Hindi Love Story: शिमला के पांच सितारा होटल की एक हाॅल में इंटरनेशनल मीटिंग चल रही थी जहां सब ऊंची पदवी के लोग अपने विचार साझा कर रहे थे। अभिषेक भी उन्हीं लोगों का हिस्सा था। वह ध्यान से सब के विचार सुन रहा था कि तभी स्टेज पर घोषणा होती है, “ अब आपके सामने अपने विचार प्रस्तुत करने आ रही हैं मिस संजना।” अभिषेक ने आंखें ऊपर करके स्टेज की तरफ़ जैसे देखा तो वह देखता रह जाता है।
सीढ़ियों से स्टेज पर चढ़ते हुए उसे संजना दिखती है… वही संजना जिसे उसने पहली बार अपने दोस्त उदय
की शादी में देखा था। वह उसके दोस्त की बहन की सहेली थी। अभिषेक ने बाद में अपने दोस्त उदय से कहा
भी था। उसके बाद कईं बार उदय के घर पर उन दोनों का किस्मत से एक दो बार टकराना हुआ था पर बहुत
कम वक्त के लिए। या तो अभिषेक आ रहा होता था और संजना जा रही होती थी या कुछ और।
वैसे तो अभिषेक एक बहुत ही खूबसूरत और आकर्षक नौजवान था पर संजना के लिए ना तो अभिषेक
मायने रखता था न ही वह टकराना। वह शायद उसे ठीक से पहचानती भी नहीं थी। संजना के लिए उसका
इम्तिहान जो उसे बड़ी ऊंची सरकारी पदवी दिला सकता था वह ज़्यादा ज़रूरी था।
वक्त के साथ पता नहीं चला के कब दोस्तों का मिलना कम हुआ और साथ ही साथ उन दोनों का भी। इससे
पहले अभिषेक कुछ कह पाता संजना आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चली गई थी और अभिषेक भी अपना
करियर बनाने में जुट गया था। आज जब इतने वक्त के बाद संजना को उसने देखा तो सोचने लगा… “मिस
संजना??? क्या यह भी मेरी तरह अकेली है?”
कॉन्फ्रेंस खत्म हुई तो सब लोग लंच के लिए चले। वहां अभिषेक ने आगे बढ़कर संजना से बात शुरू
करी, “हाय! पहचाना? संजना, “देखा तो लग रहा है पर सॉरी याद नहीं आ रहा।” “मैं अभिषेक, उदय का दोस्त।
उसके घर मिलना हुआ था।”अभिषेक बताता है। संजना याद करते हुए कहती है, “ हां याद आया। कैसे हो
और यहां….?”

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अभिषेक अपने काम और ओहदे के बारे में संजना को बताता है। संजना और वह साथ में खाना खाते हैं।
तीन दिन की कॉन्फ्रेंस में दोनों का मिलना हुआ और कुछ दोस्ती सी भी हो गई। उसके बाद कभी-कभी
मिलना भी हुआ और इस दौरान अभिषेक को पता चला कि संजना तलाकशुदा है और उसके एक बेटा है।
संजना बताती है कि उसके काम के बारे में सब कुछ जानते हुए भी उसके पति निलेश ने कभी उसका साथ
नहीं दिया बल्कि हमेशा यह चाहा कि वह उसके नीचे जी हुज़ूरी करती रहे। बेटे के होने के बाद भी निलेश में
कोई बदलाव नहीं आया था। संजना बहुत समझदारी से अपना काम, घर और बच्चे की ज़िम्मेदारी संभाल
रही थी पर निलेश ने उसके काम में हाथ बंटाना तो दूर उल्टा दखल करना शुरू कर दिया था। वह हर बात पर
टोकता, दखल करता और यहां तक की शक भी करने लगा था। उन सब रोज़-रोज़ की बातों से परेशान होकर

