Menopause vs Malignancy Symptoms
Menopause vs Malignancy Symptoms

Overview:मेनोपॉज़ या कैंसर - डॉक्टर बता रहे हैं दोनों के बीच फर्क पहचानने के आसान संकेत

यह कहानी मेनोपॉज़ और कैंसर के बीच फर्क को आसान भाषा में समझाती है। उम्र बढ़ने पर हार्मोनल बदलाव से कई लक्षण आते हैं, जो कई बार कैंसर जैसे लग सकते हैं। कहानी बताती है कि कौन-से संकेत सामान्य हैं और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, सही जानकारी और डॉक्टर से सलाह लेकर महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर सही फैसला ले सकती हैं।

Menopause vs Malignancy: थोड़ी-सी जागरूकता बहुत दूर तक काम आती है
“क्या यह सिर्फ मेनोपॉज़ है… या मुझे चिंता करनी चाहिए?”

यह लेख डॉ. ज्योत्सना गोयल, कंसल्टेंट – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी, सरवोदय हॉस्पिटल, सेक्टर-8, फरीदाबाद द्वारा लिखा गया है। एक महिला सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट होने के नाते, यह सवाल मुझे बहुत बार सुनने को मिलता है— “डॉक्टर, ये मेनोपॉज़ है या कुछ और?”

अक्सर महिलाएं मेनोपॉज़ के दौरान शरीर में कई बदलाव महसूस करती हैं। कभी अचानक गर्मी लगती है, कभी नींद नहीं आती, तो कभी मूड बिना वजह बदल जाता है। ऐसे में यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि जो परेशानी हो रही है, वह सामान्य मेनोपॉज़ है या किसी गंभीर बीमारी का संकेत।

मेनोपॉज़ और कैंसर के कुछ लक्षण एक जैसे लग सकते हैं, इसी वजह से कई बार महिलाएं कन्फ्यूज़ हो जाती हैं और डॉक्टर के पास जाने में देर कर देती हैं। लेकिन कुछ ऐसे संकेत होते हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए। इन्हें “रैड फ्लैग” लक्षण कहा जाता है। इन्हें समय पर पहचानना और डॉक्टर से सलाह लेना आपकी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है।

मेनोपॉज़ क्या है और यह कब होता है

Not every body change after 40 is a sign of cancer.
Menopause symptoms can sometimes mimic serious health conditions.

मेनोपॉज़ महिलाओं के जीवन का एक सामान्य पड़ाव है। आमतौर पर यह 45 से 55 साल की उम्र के बीच होता है। जब लगातार 12 महीनों तक पीरियड नहीं आते, तो माना जाता है कि मेनोपॉज़ हो चुका है। इस दौरान शरीर में हार्मोन का स्तर बदलता है, जिसकी वजह से कई तरह के लक्षण दिखते हैं।

कई महिलाओं को अचानक गर्मी लगती है, रात में पसीना आता है या नींद ठीक से नहीं आती। कुछ को चिड़चिड़ापन, थकान या उदासी भी महसूस होती है। यह सब हार्मोन के बदलाव की वजह से होता है और ज़्यादातर मामलों में समय के साथ ठीक भी हो जाता है। मेनोपॉज़ कोई बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर का नेचुरल बदलाव है।

मेनोपॉज़ के आम लक्षण जो अक्सर दिखते हैं

Hormonal changes can affect the entire body.
Persistent symptoms should never be ignored.

मेनोपॉज़ के दौरान शरीर में कई छोटे-बड़े बदलाव होते हैं। सबसे पहले पीरियड अनियमित हो जाते हैं और धीरे-धीरे बंद हो जाते हैं। इसके अलावा अचानक गर्मी लगना, रात में पसीना आना, नींद न आना और मूड बार-बार बदलना आम बात है।

कई महिलाओं को योनि में सूखापन महसूस होता है, जिससे संबंध बनाते समय परेशानी हो सकती है। कुछ को बार-बार पेशाब लगती है या पेशाब रोकने में दिक्कत होती है। वजन बढ़ना, पेट फूलना, जोड़ों में दर्द और लगातार थकान भी देखी जाती है। ये सभी लक्षण आमतौर पर हार्मोन के कारण होते हैं और सही खान-पान और लाइफस्टाइल से संभाले जा सकते हैं।

कैंसर के लक्षण जो चिंता की वजह बन सकते हैं

Regular health checkups are essential for women.
Early diagnosis can save lives.

कैंसर तब होता है जब शरीर की कोशिकाएं बिना कंट्रोल के बढ़ने लगती हैं। महिलाओं में यह गर्भाशय, ओवरी या सर्वाइकल एरिया में भी हो सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के लग सकते हैं और मेनोपॉज़ जैसे महसूस हो सकते हैं।

लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो सामान्य नहीं होते। जैसे मेनोपॉज़ के बाद खून आना, पेट या पेल्विक हिस्से में लगातार दर्द रहना, बिना वजह वजन तेजी से कम होना या बहुत ज़्यादा कमजोरी महसूस होना। अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इन्हें हल्के में लेना ठीक नहीं है।

“रैड फ्लैग” लक्षण जिन्हें नजरअंदाज़ न करें

कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। अगर मेनोपॉज़ के बाद खून आए, तो यह बिल्कुल भी सामान्य नहीं है। इसी तरह पेट में लगातार दर्द, पेट का हमेशा फूला रहना, भूख न लगना या थोड़ा खाने पर ही पेट भर जाना भी चिंता का संकेत हो सकता है।

इसके अलावा अचानक और बिना कोशिश वजन कम होना, पेशाब या शौच की आदतों में बदलाव होना भी “रैड फ्लैग” माने जाते हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो इंतज़ार करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए, ताकि सही समय पर जांच हो सके।

डॉक्टर से कब मिलें और जांच क्यों ज़रूरी है

मेनोपॉज़ के ज़्यादातर लक्षण समय के साथ ठीक हो जाते हैं, लेकिन कैंसर से जुड़े लक्षण अक्सर बढ़ते जाते हैं। अगर कोई लक्षण लगातार बना रहे या धीरे-धीरे बढ़े, तो डॉक्टर से सलाह लेना बहुत ज़रूरी है।

45 साल के बाद महिलाओं को नियमित हेल्थ चेक-अप कराते रहना चाहिए। पैप स्मीयर टेस्ट, मैमोग्राफी और पेल्विक अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ सकती हैं। मेनोपॉज़ ज़िंदगी की नई शुरुआत है, अंत नहीं। इसे अपनाएं, लेकिन अपने शरीर के संकेतों को समझें। सही जानकारी और जागरूकता ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।

मेरा नाम दिव्या गोयल है। मैंने अर्थशास्त्र (Economics) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से हूं। लेखन मेरे लिए सिर्फ एक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद का एक ज़रिया है।मुझे महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक...