Hindi Love Stories: ” रात का भोजन बन चुका है तो उसे खाने की मेज़ पर रख दीजिए आज हम दोनों साथ में रात का भोजन करेंगे बहुत दिनों से हम दोनों बहुत व्यस्त रहे हैं हमारी ज्यादा बातें भी नहीं हुई हैं शायद आज बातें लंबी चलें आप समय पर अपने घर चले जाना ” सीढ़ियों से ऊपर अपने कमरे की तरफ जाते हुए आकांक्षा अपने घर में खाना बनाने वाली पुष्पा दीदी को यह सब बोलकर अपने कमरे में चली जाती है। थोड़ी देर बाद आकांक्षा खाने की मेज़ को देखकर पुष्पा दीदी से पूछती है – ” आज खाने में क्या बनाया है दीदी ? पुष्पा दीदी कहती हैं – ” जी आज रात का खाना आपके और साहब का मनपसंद है “। घड़ी की घंटी बजती है उसकी आवाज को सुनकर दोनों घड़ी की तरफ देखने लगते हैं और फिर आकांक्षा कहती है – ” पुष्पा दीदी आप घर चले जाओ बहुत रात हो गई है “। पुष्पा दीदी कहती हैं – ” जी , भोजन खाने की मेज़ पर रख दिया है , मैं अब चली जाती हूं “। समय अपनी रफ्तार से चल रहा था और इंतजार समाप्त होने से अभी बहुत दूर था मन धीरे – धीरे मायूस होने लगा था क्योंकि अभिषेक अभी तक घर नहीं आया था। आकांक्षा बालकनी में जाकर टहलने लगती है और कुछ ख्यालों में खोने लगती है आजकल ” बेवफ़ा सनम ” का दौर चल रहा है क्या हम भी इसमें शामिल हैं क्या हमारी मोहब्बत भी ” अधूरी मोहब्बत ” की पठकथा लिख रही है।
अचानक गाड़ी की आवाज आती है आकांक्षा नीचे देखती है अभिषेक गाड़ी से निकलता है और किसी को अलविदा कहकर घर में दाखिल होने लगता है और फिर गाड़ी कुछ पलों बाद चली जाती है। आकांक्षा सोचने लगती है ” अभिषेक के पास खुद की गाड़ी है फिर वह किसी अन्य की गाड़ी से घर क्यों आए हैं और यह था कौन ? ” कुछ ही पलों में अभिषेक कुर्सी पर अपना बैग रखकर आवाज देता है – ” आकांक्षा , आकांक्षा अरे कहां हो “। आकांक्षा कुछ पलों में उसके सामने खड़ी हो जाती है। अभिषेक कहता है – ” अरे कहां चली गई थीं मैं सोने जा रहा हूं आज बहुत थक गया हूं दफ्तर में बहुत काम था “। आकांक्षा खाने की टेबल को देखते हुए अभिषेक से कहती है – ” अभिषेक आओ आज साथ में खाना खाते हैं सबकुछ हमारी मनपसंद का बना हुआ है आओ ” आकांक्षा खाने को परोसते हुए अभिषेक की तरफ देखती है अभिषेक सीढ़ियों से अपने कमरे में सोने के लिए चला गया था उसकी बातों को नजरअंदाज करते हुए। आकांक्षा सोचने लगती है – ” क्या यह वही अभिषेक है जो कॉलेज के दिनों में हमेशा मेरी बातों को सुनने के लिए तैयार रहता था। जो हमेशा सिर्फ मेरी ही सुनता था या यह कोई और अभिषेक है क्या मेरा अभिषेक भी ” बेवफ़ा सनम ” की सूची में शामिल है क्या मेरी मोहब्बत भी ” अधूरी मोहब्बत ” की पटकथा में किसी उपन्यास के रूप में रह जाएगी।
अगली सुबह आकांक्षा चाय – नाश्ता लेकर कमरे में पहुंच जाती है वह अभिषेक को जगाने का प्रयास करती है मगर अभिषेक गहरी नींद में सपनों की दुनिया में होता है। तभी अभिषेक के फोन की घंटी बजती है आकांक्षा कहती है – ” अभिषेक आपके फोन की घंटी बज रही है मैं देखती हूं कौन है “। तभी अभिषेक कहता है – ” रुको मैं देखता हूं “। और फिर बालकनी में चला जाता है आकांक्षा सोचने लगती है – ” अभिषेक अभी गहरी नींद में थे और अचानक आखिर कौन है यह , मैंने जगाया तब यह कुछ बोले नहीं “। कुछ देर बाद दोनों खाने की टेबल पर चाय – नाश्ता करने लगते हैं। आकांक्षा पूछती है – ” अभिषेक आज बाहर चलें बाहर घूमेंगे और खाना भी बाहर ही खाएंगे आप बताओ कब चलना है “। अभिषेक फोन में व्यस्त था वह बिना कुछ बोले चाय – नाश्ता करके अपने दफ्तर के लिए निकल गया। आकांक्षा बालकनी में जाकर उसे देखने लगी कल रात वाली गाड़ी में अभिषेक बैठकर दफ्तर के लिए निकल जाता है। वह कमरे में चुपचाप बैठी रहती है। उसके पास में एक मेज़ पर एक पत्रिका रखी हुई थी जिस पर लिखा था ” अधूरी मोहब्बत ” जन्म देती है ” बेवफ़ा सनम ” को। इसे पढ़कर आकांक्षा परेशान होने लगती है। आकांक्षा अपने मित्र को फोन करती है अपनी भावनाओं को बताने के लिए मगर अचानक वह रुक जाती है क्योंकि अगर यह बात अभिषेक को पता चल जाएगी तो उसे बहुत बुरा लगेगा। वह फोन रख देती है और सोचने लगती है कि उसे क्या करना चाहिए मगर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
