Motivation Story in Hindi: ” शीतल हवाओं का आना और जाना लगा हुआ था समय का हाथ पकड़कर चांदनी रात आगे बढ़ रही थी कुछ ख्यालों ने अपनी चहल – पहल शुरू करके वातावरण में सभी का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करना शुरू कर दिया था। अभिषेक अपने कमरे की बालकनी में खड़े होकर आसमान को देख रहा था उसके मन में मधुरता का जन्म होने लगा था कुछ लिखने की इच्छा का जन्म अभिषेक के मन में होता है क्योंकि पिछले कुछ सालों से अभिषेक सिर्फ चिकित्सा पद्धति की किताबों और चीजों को पढ़कर याद करने में व्यस्त था। आज कुछ लिखने का विचार उसे साहित्य की दुनिया में जाने का अवसर देने लगा। चिकित्सा पद्धति में कितनी ” तपस्या ” करनी होती है। शायद यह मेरी ” आत्मबल की ज्योति ” को प्रज्ज्वलित करने में सहायक नहीं है “। अपने मन में इन विचारों को देखकर अभिषेक बालकनी का दरवाजा बंद करके अपनी कुर्सी पर बैठकर पढ़ने की मेज़ पर किताबों के पास रखे हुए फोन को उठाता है अस्पताल के निरीक्षक का फोन बार – बार आ रहा था। यह देखकर वह घबराने लगता है और अस्पताल के निरीक्षक को फोन करता है और अस्पताल के निरीक्षक अभिषेक को बताते हैं कि जिस मरीज को उसकी निगरानी में रखा गया था उसकी तबियत बिगड़ने लगी है उसको जल्दी अस्पताल पहुंचना चाहिए।
अभिषेक यह सुनकर परेशान होने लगता है और अस्पताल के लिए निकल जाता है उसके घर और अस्पताल के बीच की दूरी बहुत अधिक थी। वह किसी रिक्शे का इंतजार करने लगता है और सोचने लगता है इसका जिम्मेदार कौन है ? उसकी आंखें नम होने लगती हैं तभी एक रिक्शे की आवाज आती है और रिक्शा उसके नजदीक पहुंच जाता है। अभिषेक रिक्शे में बैठ जाता है। कुछ ही पलों के बाद रिक्शे वाला कहता है – ” साहब लगता है आप चिकित्सक हैं बहुत अच्छा काम है आपका मरीजों का इलाज करना उनकी तकलीफों को दूर करना आपका जीवन स्वयं एक ” तपस्या ” है और आप एक तपस्वी हैं जो स्वयं की ” तपस्या ” के द्वारा इस संसार में सभी प्राणियों की ” आत्मबल की ज्योति ” को प्रज्ज्वलित करते हैं चिकित्सक बनना बहुत मुश्किल है आपको दिन और रात मेहनत करनी पड़ती है “। एक रिक्शे वाले के द्वारा इस प्रकार की बातों को सुनकर अभिषेक के मन में चल रहे पलायन के विचारों को उनका प्रतिरोधक मिल जाता है। अभिषेक पूरे रास्ते चुपचाप उस रिक्शे वाले को देखता रहता है। कुछ देर बाद अभिषेक अस्पताल पहुंच जाता है और वह अस्पताल निरीक्षक को ढूंढने लगता है। मन में रुके हुए विचारों का सिलसिला अब गति लेने लगता है।
