Gut health and gynaecological cancer risk
Gut health and gynaecological cancer risk

Overview:गट हेल्थ महिलाओं में गाइनकोलॉजिकल कैंसर के रिस्क को कैसे प्रभावित करती है- एक्सपर्ट ने बताया पूरा कनेक्शन

महिलाओं में गट हेल्थ का गाइनकोलॉजिकल कैंसर के जोखिम से सीधा संबंध होता है। आंतों में मौजूद अच्छे और खराब बैक्टीरिया हार्मोन संतुलन, इम्यून सिस्टम और सूजन पर असर डालते हैं, जो कैंसर की संभावना को बढ़ा या घटा सकते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि संतुलित आहार, प्रोबायोटिक्स और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर महिलाओं में कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है।

Gut and Gynecologic Cancer Risk: आज गट यानी आंतों की भूमिका केवल खाना पचाने तक सीमित नहीं रह गई है। अब रिसर्च साफ बताती है कि गट हेल्थ का सीधा असर इम्यून सिस्टम, हार्मोन बैलेंस और शरीर में इंफ्लामेशन पर पड़ता है। हमारी आंतों में मौजूद अरबों अच्छे-बुरे सूक्ष्म जीव मिलकर गट माइक्रोबायोम बनाते हैं, जो पूरे शरीर की सेहत को कंट्रोल करता है।

जब गट माइक्रोबायोम संतुलित रहता है, तो यह मेटाबॉलिज्म को सही रखता है, हार्मोन को बैलेंस करता है और शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। लेकिन खराब खान-पान, ज्यादा दवाइयां, तनाव और नींद की कमी से गट हेल्थ बिगड़ सकती है। इसका असर खासतौर पर महिलाओं के हार्मोन पर पड़ता है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, गट हेल्थ खराब होने से एंडोमेट्रियल, ओवरी और सर्वाइकल जैसे गाइनोकोलॉजिकल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रतिभा सिंघल बताती हैं कि गट माइक्रोबायोम हार्मोन, सूजन और इम्यून सिस्टम के जरिए कैंसर रिस्क को प्रभावित करता है। इसलिए महिलाओं के लिए गट हेल्थ को समझना और संभालना बेहद जरूरी है।

गट माइक्रोबायोम और हार्मोन संतुलन का संबंध

An unhealthy gut may increase gynaecological cancer risk.
Gut health plays a key role in women’s overall health.

गट माइक्रोबायोम का एक अहम काम हार्मोन, खासकर एस्ट्रोजन को कंट्रोल करना है। आंतों में मौजूद कुछ अच्छे बैक्टीरिया शरीर से अतिरिक्त एस्ट्रोजन को बाहर निकालने में मदद करते हैं। इससे हार्मोन का स्तर संतुलित बना रहता है।

लेकिन जब गट हेल्थ खराब होती है, तो यह प्रक्रिया ठीक से नहीं हो पाती। नतीजा यह होता है कि एस्ट्रोजन शरीर में ज्यादा समय तक बना रहता है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ एस्ट्रोजन एंडोमेट्रियल कैंसर का एक बड़ा रिस्क फैक्टर माना जाता है। डॉ. प्रतिभा सिंघल के अनुसार, हार्मोन असंतुलन धीरे-धीरे गर्भाशय और अंडाशय की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए गट हेल्थ को ठीक रखना हार्मोन बैलेंस के लिए बहुत जरूरी है।

खराब गट हेल्थ और क्रॉनिक इंफ्लामेशन का खतरा

जब गट माइक्रोबायोटा का संतुलन बिगड़ता है, तो आंतों की दीवार कमजोर हो सकती है। इस स्थिति को आम भाषा में ‘लीकी गट’ कहा जाता है। इसमें सूजन पैदा करने वाले तत्व खून में पहुंच जाते हैं।

यह लगातार बनी रहने वाला हल्का इंफ्लामेशन शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे डीएनए की मरम्मत में रुकावट आती है और असामान्य कोशिका वृद्धि का खतरा बढ़ जाता है। हार्मोन से जुड़े अंगों, जैसे गर्भाशय और अंडाशय में यह सूजन कैंसर के विकास को आसान बना सकती है। लंबे समय तक सूजन रहना शरीर के लिए एक छुपा हुआ खतरा बन जाता है।

इम्यून सिस्टम, गट हेल्थ और सर्वाइकल कैंसर

Chronic inflammation can trigger disease over time.
Gut bacteria affect hormones and immunity

गट हेल्थ का सीधा असर इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। जब आंतें स्वस्थ होती हैं, तो शरीर इन्फेक्शन से बेहतर तरीके से लड़ पाता है। लेकिन खराब गट हेल्थ इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकती है।

डॉ. सिंघल बताती हैं कि सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण HPV इन्फेक्शन होता है। अगर इम्यून सिस्टम कमजोर हो, तो शरीर इस वायरस को ठीक से खत्म नहीं कर पाता। इससे कोशिकाओं को लंबे समय तक नुकसान होता रहता है और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। खराब पाचन और कमजोर गट हेल्थ इस रिस्क को और बढ़ा देती है।

मोटापा, डायबिटीज और गट माइक्रोबायोम का कनेक्शन

गट हेल्थ का संबंध मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज से भी है। ये सभी समस्याएं महिलाओं में एंडोमेट्रियल कैंसर के पहले से पहचाने गए रिस्क फ़ैक्टर्स हैं।

जब गट माइक्रोबायोम ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में इंफ्लामेशन बढ़ती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस हो सकता है। इससे वजन बढ़ना और ब्लड शुगर कंट्रोल बिगड़ना आम हो जाता है। यह स्थिति हार्मोन संतुलन को और खराब कर देती है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए गट हेल्थ को सुधारना मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए भी जरूरी है।

गट हेल्थ सुधारकर कैंसर रिस्क कैसे घटाएं

डॉ. प्रतिभा सिंघल के अनुसार, गट माइक्रोबायोम अकेले कैंसर से पूरी सुरक्षा नहीं देता, लेकिन इससे जुड़े कई रिस्क फ़ैक्टर्स को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए फाइबर से भरपूर खाना, फल-सब्जियां, साबुत अनाज और दही जैसी चीजें फायदेमंद हैं।

नियमित व्यायाम, पूरी नींद और तनाव को कम करना भी गट हेल्थ सुधारने में मदद करता है। इसके अलावा बिना जरूरत एंटीबायोटिक, ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और बहुत अधिक चीनी से बचना चाहिए। अच्छी गट हेल्थ न सिर्फ पाचन को बेहतर बनाती है, बल्कि महिलाओं के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स की हेल्थ को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में भी मदद करती है।

मेरा नाम दिव्या गोयल है। मैंने अर्थशास्त्र (Economics) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से हूं। लेखन मेरे लिए सिर्फ एक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद का एक ज़रिया है।मुझे महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक...