Summary: Gen Z Intelligence Decline: क्या नई पीढ़ी सच में मिलेनियल्स से कम समझदार हो रही है?
हालिया रिसर्च बताती है कि Gen Z में ध्यान, पढ़ने और गहरी सोच जैसी क्षमताओं में गिरावट दिख रही है। इसके पीछे अनियंत्रित टेक्नोलॉजी उपयोग, कम पढ़ने की आदत और डूमस्क्रॉलिंग को बड़ी वजह माना जा रहा है।
Gen Z IQ Drop: आजकल सोशल मीडिया पर एक बहस तेज़ हो चुकी है, क्या Generation Z यानी Gen Z, मिलेनियल्स यानी अपने माता-पिता से कम समझदार या कम तेज़ दिमाग वाली होती जा रही है? यह सवाल सिर्फ मज़ाक या ट्रोलिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इस पर गंभीर रिसर्च और नीतिगत चर्चाएं भी होने लगी हैं। हाल ही में आई कुछ रिपोर्ट्स और स्टडीज़ ने इस बहस को और हवा दे दी है।
रिपोर्ट क्या कहती है?
एक हालिया अध्ययन के अनुसार, Gen Z (जो 1990 के आख़िर से 2010 के शुरुआती सालों में पैदा हुई) कुछ बुनियादी मानसिक क्षमताओं में अपने माता-पिता यानी मिलेनियल्स से पीछे दिख रही है। इनमें ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, याददाश्त, समस्या सुलझाने की समझ और कुल मिलाकर IQ जैसे पैमाने शामिल हैं। यह पहली बार माना जा रहा है कि कोई नई पीढ़ी, पिछली पीढ़ी से इन मामलों में कम स्कोर कर रही है।
यह निष्कर्ष अमेरिकी सीनेट को दी गई एक रिपोर्ट में सामने आया, जिसे न्यूरोसाइंटिस्ट और एजुकेटर डॉ. जेरेड कूनी हॉर्वाथ ने प्रस्तुत किया था। उन्होंने बताया कि पिछले 20 सालों में विकसित देशों में पढ़ने-लिखने, गणितीय समझ और गहरी सोच जैसी क्षमताएं या तो रुक गई हैं या फिर उल्टा घटने लगी हैं।
टेक्नोलॉजी: मददगार या नुकसानदायक?
डॉ. हॉर्वाथ के अनुसार, इसका एक बड़ा कारण क्लासरूम में डिजिटल टेक्नोलॉजी का तेज़ और बिना नियंत्रण के बढ़ता इस्तेमाल है। स्मार्टफोन, टैबलेट, AI टूल्स और ऑनलाइन कंटेंट को शिक्षा का भविष्य बताया गया, लेकिन हकीकत में कई जगह ये चीज़ें सीखने को आसान बनाने के बजाय दिमागी मेहनत को कम कर रही हैं। अब सवाल यह नहीं है कि टेक्नोलॉजी बुरी है या अच्छी, बल्कि यह है कि क्या हम इसका सही तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं।
गहरी पढ़ाई की कमी
पहले किताबें पढ़ना बच्चों और युवाओं का पसंदीदा शौक हुआ करता था। आज स्थिति यह है कि पढ़ाई तो दूर, कई छात्र जानकारी पाने के लिए भी पूरा लेख पढ़ने से बचते हैं। अमेरिका और ब्रिटेन में हुए सर्वे बताते हैं कि 8 से 18 साल के केवल एक-तिहाई बच्चे ही खाली समय में पढ़ना पसंद करते हैं, और रोज़ पढ़ने वालों की संख्या तो और भी कम है।
कोविड-19 के दौरान स्कूल बंद होने से यह समस्या और बढ़ गई। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च के मुताबिक, छोटे बच्चों की पढ़ने की गति और समझ में करीब 30% तक गिरावट आई, खासकर कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले इलाकों में।
Doomscrolling: नई आदत, नई समस्या
Gen Z में देर रात तक मोबाइल पर लगातार नकारात्मक खबरें और शॉर्ट वीडियो देखते रहने की आदत, जिसे ‘डूमस्क्रॉलिंग’ कहा जाता है, तेज़ी से बढ़ी है। इससे न सिर्फ चिंता और तनाव बढ़ता है, बल्कि ध्यान लगाने की क्षमता भी कमजोर होती है। दिमाग को गहराई से सोचने और किसी एक विषय पर टिके रहने की आदत ही नहीं बन पाती।
शिक्षक भी मानते हैं कि आज के छात्रों को लंबे लेख, जटिल तर्क और गहरी चर्चा में दिलचस्पी बनाए रखना मुश्किल लगता है।
समाधान क्या हो सकता है?
पढ़ने की आदत को फिर से ज़िंदा करना: डिजिटल कंटेंट के साथ-साथ गहरी और ध्यान से पढ़ने की आदत सिखानी होगी।
स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण: टेक्नोलॉजी सीखने का साधन बने, उसका विकल्प नहीं।
इंटेलिजेंस की परिभाषा बदलना: सिर्फ नंबर और IQ नहीं, बल्कि रचनात्मक सोच, नैतिक समझ और डिजिटल समझ को भी महत्व देना होगा।
