपिल, मैं हूँ रैना। भूल गए क्या?” पर अभी भी कोई आवाज नहीं आयी तो उसने उस दरवाजे को हल्की ठोकर दी, जिससे वो दरवाजा खुल गया और रैना ने अंदर प्रवेश किया। बल्ब की पीली रौशनी में फिर रैना ने देखा वयस्क हो चुके कपिल को, वही मासूमियत वही आँखें पर व्हीलचेयर पर। उसके पैरों का हिस्सा गायब था। रैना की चीख निकल गयी, उसने पूछा ये सब कब कैसे? तुमने मुझे कुछ बताया क्यों नहीं? किसी नहीं मुझे ये क्यों नहीं बताया?”

रैना की चीख सुनकर कपिल की माँ उस कमरे में पहुंची और फिर रैना की प्रतिक्रिया पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, “तुम्हें नहीं पता था? तुम लोगों के यहां से जाने के बाद बारहवीं की परीक्षा देने के लिए जब कपिल शहर गया था, लौटते वक़्त उसकी बस का एक्सीडेंट हो गया।” कपिल ने रैना को सांत्वना देते हुए कहा, “अरे ये सब तो बस ऐसे हीं, तुम बताओ कैसी हो?” रैना को कुछ समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे, और क्या बोले? की तभी उसके मोबाइल की घंटी बजी, उसने स्क्रीन पर देखा तो अमित लिखा हुआ था। अमित उसका प्यार और उसका मंगेतर। उसने किसी तरह से कुछ वक़्त उस कमरे में बिताया और फिर बाहर निकली तो आँखों से अश्रु की धारा बह रही थी।

कपिल जिससे उसे बचपन में हीं  प्यार हो चूका था, पर समझने में वर्षों लग गए, पर जब तक समझ आया ज़िन्दगी उसे बहा कर कोसों दूर ले गयी थी। और आज जब वो यहां पहुंची तो, भी तब जब ज़िन्दगी ने उसे नए आयामों में बाँध रखा था। उस कमरे से निकलते वक़्त रैना ने जब कपिल से कहा था,
“मैं जानती हूँ, तुम मुझसे प्यार करते थे। मैं भी करती थी बचपन से, फिर कभी कुछ कहा क्यों नहीं?” उस पर कपिल ने जवाब दिया था, “मैंने जब तुम्हें ये कहने का निर्णय लिया तब तक ज़िन्दगी ने मुझे अपाहिच बना दिया। तुम्हें आसमान की ऊंचाइयों को छूना था, रैना और मैं तो धरती पर भी नहीं चल सकता ऐसे में मैं तुम तक कैसे आता। मेरे लिए मेरे प्रेम की सार्थकता तुम्हारी खुशी और तुम्हारी कामयाबी है, तुम इसे बढ़ाती रहो मुझे लगेगा कि मैं भी तुम्हारे साथ कामियाब हो गया।”