कुछ दिनों बाद आकांक्षा अपने मित्र सुनील के साथ सामान खरीदने के चली जाती है। सामान खरीदने के बाद वह दोनों कॉफी पीने चले जाते हैं। कॉफी पीते हुए सुनील को अभिषेक दिखाई देता है अभिषेक को किसी लड़की के साथ में कॉफी पीते हुए देखकर सुनिल कहता है – ” आकांक्षा तुमने कहा था कि अभिषेक अपने दफ़्तर में व्यस्त है मगर वह तो यहां मेरे सामने एक लड़की के साथ में कॉफी पीते हुए नजर आ रहा है “। आकांक्षा कहती है – ” सुनील मज़ाक मत करो , अभिषेक अपने दफ़्तर में काम कर रहे हैं चलो कॉफी का स्वाद लेकर घर चलते हैं “। सुनील कहता है – ” आकांक्षा विश्वास करो , आओ मेरे साथ “। इतना कहकर सुनील आकांक्षा का हाथ पकड़कर उसे अभिषेक की तरफ ले जाने लगता है मगर अभिषेक गाड़ी में बैठकर वहां से चला जाता है। आकांक्षा गाड़ी को पहचान लेती है कि यह वही गाड़ी है जिसमें बैठकर अभिषेक अपने दफ़्तर जाता है एक रहस्यमयी गाड़ी। सुनील और आकांक्षा अपने – अपने घर पहुंच जाते हैं। घर पहुंचकर आकांक्षा रोने लगती है कि शायद अब उसकी यह मोहब्बत ” अधूरी मोहब्बत ” बनकर रह जाएगी उसका पति अभिषेक अब किसी और से प्यार करता है अभिषेक अब ” बेवफ़ा सनम ” बन चुका है और वह उसका अतीत बन चुकी है।
कुछ दिनों के बाद आकांक्षा यह निश्चय करती है कि अब अभिषेक से इस विषय पर बात करना जरूरी है। आकांक्षा शाम को अभिषेक से कहती है – ” अभिषेक मुझे आपसे कुछ जरूरी बात करनी है “। अभिषेक कहता है – ” बताओ क्या बात करनी है “। आकांक्षा कहती है – ” कुछ दिनों से एक गाड़ी आपको दफ़्तर लेकर जाती है और देर रात आपको घर छोड़ने भी आती है कौन है वो और आपकी अपनी गाड़ी कहां है “। अभिषेक कहता है – ” मेरी गाड़ी कुछ दिनों से ख़राब है और वो गाड़ी मेरे दफ़्तर में साथ में काम करने वाली प्रगति की है “। आकांक्षा कहती है – ” कल शाम को कॉफी पीने चलते हैं “। अभिषेक कहता है – ” ठीक है कल शाम को चलते हैं आप तैयार रहना “। इतना कहकर अभिषेक अपने लैपटॉप में काम करने लगता है , आकांक्षा थोड़ा खुश होकर सोने के लिए चली जाती है। कुछ देर बाद आकांक्षा की आंखें अचानक खुल जाती है वह देखती है अभिषेक बिस्तर पर नहीं है वह घर में अभिषेक को ढूंढती है फिर उसे कुछ आवाज़ें आती हैं -” मैं कल शाम को तुमसे मिलने जरूर आऊंगा कल आकांक्षा को बहाना बनाकर तुमसे मिलने आ जाऊंगा “। इतना सुनने के बाद आकांक्षा की आंखों में आंसू आने लगते हैं वह अपने आंसुओं को छुपाकर अपने कमरे में सोने चली जाती है। अभिषेक कुछ पलों के बाद चुपचाप आकर लैपटॉप में काम करने लगता है आकांक्षा के मन में चल रहे ” अधूरी मोहब्बत ” और ” बेवफ़ा सनम ” के सवालों के बारे में अभिषेक को कुछ भी पता नहीं था।
अगले दिन की सुबह आकांक्षा पूछती है – ” अभिषेक आज शाम को कॉफी पीने कहां जाना है “। अभिषेक कहता है ” आकांक्षा आज थोड़ा काम है हम फिर कभी चलेंगे “। आकांक्षा रोते हुए कहती है – ” अभिषेक कितना झूठ बोलोगे अब बोल दीजिए कि आपको अब मुझसे मोहब्बत नहीं है आप किसी और से मोहब्बत करते हो मैंने आपको कल रात में सुना है उस व्यक्ति से बात करते हुए “। आकांक्षा को रोते हुए देखकर अभिषेक कहता है – ” आकांक्षा स्वयं को संभालो और किस व्यक्ति के बारे में आप बोल रहे हो आप जानते हैं उसके बारे में “। आकांक्षा कहती है – ” जानना चाहती हूं उसके बारे में बताओ कौन है वो “। अभिषेक कमरे से पत्रिका लाकर आकांक्षा को देते हुए कहता है – ” अधूरी मोहब्बत ” जन्म देती है ” बेवफा सनम ” को यह एक वास्तविक कहानी है मेरी मौसी की लड़की कुसुम की और हम सभी मिलकर उसका वैवाहिक जीवन बचाने की कोशिश कर रहे हैं जो दिखता है वह सच नहीं होता है “। कुछ देर तक कमरे में खामोशी रहती है फिर इस खामोशी को आकांक्षा तोड़ते हुए कहती है – ” अभिषेक मुझे माफ कर देना मुझसे गलती हुई है “। इतना कहकर आकांक्षा रोने लगती है और फिर अभिषेक उसे गले से लगा लेता है।