अस्पताल के निरीक्षक अभिषेक को देख लेते हैं और उससे कहते हैं – ” अभिषेक यहां आओ तुमसे कुछ बात करनी है “। अभिषेक उनके कक्ष में चला जाता है और थोड़ी देर बाद अस्पताल निरीक्षक कक्ष में आते हैं और अभिषेक से कहते हैं – ” अभिषेक तुम बहुत अच्छे विद्यार्थी होने के साथ में अच्छे चिकित्सक बनने जा रहे हो। तुम इतना परेशान और असमंजस में क्यों रहते हो अगर कोई बात है तुम हमें बताओ। तुम जानते हो उस मरीज को दवाएं नहीं मिली थीं। क्योंकि तुम वर्तमान में नहीं थे , तुमको कितनी बार फोन किया गया।अभिषेक हम चिकित्सक की जिंदगी एक ” तपस्या ” होती है हमें इस संसार में स्वयं के साथ सभी प्राणियों की ” आत्मबल की ज्योति ” को प्रज्ज्वलित करना है। अभिषेक हमें लगता है तुमको कुछ दिनों का आराम चाहिए तुम्हें कुछ दिनों का अवकाश दिया जाता है “। इतना कहकर निरीक्षक कक्ष से बाहर चले जाते है। अभिषेक कुछ देर तक वहीं बैठा रहता है और फिर थोड़ी देर बाद कक्ष से बाहर निकलकर उस मरीज को देखकर अस्पताल से अपने घर की ओर निकल जाता है।
अभिषेक घर आकर अपने कमरे की बालकनी में बैठ जाता है और रात का इंतजार करने लगता है पक्षियों का समूह अपने – अपने घोंसलों में वापिस चला जाता है और रात में शरद पूर्णिमा की चांदनी के द्वारा पूरा आसमान प्रकाशमय होने लगा था। अचानक उस रिक्शे वाले की बातें और अस्पताल निरीक्षक के शब्द अभिषेक के कानों में अपनी उपस्थिति दिखाने लगते हैं। अभिषेक आंखें बंद कर लेता है उसकी आत्मा उसका मार्गदर्शन करते हुए कहती है – ” तुम जानते हो ” तपस्या ” का अर्थ होता है आत्मा या मन की आंतरिक शक्ति जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने, स्वयं पर भरोसा करने और सही विचारों को क्रियान्वित करने की क्षमता प्रदान करती है यही ” आत्मबल की ज्योति ” को प्रज्ज्वलित करती है। अभिषेक उठो और तपस्वी बनो यही तुम्हारा धर्म है “। अभिषेक अपनी आंखें खोलता है और अपनी किताबों को पढ़ना शुरू कर देता है और समय का उपयोग अपनी बुद्धिमत्ता के द्वारा करने लगता है अब वह अपने जीवन का अधिकांश समय वर्तमान में उपस्थित होकर कर्मों की प्रधानता में लगाता है।
कुछ ही हफ्तों के बाद अभिषेक के कार्यों की समीक्षा होने लगती है अभिषेक बहुत मन लगाकर अपने चिकित्सक के दायित्व को निभा रहा था सभी मरीजों का ध्यान रखना उनकी दवाएं समय पर देना उनकी रिपोर्ट तैयार करना उनको अवसादों से दूर रखना और जीवन के महत्व को समझाना। यह सभी को अच्छा लगने लगता है। अस्पताल के सभी निरीक्षकों की बैठक होती है जिसमें अभिषेक की सतर्कता और व्यवहार का अवलोकन होता है और अभिषेक को शोध कार्यों के लिए आमंत्रित किया जाता है। चिकित्सा विभाग के अनुभवी चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के सामने अभिषेक अपनी बातों को रखते हुए कहता है – ” जीवन में ” तपस्या ” का बहुत अधिक महत्व होता है। आत्मा या मन की आंतरिक शक्ति जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने, स्वयं पर भरोसा करने और सही विचारों को क्रियान्वित करने की क्षमता प्रदान करती है यही ” आत्मबल की ज्योति ” को प्रज्ज्वलित करती है “। यह मैंने अपने स्वयं के जीवन में अनुभव किया है। आयोजन में अपनी बातों को रखने के बाद अभिषेक अपने कमरे की बालकनी में खड़े होकर आसमान की तरफ देखकर चांदनी की शीतलता को महसूस करके मुस्कुराने लगता है।
