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बचपन की रंगभरी स्मृतियाँ-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Short Funny Story: होली का नाम लेते ही स्मृतियों के आकाश में रंगों की इंद्रधनुषी छटा फैल जाती है। यह केवल अबीर-गुलाल का पर्व नहीं, बल्कि बचपन की चंचल हँसी, शरारती ठिठोली और निश्छल आनंद का जीवंत उत्सव है। मेरे लिए होली, जीवन की उस निश्छल अवस्था का प्रतीक है, जहाँ रंग केवल चेहरे नहीं, […]

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भांग वाली होली —गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Short Funny Story: ”होली है”.. बाहर बच्चे अपने दोस्तों के साथ रंग-गुलाल खेलने निकल चुके थे। उनके साथ-साथ आँगन और गली भी रंगो में नहा गई थी, उनकी मस्ती देखकर ज़हन में एक स्मृति की लहर उठी और मैं अनायास ही मुस्कुरा दी। रंगों भरा ये त्योहार हर बार जीवन में कुछ नए रंग बिखेर […]

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” प्यार भरा गुलाल”-गृहलक्ष्मी की लघु कहानियां

Hindi Short Story: होली मेरा पसंदीदा पर्व रहा है हम सब बचपन में दो दिन  खूब जमकर  होली खेलते थे।शादी के बाद  हम असम गए,वहां पर पति के दोस्त के परिवार से घनिष्ठता हो गई हम साथ में घूमने जाते, त्योहार  भी संग ही मनाते । उनकी पत्नी शीला और  मैं  मिलकर होली की शानदार […]

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ये शगुन का लिफाफा तुम्हारे लिए नहीं था—हाय मैं शर्म से लाल हो गई

Hindi Funny Story: बात उन दिनों की है जब मेरी नई नई शादी हुई थी और अकसर मेरे पति के दोस्त या रिश्तेदार हमें खाने पर आमंत्रित करते थे। वापसी में वे शगुन भी देते। एक बार इनके बहुत अच्छे मित्र के यहां हम गए। उनसे पहली बार में ही बेहद आत्मीयता हो गई।डिनर के […]

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कभी दादी नहीं बनूंगी-जब मैं छोटा बच्चा था

Hindi Funny Story: बात लगभग 51-52 वर्ष पुरानी है। तब मेरी उम्र 7 या 8 वर्ष रही होगी। खुर्जा उत्तर प्रदेश में बुआ की ननद की शादी में हम लोग सपरिवार गए हुए थे। शादी हवेलीनुमा धर्मशाला में थी,जिसकी तीन मंजिल थी। शादी की सभी रस्में बहुत हर्षौल्लास से हो रही थीं। जूता चुराई के […]

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लड्डू का बंटवारा—जब मैं छोटा बच्चा था

Hindi Funny Story: मां जब भी कुछ पकवान बनाती तो पहले भाई को फिर छोटी बहन को और आखिरी में मुझे देती थी। मैं कम मिलने की शिकायत करती तो मां बड़े प्यार से कहतीं तुम बड़ी हो छोटे भाई बहन से ऐसे होड़ नहीं करते। मगर अक्सर ये बात मुझे बहुत बुरी लगती थी। […]

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चिड़िया का बच्चा और बंदर महाराज-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Hindi Short Story: एक घने जंगल में एक बड़ा सा पेड़ था। उसी पेड़ की ऊँची डाल पर एक चिड़िया और उसका परिवार रहता था। नीचे उसी पेड़ के तले रहते थे बंदर महाराज। वे बड़े ज्ञानी माने जाते थे। हमेशा अपने पास मोटा सा पंचांग रखते और हर आने-जाने वाले को भविष्य बताते। जंगल […]

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जब हम छोटे बच्चे थे-हाय मैं शर्म से लाल हुई

Hindi Funny Story: जब हम छोटे बच्चे थे– बात बात पर कोई भी डाँट देता– कोई भी चाँटा लगा देता– मगर क्या मजाल कि कोई बचा ले।“‘कूटना ‘ हमारी भारतीय परंपरा है। पहले घर में ही सब मसालों को कूट पीटकर तैयार किया जाता था और फिर जो उसमें महक आती थी वाह! क्या कहने […]

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लड़की का फोटो – हाय मैं शर्म से लाल हुई

Hindi Funny Story: बात अभी पिछले महीने की है। कुछ दिन के लिए मैं भैया भाभी के पास उदयपुर गई थी। आने से एक दिन पहले भाभी मुझे बाजार ले कर गई। साथ में मेरी नौ साल भतीजी सारा भी थी। भाभी मुझे साड़ी दिलाने एक दुकान पर ले गई। एक भैया हमें साड़ी दिखा […]

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हाय! मैं शरम से टमाटर हुई – व्यंग्य

Hindi Vyangya: कुलमिलाकर शरम ने गुलामी के कपड़े उतार कर बेशरमाई का चोला अंगीकार कर लिया है। युवाओं की शरम भी, आधुनिकता की दौड़ में संस्कार की वर्जनाओं को तोड़ते हुए बेशरम हो चली है। बहुत प्यारा नजारा है। श्रीमती जी सोफे पर लेटीं हुई हैं। नजरें उनकी पत्रिका पर टिकी हैं। पढ़ते हुएमंद-मंद मुस्कुरा […]

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