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“एक शुक्रिया जो परिचय है हमारे संस्कारों का”-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Motivational Story: विभा बाजार से लौटी और घर की सीढ़ियां चढ़ने लगी, अचानक उसके हाथ से सब्जी का थैला छूटकर गिर गया। सारी सब्जियां सीढ़ियों पर बिखर गईं। तभी पहली मंजिल पर रहने वाली अलका दौड़कर आई, उसने सब्जियां उठाने में विभा की मदद की। विभा ने सब्जियां थैले में डालीं और चुपचाप चली […]

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नेपोटिज्म—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Motivational Story: सुनील एक गांव का लड़का जो कि बी. ए. पास था और उसके मां बाप ने जीवन बहुत ग़रीबी में बिताया था दूसरे के खेतों में काम करके जो मिलता उसी से घर चलता था , उसी थोड़ी सी पूंजी में पेट काट के किसी तरह बड़े बेटे सुनील को इतना ही […]

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ग्यारह साल का ‘दिल’-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Motivational Story: सुबह के छह बजे हैं। अलार्म तीसरी बार स्नूज़ हो चुका है। प्रियंका आधी नींद में करवट बदलती है। तभी कमरे के बाहर से घबराई हुई आवाज़ आती है, “मम्मी! मेरी मैथ्स की कॉपी नहीं मिल रही… आज टेस्ट है!” ग्यारह साल का खुश। ऊर्जा से भरा, लेकिन हमेशा आख़िरी मिनट पर […]

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चारुलता-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Love Story: उस दिन मौसम साफ़ था, लेकिन न जाने कैसे अचानक बूंदाबांदी शुरू हो गई। चारुलता कुछ भीगती हुई, कुछ हाँफती हुई पेरिस के सेंटर पोम्पिडू में पहुँची, जहाँ मेरे चित्रों की प्रदर्शनी लगी थी। देश के बड़े चित्रकारों में मेरा नाम शुमार किया जाता है, पर उस क्षण मुझे देखकर किसी भी आभा का […]

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सुबह की भूली—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Social Story: “कब लौटोगी ,कहाँ जा रही हो इतना तो बता दो, प्रशान्त ने संयत स्वर में पूछा।”जहन्नुम में… प्रिया ने दाँत पीसकर कहा और बैग में अपना सामान लगभग ठूँसते हुए कैब करके निकल गयी।काश तुमनें जल्दबाजी की बजाय सोच -समझकर निर्णय लेना सीखा होता ,उसके होंठ हताशा में इतना बुदबुदाकर चुप हो […]

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टोकरी भर यादें -गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: जाड़े की सर्द सुबह धूप की तलाश में मैं छत पर पहुँच गई थी और मेरा पीछा करते-करते तुम्हारी यादें भी…हवाई जहाज की एक हल्की सी आवाज़ सुन मैंने अपना सर ऊपर की ओर उठाया।ऊपर सिर्फ़ धुंध ही धुंध थी।सूरज भगवान मेरे साथ आँख-मिचौली का खेल खेल रहे थे या शायद मेरी परीक्षा […]

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खट-खट-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: मोहन ने गंगा नदी के किनारे बालू और कीचड़ में सने लकड़ी के डंडे में फंसे रस्सी को खोला ही था कि नाव धीरे-धीरे आगे की ओर बढ़ गई। वह कूद कर आगे बढ़ा और नाव पर चढ़ गया। पूस की कोहरे भरी सुबह जैसे पूरा संसार सफेद चादर ओढ़ सो रहा हो। […]

Posted inहाय मै शर्म से लाल हुई, हास्य कहानियां: Funny Stories in Hindi

ये शगुन का लिफाफा तुम्हारे लिए नहीं था—हाय मैं शर्म से लाल हो गई

Hindi Funny Story: बात उन दिनों की है जब मेरी नई नई शादी हुई थी और अकसर मेरे पति के दोस्त या रिश्तेदार हमें खाने पर आमंत्रित करते थे। वापसी में वे शगुन भी देते। एक बार इनके बहुत अच्छे मित्र के यहां हम गए। उनसे पहली बार में ही बेहद आत्मीयता हो गई।डिनर के […]

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बात समझ आ गई-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: दरवाजे पर कोई लगातार आवाज दे रहा था। थोड़ी देर सुन कर भी अनसुना करती रही थी प्रिया। उसे लग रहा था कोई ना कोई नीचे आवाज सुनकर दरवाजा खोल ही देगा।  जब प्रिया से रहा न गया तो वो हाथ में वायपर लिए हुए ही बॉलकनी में आकर देखने लगी कि नीचे कौन है? देखा […]

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स्नेह-सुख-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Motivational Story: मणिशंकर ने अपने बेटे मनु को मोहल्ले के बच्चों के साथ स्कूल वैन के पीछे दौड़ते देखा तो उसका दिल भारी हो गया। मनु बार-बार पूछता, “पापा, कब आएगी हमारी कार? सबके पास है। मुझे भी स्कूल कार से जाना है…” सुनयना ने मायके से लौटकर कहा, “अब गाड़ी ज़रूरत नहीं, स्टेटस […]

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