संजना ने निलेश और उसका घर छोड़ दिया था। अपने माता-पिता के साथ नए तरीके से ज़िंदगी शुरु करी
और आज उस मुकाम पर थी।
अभिषेक ने कईं दिन तक बहुत सोच विचार किया और अपने घर में भी बात करी। आखिरकार एक दिन वह
संजना से कहता है, “मुझसे शादी करोगी? वादा तो नहीं करता पर तुम्हारा पूरा साथ देने की कोशिश करूंगा।
थोड़ा साथ तुम दे देना। तुम्हारा बेटा हमारा बेटा होगा।‌”
संजना कुछ दिनों का वक्त मांगती है। एक दिन अभिषेक के परिवार वाले संजना के घरवालों से बात
करते हैं और दोनों की शादी हो जाती है।
यूं तो संजना ने अभिषेक को हां कर दी थी पर वह खासकर उसके बेटे के लिए थी। इतने सालों से अकेली
सब सम्हालती हुई पुरानी यादों के अंधेरों के बीच में रहते हुए वह नई ज़िंदगी को पूरे तरीके से स्वीकार नहीं
कर पा रही थी। जब तक अभिषेक एक दोस्त की तरह बातें करता है वह बहुत खुलकर बातचीत करती, बहस
करती, हंसती, गुस्सा करती… पर जब अभिषेक की आंखों में अपने लिए प्यार देखती तो बहुत असहज
महसूस करती। वह उससे कटने सी लग जाती। वह जानती थी कि उसका रवैया गलत है पर चाह कर भी
संजना सहज नहीं हो पा रही थी। कभी डर भी जाती थी कि अभिषेक कहीं उसे छोड़ ना दे। वह एक अच्छा
पति और उसके बेटे के लिए अच्छा पिता था।
इसी उधेड़बुन की वजह से कुछ दिनों की उसने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी।‌ एक दिन वक्त काटने के
लिए वह नौकरानी के साथ अभिषेक के पढ़ने वाले कमरे की सफ़ाई कर रही थी तो उसके हाथ में एक डायरी
आती है। वह बैठकर डायरी खोलकर पढ़ने लगती है तो उसमें उदय की बहन की शादी, अभिषेक का उसको
देखना, अभिषेक के मन की हर बात लिखी थी। पढ़ते-पढ़ते संजना को तब अभिषेक की हर हरकत याद आने
लगती है। डायरी हाथ में लिए वह गहरी सोच में होने लगती है की तभी उस डायरी में से एक लिफ़ाफ़ा गिरता
है।
संजना उसमें से एक चिट्ठी निकाल कर पढ़ती है, “ प्रिय संजना….. पहली बार किसी लड़की को प्रेम पत्र लिख
रहा हूं। जब तुम्हें पहली बार उदय के यहां शादी में देखा था तभी तुमसे प्यार सा हो गया था। उस वक्त मैंने
उदय को और अपने माता-पिता को तुम्हारे बारे में बता दिया था। मैं जानता हूं तुम पढ़ाई करना चाहती हो
और मैं भी तुम्हारा इंतज़ार करने को तैयार हूं। शादी के बाद तुम्हारी नौकरी में तुम्हारा साथ भी दूंगा। हम दोनों
मिल बांटकर नौकरी और घर परिवार संभाल लेंगे। अगर तुम्हारी हां हो तो बालों में यह सुनहरी क्लिप लगा
लेना, मैं समझ जाऊंगा तुम्हारी हां है।” पत्र पर तारीख उस साल की थी जब वह पढ़ाई करने विदेश जाने की
तैयारी कर रही थी।

संजना लिफ़ाफ़े में एक छोटा सा सुंदर क्लिप देखती है। चिट्ठी पढ़कर उसकी आंखों में पानी और होठों पर
मुस्कुराहट हुए बात आती है, “ काश तुम अपना यह पहला प्रेम पत्र मुझे उसी वक्त दे देते।”
थोड़ी देर बाद कुछ सोच कर वह उठती है और शादी की साड़ी निकाल कर बहुत सुंदर तैयार होती है। जैसा
अभिषेक ने अपने प्रेम पत्र में लिखा था ठीक उसी तरीके से वह सुनहरा क्लिप बालों में लगाती है और
दरवाज़े पर अभिषेक का इंतज़ार करने लगती है।